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वीर्य (vIrya)

 
शब्दसागरः
English
वीर्य्य
n.
(-र्य्यं)
1. Strength, vigour, power.
2. Dignity, consequence.
3.
Fortitude, firmness.
4. Semen virile.
5. Splendour, lustre.
6.
Heroism, valour.
7. Seed, (of plants, &c.)
8. Efficacy.
E.
वीर a
hero, and यत्
aff.
or वीर् to be strong, and अच् and यत् affs.
Capeller Eng
English
वीर्य॑
n.
manliness, courage, strength, heroic deed, semen
virile.
Yates
English
वीर्य्य (र्य्यं) 1.
n.
Nobility, dignity,
fortitude, splendor, heroism, vi-
gour, seed.
Spoken Sanskrit
English
वीर्य vIrya
n.
energy
वीर्य vIrya
n.
lustre
वीर्य vIrya
n.
courage
वीर्य vIrya
n.
semen virile
वीर्य vIrya
n.
bravery
वीर्य vIrya
n.
heroic deed
वीर्य vIrya
n.
strength
वीर्य vIrya
n.
power
वीर्य vIrya
n.
heroism
वीर्य vIrya
n.
efficacy
वीर्य vIrya
n.
virility
वीर्य vIrya
n.
poison
वीर्य vIrya
n.
robustness
वीर्य vIrya
n.
dignity
वीर्य vIrya
n.
valour
वीर्य vIrya
n.
manly vigour
वीर्य vIrya
n.
manliness
वीर्य vIrya
n.
consequence
वीर्य vIrya
n.
splendour
अनन्त-वीर्य ananta-vIrya
adj.
of unlimited potency
Wilson
English
वीर्य्य
n.
(-र्य्यं)
1 Strength, vigour, power.
2 Dignity, consequence.
3 Fortitude, firmness.
4 Semen virile.
5 Splendour, lustre.
6 Heroism, valour.
7 Seed, (of plants, &c.)
E.
वीर a hero, and यत्
aff.
, or वीर to be strong, and अच् and
यत्
aff.
Apte
English
वीर्यम् [vīryam], [वीर्-यत्, वीरस्य भावो यत् वा]
Heroism, prowess, valour
वीर्यावदानेषु कृतावमर्षः
Ki.*
3.43
R.*
2.4, 3.62
11.72
Ve.*
3.3.
Vigour, strength.
Virility
वीर्यशौर्याभ्यां पिता ऋषभ इतीदं नाम चकार
Bhāg.*
5.4.2.
Energy, firmness, courage.
Power, potency
जाने तपसो वीर्यम्
Ś.*
3.2.
Efficacy (of medicines)
अतिवीर्यवतीव भेषजे बहुरल्पीयसि दृश्यते गुणः
Ki.*
2.4
Ku.*
2. 48.
Semen virile
अमी हि वीर्यप्रभवं भवस्य
Ku.*
3.15
वसोर्वीर्योत्पन्नामभजत मुनिर्मत्स्यतनयाम्
Pt.*
4.5.
Splendour, lustre.
The seed of plants.
Dignity, consequence.
Poison.
Gold (हिरण्य)
अन्नं वीर्यं ग्रहीतव्यं प्रेतकर्मण्य- पातिते
Mb.
* 12.165.39.
Comp.
-आधानम् impregnation. -करः marrow. -जः a son. -प्रपातः seminal effusion, discharge of semen. -शालिन्
a.
strong. -शुल्क
a.
purchased by valour. -हीन
a.
cowardly, pusilanimous.
seedless.
impotent.
Apte 1890
English
वीर्यं [वीर्-यत्, वीरस्य भावो यत् वा] 1 {1} Heroism, prowess, valour
वीर्यावदातेषु कृतावमर्षः Ki. 3. 43
R. 2. 4, 3. 62, 11. 72
Ve. 3. 3.
2 Vigour, strength.
3 Virility.
4 Energy, firmness, courage.
5 Power, potency
जाने तपसो वीर्यं Ś. 3. 2.
6 Efficacy (of medicines)
अतिवीर्यवतीव भेषजे बहुरल्पीयसि दृश्यते गुणः Ki. 2. 4
Ku. 2. 48.
7 Semen virile
Ku. 3. 15
Pt. 4. 50.
8 Splendour, lustre.
9 The seed of plants.
10 Dignity, consequence.
Comp.
जः a son.
प्रपातः seminal effusion, discharge of semen.
शालिन् a. strong.
हीन a. {1} cowardly, pusillanimous. {2} seedless. {3} impotent.
Monier Williams Cologne
English
वीर्य᳡
n.
(ifc. f(आ). ) manliness, valour, strength, power, energy,
RV.
&c.
&c.
heroism, heroic deed, ib.
manly vigour, virility, semen virile,
MBh.
Kāv.
&c.
efficacy (of medicine),
Kum.
Kir.
poison,
BhP.
splendour, lustre,
W.
dignity, consequence, ib.
Monier Williams 1872
English
वीर्य, अम्, n. vigour, strength, power
heroism,
prowess, valour, fortitude, courage, firmness
virile
energy, virility
dignity, consequence
splendor, lustre
semen virile
the seed of plants, &c.
(आ), f. vigour,
energy, virility.
—वीर्य-ज, अस्, m. a son.
—वीर्य-
धर, आस्, m. pl., N. of a race.
—वीर्य-पार-
मिता, f. one of the six perfections (with Buddhists).
—वीर्य-प्रपात, अस्, m. discharge of semen virile.
—वीर्य-वत्, आन्, अती, अत्, possessing vigour, vigor-
ous, strong, stout, robust
efficacious, overcoming,
victorious.
—वीर्य-विरहित, अस्, आ, अम्, devoid of
prowess or vigour, &c.
—वीर्य-विशिष्ट, अस्, आ, अम्,
possessed of courage, vigour, &c.
—वीर्य-वृद्धि-
कर, अस्, ई, अम्, causing an increase of virile energy
(अम्), n. an aphrodisiac.
—वीर्य-शालिन्, ई, इनी, इ,
possessing vigour or heroism, strong, heroic.
—वीर्य-
शुल्क, अस्, आ, अम्, having prowess or heroism as
its price, to be purchased by valour.
—वीर्य-हानि,
इस्, f. loss of vigour or virile energy
impotence.
—वीर्य-हीन, अस्, आ, अम्, deprived of strength
cowardly
seedless.
—वीर्या-वत्, आन्, अती, अत्, Ved.
= वीर्य-वत्.
—वीर्यावदान (°य-अव्°), अम्, n.
effecting anything by prowess
(आनि), n. pl. valour
and achievements.
—वीर्यावधूत (°य-अव्°), अस्,
आ, अम्, overcome or surpassed in prowess.
Macdonell
English
वीर्य vīr-yâ,
a.
manliness, valour
power, 🞄potency, efficacy
heroic deed
manly vigour, 🞄semen virile: (a) -kāma,
a.
desirous of manly 🞄vigour
(â)-vat,
a.
strong, powerful, efficacious
🞄(a) -śulka,
n.
heroism as a price
a.
purchased 🞄[Page294-2] 🞄by heroism
(a) -sattva-vat,
a.
possessed of 🞄valour and worth.
Benfey
English
वीर्य वीर्य, i. e. वीर + य,
n.
1.
Strength, power, Chr. 23, 33
Vikr. d.
16.
2. Fortitude, Chr. 4, 14.
3.
Heroism.
4. Dignity.
5. Splendour.
--
Comp.
अ-मोघ-,
adj.
1. of unfail-
ing virility. 2. of unfailing power.
निस्-,
adj.
powerless, Hit. ii. d. 6.
महा-,
I.
adj.
very strong, Rām. 3, 53,
12.
II.
m.
Brahman.
वि-चित्र-,
m.
a proper name, Chr. 3, 6.
सम-,
adj.
having equal strength, Hit. iv. d.
20.
सु-,
n.
1. great vigour. 2.
abundance in heroes, Chr. 288, 12 =
Rigv. i. 48, 12 (cf. i. 40, 2).
Hindi
Hindi
जीवन शक्ति, उत्साह, वीर्य,
Apte Hindi
Hindi
वीर्यम्
नपुं*
- वीर् + यत्
"शूरवीरता, पराक्रम, बहादुरी"
वीर्यम्
नपुं*
- -
"बल, सामर्थ्य"
वीर्यम्
नपुं*
- -
पुंस्त्व
वीर्यम्
नपुं*
- -
"ऊर्जा, दृढ़ता, साहस"
वीर्यम्
नपुं*
- -
"शक्ति, क्षमता "
वीर्यम्
नपुं*
- -
"(औषधियों की) अचूकता, अतिवीर्यवतीव भेषजे बहुरल्पीयसि दृश्यते गुणः @ कि* २/२४, @ कु* २/४८"
वीर्यम्
नपुं*
- -
"शुक्र, वीर्य"
वीर्यम्
नपुं*
- -
"आभा, कान्ति"
वीर्यम्
नपुं*
- -
"गौरव, महिमा"
वीर्यम्
नपुं*
- वीर+यत्
विष
वीर्यम्
नपुं*
- वीर+यत्
सोका
वीर्यम्
नपुं*
- वीर+यत्
"पुंस्त्व, जननशक्ति"
वीर्यम्
नपुं*
- वीर+यत्
"बीज, धातु"
L R Vaidya
English
vIrya {% n. %} 1. Vigour, strength
2. prowess, valour, heroism, R.ii.4, iii.62, xi.47, 72
3. virility
4. semen virile
5. splendour, lustre
6. dignity, consequence
7. efficacy, अतिवीर्यवतीव भेषजे बहुरल्पीयसि दृश्यते गुणः Kir.ii.24.
Bopp
Latin
वीर्य n. (a वीर s. य) vis, robur, fortitudo. IN. 4. 8. H. 1. 4.
Anekartha-Dvani-Manjari
Sanskrit
वीर्य
क्ली
वीर्य, शुक्र, बल, बीज
वीर्यं शुक्रं बलं वीर्यं वीर्यं बीजमुदाहृतम्
verse 2.1.1.51
page 0011
पराक्रम
पु
पराक्रम, वीर्य, उद्योग
समर्थेऽधिकृतेऽध्यक्षो वीर्योद्योगौ पराक्रमौ २८
verse 3.1.1.28
page 0015
Lanman
English
vīryà, n.
—1. manliness, courage
strength
—2. concrete, heroic deed.
[vīrá, 1212d 4.]
Sanskrit Tibetan
Tibetan
khu ba
१) कच २) काल ३) कुन्द ४) द्रवत्व ५) पुष्पक ६) बहुज ७) बीज ८) मण्ड ९) रस १०) रेतः ११) वीर्य १२) शुक्र १३) हिरण्य
अभिधानचिन्तामणिः
Sanskrit
--source--
शोकः शुक्शोचनं खेदः क्रोधो मन्युः क्रुधा रुषा
क्रुत्कोपः प्रतिघो रोषो रुट् चोत्साहः प्रगल्भता २९९
अभियोगोद्यमौ प्रौढिरुद्योगः कियदेतिका
अध्यवसाय ऊर्जोथ वीर्यं सोऽतिशयान्वितः ३००
-wordlist-
शोक (पुं), शुच् (स्त्री), शोचन (क्ली), खेद (पुं), क्रोध (पुं), मन्यु (पुं), क्रुधा (स्त्री), रुषा (स्त्री), क्रुध् (स्त्री), कोप (पुं), प्रतिघ (पुं), रोष (पुं), रुष् (स्त्री), उत्साह (पुं), प्रगल्भता (स्त्री), अभियोग (पुं), उद्यम (पुं), प्रौढि (स्त्री), उद्योग (पुं), कियदेतिका (स्त्री), अध्यवसाय (पुं), ऊर्ज (पुं), वीर्य (क्ली)
--source--
शुक्रं रेतो बलं वीर्यं बीजं मज्जसमुद्भवम्
आनन्दप्रभवं पुंस्त्वमिन्द्रियं किट्टवर्जितम् ६२९
पौरुषं प्रधानधातुर्लोम रोम तनूरुहम्
-wordlist-
शुक्र (क्ली), रेतस् (क्ली), बल (क्ली), वीर्य (क्ली), बीज (क्ली), मज्जसमुद्भव (क्ली), आनन्दप्रभव (क्ली), पुंस्त्व (क्ली), इन्द्रिय (क्ली), किट्टवर्जित (क्ली), पौरुष (क्ली), प्रधानधातु (पुं), लोमन् (क्ली), रोमन् (क्ली), तनूरुह (पुंक्ली)
अभिधानरत्नमाला
Sanskrit
शुक्र
शुक्र, वीर्य, बल, बीज, इन्द्रिय, रेतस्
शुक्रं वीर्यं बलं बीजमिन्द्रियं रेत उच्यते
verse 3.1.1.638
page 0072
रस
रस, शृङ्गारादि, लवणादि, पारद, राग, निर्यास, वीर्य, गुण, धातु, विष, घृतादि
शृङ्गारादिषु नवसु लवणादिषु षट्सु पारदे रागे
निर्यासवीर्यगुणधातुविषघृतादौ रसः प्रोक्तः ८६१
verse 5.1.1.861
page 0098
शब्दकल्पद्रुमः
Sanskrit
वीर्य्यं,
क्ली,
(वीरे साधु तत्र साधुः इति यत् यद्बा, वीर्य्यतेऽनेनेति वीर विक्रान्तौ + “अचो यत् ।”३ ९७ इति यत् यद्वा वीरस्य भावः यत् ।)चरमधातुः तत्पर्य्यायः शुक्रन् तेजः ३रेतः बीजम् इन्द्रियम् इति मनुष्य-वर्गे अमरः
वीर्य्यं शक्तिः सा पृथिव्यादीनांयः सारभागः तदतिशयरूपा सा द्विविधाचिन्त्याचिन्त्यक्रियाहेतुत्वेन तत्र चिन्त्यक्रिया-हेतुर्या द्रव्यरसादीनां स्वस्वकर्म्मणि स्वभाव-सिद्धा शक्तिः अचिन्त्यक्रियाहेतुश्च प्रभापर-पर्य्यायः द्रव्याणां रसाद्यननुरूपकार्य्यकरण-शक्तिः उक्तञ्च ।“भूतप्रभावातिशयो द्रव्ये पाके रसे स्थितः ।चिन्त्याचिन्त्यक्रियाहेतुर्वीर्य्यं धन्वन्तरेर्म्मतम्
”इति चक्रदत्तोपरि शिवदासीयटीका
*
परवीर्य्योदरपातदोषो यथा, --“परवीर्य्यं यदुदरं कामतोऽकामतोऽपि वा ।अहल्ये याति दैवेन तदुपायं निशामय
अकामतो दुष्टा सा प्रायश्चित्तेन शुद्ध्यति ।कामभोगेन त्याज्या सा कर्म्मभोगेन शुद्ध्यति
पितृपाके दैवपाके पूजायां नाधिकारिणी ।षष्टिं वर्षसहस्राणि क्षयं कृत्वा स्वकर्म्मणः ।प्रयाति भोगदेहं सा तस्यान्ते पापकर्म्मणः
”इति ब्रह्मवैवत्तै श्रीकृष्णजन्मखण्डे ४७ अध्यायः
अतिशयशक्तिभागुत्साहः इति स्वर्गवर्गेअमरः
कर्म्मसु सुकरः प्रत्ययः उत्साहः ।इति मधुः कर्म्मसु दृढयत्नकारको भाघउत्साहः इति रमानाथः कर्म्मसु प्रत्ययउत्साह इति नयनानन्दः अशक्ये बलोद्यमउत्साह इति केचित् उत्साहः अतिशय-शक्तिभाक् वीर्य्यम् अतिशयितोऽध्यवसायोवीर्य्यं साधु वीर्य्यमित्यर्थः वीर्य्या स्त्री वीर्य्यंवीर्य्य इति कोषान्तरम् इति भरतः
*
बलम् प्रभावः इति नानार्थे अमरः
(यथा, ऋग्वेदे २५ ।“अग्निः सनोति वीर्य्याणि विद्वान्सनोति वाजममृताय भूषन्
”“वीर्य्याणि पशुपुत्त्रादिसम्पद्रूपाणि सामर्थ्यानि ।”इति तद्भाष्ये सायणः
यथा भागवते ।१७ ३१ ।“ज्ञानवैराग्यवीर्य्याणां नहि कश्चिद्ब्यपाश्रयः
”शरीरसामर्थ्यम् यथा, ऋग्वेदे ५० ।“स इद्राजा प्रतिजन्यानि विश्वाशुष्मेण तस्था-वभि वीर्य्येण
”“वीर्य्येण शरीरसामर्थ्येन ।” इति तद्भाष्यसायणः
शक्तिः यथा, मनौ ११ ३१ ।“न ब्रह्मणो वेदयते किञ्चिद्राजनि धर्म्मवित् ।स्ववीर्य्येणैव तान् शिष्यान्मानवानपकारिणः
स्ववीर्य्याद्राजवीर्य्याच्च स्ववीर्य्यं बलवत्तरम् ।तस्मात् स्वेनैव वीर्य्येण निगृह्णीयादरीन् द्बिजः
”मनःशक्तिः यथा, भागवते १८ १५ ।“कृत्वा वत्सं सुरगणा इन्द्रं सोममदूदुहन् ।हिरण्मयेन पात्रेण वीर्य्यमोजो बलं पयः
”)औषधानां वीर्य्यस्य स्थितिकाला यथा, --“यामं कल्ककषायवीर्य्यमखिलं चूर्णञ्च पक्षत्रयंषण्मासान् घृतमोदकौ सहगुडौ मासत्रयंगुग्गुलोः ।सिद्धानां रसभस्मनां सुविपुलं वीर्य्यञ्च वर्षत्रयंकिञ्चिद्गन्धविवर्ज्जितं गुणपरं तैलं पुराणं महत्
”इति नारायणदासकृतपरिभाषा
तेजः इति मेदिनी
चेतः दीप्तिः इतिशब्दरत्नावली
वाचस्पत्यम्
Sanskrit
वीर्य्य
न०
वीर--यत्, वीरस्य भावो यत् वा देहस्थेचरमधातौ शुक्रे पराक्रमे बले प्रभावे अ-मरः तेजसि मेदि० दीप्तौ द्रव्यनिष्ठे रसवि-पाकादि शक्तिरूपे प्रभावभेदे सुश्रुतः “वीर्य्यं प्रधा-नमिति कस्मात्तद्वशेनौषधकमनिष्पत्तेः इहौषध-कर्माण्यूर्द्ध्वाधोभागोभयभागसंशोधनसंशमनसंग्राहकाग्नि-दीपनप्रपीडनलेखनवृंहणरसायनवाजीकरणश्वयथुकरण-विलयनदहनदारणमादनप्राणघ्नविषप्रशमनानि वीर्य्य-प्राधान्याद्भवन्ति तच्च वीर्य्यं द्विविधमुष्णं शीतंचाग्निषोमीयत्वाज्जगतः केचिदष्टविधमाहुरुष्णं शीतंस्निग्धं रूक्षं विशदं पिच्छिलं मृदु तीष्णं चेत्येतानि वीर्य्याणि स्वबलगुणोत् कर्षाद्रसमामभूयात्मकर्म कुर्वन्ति यथातावन्महत् पञ्चमूलं कषायं तिक्तानुरसं वातं शमयेदुष्णवीर्य्यत्वात् तथा कुलत्थः कषायकटुकत्वात्, पलाण्डुः स्नेहभावाच्च मधुरश्चेक्षुरसो वातं वर्द्धयति शीतवीर्य्यत्वात् ।कटुच्चा पिष्पली पित्तं शमयति मृदुशीतवीर्य्यत्वादम्लमाम-मलकं लवणं सैन्धवञ्च तिक्ता काकमाची पित्तं वर्द्धय-त्युष्णवीर्य्यत्वान्मधुरा मत्स्याश्च कटुकं मूलकं श्लेष्माणंवर्द्धयति स्निग्धवीर्य्यत्वात् अम्लं कपित्थं श्लेष्माणंशमयति रूक्षवीर्य्यत्वान्मधुरं क्षौद्रञ्च तदेतन्निदर्शनमा-त्रमुक्तम् भवन्ति चात्र ये रसावातशमना भवन्ति यदितेषु वै रौक्ष्यलाघवशैत्यानि ते हन्युः समीर-णम् ये रसाः पित्तशममा भवन्ति यदि तेषु वै तै-क्ष्योष्ण्यलघुताश्चैव ते तत्कर्मकारिणः ये रसाःश्लेष्मशमना भवन्ति यदि तेषु वै स्नेहगौरवशैत्यानिबलासं वर्द्धयन्ति ते” “तस्माद्वीर्य्यं प्रधानमिति” ।द्रव्यगतवीर्य्यं रसाद्यनुगुणशक्तिविशेषरूपम् तच्च चि-न्त्याचिन्त्यक्रियाहेतुत्वेन द्विविधम् तत्र चिन्त्यक्रिया-हेतुः प्रभावापरचर्य्यायो द्रव्याणां रसाद्यनुरूपकार्य्य-करणशक्तिः यथोक्तं “भूतप्रभावातिशयो द्रव्ये पाके रसेस्थितः चिन्त्याचिन्त्यक्रियाहेतुर्वीर्य्यं धन्वन्तरेर्मतम्”अक्रद० भावप्र० वीर्य्यप्रभावयोर्भेद उक्तो यथा“द्रव्ये रसो गुणो वीर्य्यं विपाकः शक्तिरेव प-दार्थाः पञ्च निष्ठन्ति स्वं स्वं कुर्वन्ति कर्म च” इतिसामान्यतः द्रव्यगतान् पञ्च पदार्थानुक्त्वा रसगुणानुक्त्रा च“उष्णशीतगुणोत्कर्षात् बुधैर्वीर्य्यं द्विधा स्मृतम् यत्सर्वमग्निषोमीयं दृश्यते भुवनत्रयम्” वाग्भट्टोक्तलक्त्वा च“विपाकञ्च दर्शयित्वा प्रभावो लक्षितो यथा “रसादि-साम्ये यत्कर्म विशिष्टं तत्प्रभावजम् दन्ती रसाद्यैस्तु-ल्यापि चित्रकस्य विरेचनी मधूकस्य मृद्वीका घृतंक्षीरस्य दीपनम् प्रभावस्तु यथा धात्री लकुचस्यरसादिभिः समापि कुरुते दोषत्रितयस्य विनाशनम् ।कचित्तु केवलं द्रव्यं कर्म कुर्य्यात् प्रभावतः ज्वरं हन्तिशिरोबद्धा सहदेवीजटा यथा” तथा नानौषधियोगेफलं प्रति स्वभाव एवाश्रयणीयो तु तत्र रसादिहे-तुविचारः कर्त्तव्यः यत आह सुश्रुतः “अमी सामान्य-चिन्त्यानि प्रसिद्धानि स्वभावदः आगमेनोपयोज्यानिभेषजानि विचक्षणैः प्रत्कीतक्षणफलाः प्रसिद्धाश्च स्व-भावतः नौषधीहेतुर्भिषजा परीक्ष्येत कदाचन ।विरुद्धगुणसंयोगे भूयसाल्पं हि जायते रसं विपाकस्तौवीर्य्यं प्रभावस्तान् व्यापीहति” इत्यन्तेन रसगुणवीर्य्यविवाञ्चकवीर्य्यप्रभावस्वरूपाण्युक्तानि अतस्तयोर्भेदो युक्तः
Capeller
German
वीर्य
n.
Männlichkeit, Kraft, Tapferkeit,
Heldenthat
Manneskraft, Same.
Grassman
German
(vīryà), vīría, n. [von vīrá], 1〉 Heldenkraft, Heldenmuth
2〉 Heldenthat, oft mit kṛ (kṛtá, kártua). Vergl. dṛṣṭá-vīria und die Adj.: [Page1319] ánutta, bhū́ri, mahát, śáśvat, supravācaná
pūrviá.
-am 1〉 {57, 5}
{80, 7}. _{80, 8}
{163, 8}
{204, 11}
{396, 6}
{408, 5}
{538, 8}
{671, 7}
{720, 1}
{825, 1}
{869, 5}
{913, 25}
{923, 19}. _{923, 21}
{1023, 1}
{1024, 1}. 2〉 {208, 3}
{246, 9}
{267, 7}
{326, 8}
{459, 3}.
-eṇa (-eṇā) 1〉 {55, 3}
{103, 7}
{154, 2}
{202, 5}
{314, 5}
{323, 2}
{346, 7}
{383, 14}
{459, 7}
{930, 4}.
[I.] 1〉 {80, 15} índram kás parás.
-āya 1〉 {103, 5}
{266, 5}
{270, 5}
{460, 1}
{471, 1}
{477, 2}
{670, 18}
{822, 7}
{856, 4}. 2〉 {61, 14}
{536, 1}.
-asya 1〉 ī́śiṣe {91, 23}. 2〉 vidús te asyá {131, 4}. carkiran _{131, 5}.
-e [L.] 1〉 {469, 8}.
[pl.] 1〉 {207, 2}
{644, 21} (ámitāni). 2〉 {212, 3}
{221, 10}
{328, 10}
{383, 13}
{500, 1}
{534, 14}
{672, 6}
{865, 5}
{938, 1}. _{938, 8}.
-āni 1〉 {259, 2}
{264, 3}
{280, 1}
{943, 9}. 2〉 {32, 1}
{108, 5}
{117, 25}
{154, 1}
{162, 1}
{294, 4}
{671, 3}
{709, 1}
{939, 7}.
-ais 1〉 {213, 3}
{288, 15}.
Burnouf
French
वीर्य वीर्य
n.
(वीर) vigueur
héroïsme
éclat,
lustre.
Virilité, semence virile.
वीर्यपारमिता la
perfection de l'énergie, une des 6 vertus cardinales, Bd.
वीर्यवत् a. (sfx. वत्) valeureux, énergique, vigoureux.
वीर्यशालिन् a. mms.
Stchoupak
French
वीर्य-
nt. héroïsme, vaillance, virilité, vigueur, énergie,
efficacité (avec अ° a. impuissant, sans virulence)
semence virile, sperme
-तम- sup. le plus puissant
très vigoureux
-वन्त्- a. puissant,
vaillant
efficace
-वत्त्व- nt. puissance, énergie, etc.
°काम- a. qui désire la virilité.
°ज-
m.
fils.
°धर-
m.
pl.
n.
des Kṣatriya du Plakṣadvīpa.
°पण- a. acheté à prix d'héroïsme.
°मत्त- a. v. enivré par la puissance.
°विभूति-
f.
manifestation de vaillance.
°शालिन्- a. héroïque, fort, etc.
°शुल्क- nt. valeur ou prix de l'héroïsme
a. acquis à prix
d'héroïsme
ayant pour prix l'héroïsme.
°शृङ्ग- nt. corne de la puissance.
°सत्त्ववन्त्- a. doué de vaillance
°संपन्न- a. v. id.
°सह-
m.
fils de Saudāsa.