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वारुणी (vAruNI)

 
शब्दसागरः
English
वारुणी
f.
(-णी)
1. Any spirituous liquor, or more properly, a particular
kind prepared from hogweed, ground with the juice of the date
or palm, and then distilled.
2. The west, the region of VARUṆA.
3. The 25th lunar asterism, of which VARUṆA is the ruling deity.
4. A species of Durbā-grass.
E.
वरुण the deity, अण् and ङीष् affs.
Yates
English
वारुणी (णी) 3.
f.
A spirituous li-
quor
the west
the 25th lunar
asterism
species of grass.
Wilson
English
वारुणी
f.
(-णी)
1 Any spirituous liquor, or more properly, a particular kind prepared from
hogweed, ground with the juice of the date or palm, and then distilled.
2 The west, the region of VARUṆA.
3 The 25th lunar asterism, of which VARUṆA is the ruling deity.
4 A species of Dūrbbā grass.
E.
वरुण the deity VARUṆA, अण् and ङीष् affs.
Apte
English
वारुणी [vāruṇī], 1 The west (the quarter presided over by Varuṇa).
Any spirituous liquor
पयो$पि शौण्डिकीहस्ते वारुणीत्यभिधीयते
H.*
3.11
करस्पन्दो$म्बरत्यागस्तेजोहानिः सरागता वारुणीसंगजावस्था भानुनाप्यनुभूयते
Pt.*
1.178 (where both senses are intended)
Ku.*
4.12
Bhāg.*
1.65.19.
The asterism शतभिषज्.
Dūrvā grass.
N.
of the wife of Varuṇa.
A kind of Dūrvā.
A kind of liquor
वारुणीं मदिरां पीत्वा मदोन्मथितचेतसाम्
Bhāg.*
1.15.23.Comp. -वल्लभः an epithet of Varuṇa.
Apte 1890
English
वारुणी 1 The west (the quarter presided over by Varuṇa).
2 Any spirituous liquor
पयोपि शौडिकीहस्ते वारुणीत्यभिधीयते H. 3. 11
Pt. 1. 178 (where both senses are intended)
Ku. 4. 12.
3 The asterism शतभिषज्.
4 Dūrvā grass.
5 N. of the wife of Varuṇa.
6 A kind of Dūrvā.
Comp.
वल्लभः an epithet of Varuṇa.
Monier Williams Cologne
English
वारुणी॑ a (ई),
f.
, see below
वारुणी b
f.
the western quarter or region (presided over by Varuṇa), the west (with or without दिश्),
VarBṛS.
N.
of partic. serpents,
GṛS.
(pl. ) of partic. sacred texts,
Gaut.
Varuṇa's female Energy (personified either as his wife or as his daughter, produced at the churning of the ocean and regarded as the goddess of spirituous liquor),
TĀr.
MBh.
R.
Pur.
a partic. kind of spirit (prepared from hogweed mixed with the juice of the date or palm and distilled), any spirituous liquor,
MBh.
Kāv.
&c.
N.
of Śiva's wife,
L.
a partic. fast-day on the thirteenth of the dark half of Caitra,
Col.
Dūrvā grass or a similar species,
L.
colocynth,
L.
the Nakṣatra Śata-bhiṣaj (ruled by Varuṇa),
L.
N.
of a river,
R.
Apte Hindi
Hindi
वारुणी
स्त्री*
- यारुण + ङीप्
पश्चिम दिशा
वारुणी
स्त्री*
- -
कोई मद्रिरा
वारुणी
स्त्री*
- -
शतभिषज् नामक नक्षत्र
वारुणी
स्त्री*
- -
"एक प्रकार का घास, दूब"
वारुणी
स्त्री*
- वरुण+अण्
शराब का विशेष प्रकार
L R Vaidya
English
vAruRa {% (I) a. (f. णी) %} 1. Belonging or sacred to Varuṇa
2. given by Varuṇa.
vAruRI {% f. %} 1. The west
2. a spirituous liquor, असति त्वयि वारुणिमदः प्रमदानामधुना विडंबना K.S.iv.12
3. a kind of Dūrvā grass.
Anekartha-Dvani-Manjari
Sanskrit
वारुणी
स्त्री
वारुणी, मदिरा, पश्चिमा-दिक्
वारुणी मदिरा ज्ञेया पश्चिमा दिक् वारुणी ५३
verse 2.1.1.53
page 0011
Edgerton Buddhist Hybrid
English
Vāruṇī, n. of a rākṣasī: Māy 〔243.13〕.
Indian Epigraphical Glossary
English
vāruṇī, cf. mahāmahāvāruṇī, mahāvāruṇī (EI 25)
name of a
tithi.
Schmidt Nachtrage zum Sanskrit Worterbuch
German
वारुणी °Wasser, Vās. 267, 1.
Wordnet
Sanskrit
Synonyms:
इन्द्रवारुणी, विशाला, ऐन्द्री, चित्रा, गवाक्षी, गजचिर्भचा, मृगेर्वारु, पिटङ्गिकी, मृगादनी, इन्द्रा, अरुणा, गवादनी, क्षुद्रसहा, इन्द्रचर्भिटी, सूर्या, विषघ्नी, गणकर्णिका, अमरा, माता, सुकर्णी, सुफला, तारका, वृषभाक्षी, पोतपुष्पा, इन्द्रवल्लरी, हेमपुष्पी, क्षुद्रफला, वारुणी, बालकप्रिया, रक्तैर्वारुः, विषलता, शक्रवल्ली, विषापहा, अमृता, विषवल्ली, चित्रफला
noun
लताविशेषः यः भेषजयुक्तः दीर्घजीवी अस्ति तथा यस्य पर्णानि ताम्बुलस्य पर्णसदृशानि सन्ति।
"इन्द्रवारुणेः पुष्पाणि पीतवर्णीयानि सन्ति तथा समूहरूपेण सन्ति।"
Synonyms:
वारुणी, सुरा
noun
समुद्रमन्थने प्राप्ता मदिरा।
"समुग्रमन्थने प्राप्तेषु चतुर्दशेषु रत्नेषु एका वारुणी आसीत्।"
Synonyms:
मद्यम्, सुरा, मदिरा, वारुणी, हलिप्रिया, हाला, परिश्रुत्, वरुणात्मजा, गन्धोत्तमा, प्रसन्ना, इरा, कादम्बरी, परिश्रुता, कश्यम्, मानिका, कपिशी, गन्धमादनी, माधवी, कत्तोयम्, मदः, कापिशायनम्, मत्ता, सीता, चपला, कामिनी, प्रिया, मदगन्धा, माध्वीकम्, मधु, सन्धानम्, आसवः, अमृता, वीरा, मेधावी, मदनी, सुप्रतिभा, मनोज्ञा, विधाता, मोदिनी, हली, गुणारिष्टम्, सरकः, मधूलिका, मदोत्कटा, महानन्दा, सीधुः, मैरेयम्, बलवल्लभा, कारणम्, तत्वम्, मदिष्ठा, परिप्लुता, कल्पम्, स्वादुरसा, शूण्डा, हारहूरम्, मार्द्दीकम्, मदना, देवसृष्टा, कापिशम्, अब्धिजा
noun
मादकद्रवपदार्थः - यस्य सेवनं पापं तथा निन्दनीयम् इति मन्यन्ते।
"सः प्रतिदिनं सायङ्काले मद्यं पीत्वा गृहम् आगच्छति।"
Synonyms:
इन्द्रवल्ली, विशाला, ऐन्द्री, चित्रा, गवाक्षी, गजचिर्भटा, मृगेर्वारुः, पिटङ्कीकी, मृगादनी, इन्द्रा, अरुणा, गवादनी, क्षुद्रसहा, इन्द्रचिर्भिटी, सूर्या, विषघ्नी, गणकर्णिका, अमरा, ममाता, सुकर्णी, सुफला, तारका, वृषभाक्षी, पीतपुष्पा, इन्द्रवल्लरी, हेमपुष्पी, क्षुद्रफला, वारुणी, बालकप्रिया, रक्तैर्वारुः, विषलता, शक्रवल्ली, विषापहा, अमृता, विषवल्ली, चित्रफला, गवाक्षः
noun
एका वन्या लता यस्याः फलानि रक्तवर्णीयानि सन्ति।
"इन्द्रवल्यः फलं तिक्तम् अस्ति।"
Synonyms:
दूर्वा, वारुणी
noun
घासविशेषः यः श्वेतः हरीतः अस्ति।
"दूर्वायाः रसं स्वास्थ्यप्रदम्।"
Synonyms:
पार्वती, अम्बा, उमा, गिरिजा, गौरी, भगवती, भवानी, मङ्गला, महागौरी, महादेवी, रुद्राणी, शिवा, शैलजा, हिमालयजा, अम्बिका, अचलकन्या, अचलजा, शैलसुता, हिमजा, शैलेयी, अपर्णा, शैलकुमारी, शैलकन्या, जगद्जननी, त्रिभुवनसुन्दरी, सुनन्दा, भवभामिनी, भववामा, जगदीश्वरी, भव्या, पञ्चमुखी, पर्वतजा, वृषाकपायी, शम्भुकान्ता, नन्दा, जया, नन्दिनी, शङ्करा, शताक्षी, नित्या, मृड़ानी, हेमसुता, अद्रितनया, हैमवती, आर्या, इला, वारुणी
noun
शिवस्य पत्नी।
"पार्वती गणेशस्य माता अस्ति।"
Synonyms:
वारुणी
noun
शिवस्य पत्नी
"वारुण्याः उल्लेखः कोषे अस्ति"
Synonyms:
वारुणी
noun
एका नदी
"वारुण्याः उल्लेखः रामायणे वर्तते"
Synonyms:
वारुणी
noun
नदीविशेषः
"वारुण्याः वर्णनं रामायणे प्राप्यते"
Sanskrit Tibetan
Tibetan
chu lha'i phyogs
वारुणी
अभिधानचिन्तामणिः
Sanskrit
--source--
वारुणी तु शतभिषगजाहिर्बुध्नदेवताः ११४
पूर्वोत्तरा भाद्रपदा द्वय्यः प्रोष्ठपदाश्च ताः
-wordlist-
वारुणी (स्त्री), शतभिषज् (स्त्री), अजदेवताः (स्त्रीब), पूर्वभद्रपदाः (स्त्रीब), अहिर्बुध्नदेवताः (स्त्रीब), उत्तरभद्रपदाः (स्त्रीब), प्रोष्ठपदाः (स्त्रीब)
--source--
तिर्यग्दिशां तु पतय इन्द्राग्नियमर्नैरृताः
वरुणो वायुकुबेरावीशानश्च यथाक्रमम् १६९
-wordlist-
ऐन्द्री (स्त्री), पूर्वा (स्त्री), आग्नेयी (स्त्री), दक्षिणपूर्वा (स्त्री), यामी (स्त्री), दक्षिणा (स्त्री), नैरृती (स्त्री), दक्षिणपश्चिमा (स्त्री), वारुणी (स्त्री), पश्चिमा (स्त्री), वायव्या (स्त्री), उत्तरपश्चिमा (स्त्री), कौबेरी (स्त्री), उत्तरा (स्त्री), ऐशानी (स्त्री), उत्तरपूर्वा (स्त्री), इन्द्र (पुं), पूर्वदिक्पति (पुं), अग्नि (पुं), दक्षिणपूर्वदिक्पति (पुं), यम (पुं), दक्षिणदिक्पति (पुं), नैरृत (पुं), दक्षिणपश्चिमदिक्पति (पुं), वरुण (पुं), पश्चिमदिक्पति (पुं), वायु (पुं), उत्तरपश्चिमदिक्पति (पुं), कुबेर (पुं), उत्तरदिक्पति (पुं), ईशान (पुं), उत्तरपूर्वदिक्पति (पुं)
--source--
मद्यं मदिष्ठा मदिरा परिस्रुता कश्यं परिस्रुन्मधु कापिशायनम्
गन्धोत्तमा कल्यमिरा परिप्लुता कादम्बरी स्वादुरसा हलिप्रिया ९०२
शुण्डा हाला हारहूरं प्रसन्ना वारुणी सुरा
माध्वीकं मदना देवसृष्टा कापिशमब्धिजा ९०३
-wordlist-
मद्य (क्ली), मदिष्ठा (स्त्री), मदिरा (स्त्री), परिस्रुता (स्त्री), कश्य (क्ली), परिस्रुत् (स्त्री), मधु (क्ली), कापिशायन (क्ली), गन्धोत्तमा (स्त्री), कल्य (क्ली), इरा (स्त्री), परिप्लुता (स्त्री), कादम्बरी (स्त्री), स्वादुरसा (स्त्री), हलिप्रिया (स्त्री), शुण्डा (पुंस्त्री), हाला (स्त्री), हारहूर (क्ली), प्रसन्ना (स्त्री), वारुणी (स्त्री), सुरा (स्त्री), माध्वीक (क्ली), मदना (स्त्री), देवसृष्टा (स्त्री), कापिश (क्ली), अब्धिजा (स्त्री)
अभिधानचिन्तामणिपरिशिष्टम्
Sanskrit
--source--
गौतमी कौशिकी कृष्णा तामसी बाभ्रवी जया ४७
कालरात्रिर्महामाया भ्रामरी यादवी वरा
बर्हिध्वजा शूलधरा परमब्रह्मचारिणी ४८
अमोघा विन्ध्यनिलया षष्ठी कान्तारवासिनी
जाङ्गुली बदरीवासा वरदा कृष्णपिङ्गला ४९
p{0003}
दृषद्वतीन्द्रभगिनी प्रगल्भा रेवती तथा
महाविद्या सिनीवाली रक्तदन्त्येकपाटला ५०
एकपर्णा बहुभुजा नन्दपुत्री महाजया
भद्रकाली महाकाली योगिनी गणनायिका ५१
हासा भीमा प्रकूष्माण्डी गदिनी वारुणी हिमा
अनन्ता विजया क्षेमा मानस्तोका कुहावती ५२
चारणा पितृगणा स्कन्दमाता घनाञ्जनी
गान्धर्वी कर्वरी गार्गी सावित्री ब्रह्मचारिणी ५३
कोटिश्रीर्सन्दरावासा केशी मलयवासिनी
कालायनी विशालाक्षी किराती गोकुलोद्भवा ५४
एकानसी नारायणी शैला शाकंभरीश्वरी
प्रकीर्णकेशी कुण्डा नीलवस्त्रोग्रचारिणी ५५
अष्टादशभुजा पौत्री शिवदूती यमस्वसा
सुनन्दा विकचा लम्बा जयन्ती नकुलाकुला ५६
विलङ्का नन्दिनी नन्दा नन्दयन्ती निरञ्जना
कालंजरी शतमुखी विकराली करालिका ५७
विरजाः पुरला जीरी बहुपुत्री कुलेश्वरी
कैटभी कालदमनी दर्दुरा कुलदेवता ५८
रौद्री कुन्द्रा महारौद्री कालंगमा महानिशा
बलदेवस्वसा पुत्री हीरी क्षेमंकरी प्रभा ५९
मारी हैमवती चापि गोला शिखरवासिनी
-wordlist-
गौतमी (स्त्री), कौशिकी (स्त्री), कृष्णा (स्त्री), तामसी (स्त्री), बाभ्रवी (स्त्री), जया (स्त्री), कालरात्रि (स्त्री), महामाया (स्त्री), भ्रामरी (स्त्री), यादवी (स्त्री), वरा (स्त्री), बर्हिध्वजा (स्त्री), शूलधरा (स्त्री), परमब्रह्मचारिणी (स्त्री), अमोघा (स्त्री), विन्ध्यनिलया (स्त्री), षष्ठी (स्त्री), कान्तारवासिनी (स्त्री), जाङ्गुली (स्त्री), बदरीवासा (स्त्री), वरदा (स्त्री), कृष्णपिङ्गला (स्त्री), दृषद्वती (स्त्री), इन्द्रभगिनी (स्त्री), प्रगल्भा (स्त्री), रेवती (स्त्री), महाविद्या (स्त्री), सिनीवाली (स्त्री), रक्तदन्ती (स्त्री), एकपाटला (स्त्री), एकपर्णा (स्त्री), बजुभुजा (स्त्री), नन्दपुत्री (स्त्री), महाजया (स्त्री), भद्रकाली (स्त्री), महाकाली (स्त्री), योगिनी (स्त्री), गणनायिका (स्त्री), हासा (स्त्री), भीमा (स्त्री), प्रकूष्माण्डी (स्त्री), गदिनी (स्त्री), वारुणी (स्त्री), हिमा (स्त्री), अनन्ता (स्त्री), विजया (स्त्री), क्षेमा (स्त्री), मानस्तोका (स्त्री), कुहावती (स्त्री), चारणा (स्त्री), पितृगणा (स्त्री), स्कन्दमाता (स्त्री), घनाञ्जनी (स्त्री), गान्धर्वी (स्त्री), कर्बुरा (स्त्री), गार्गी (स्त्री), सावित्री (स्त्री), ब्रह्मचारिणी (स्त्री), कोटिश्री (स्त्री), मन्दरावासा (स्त्री), केशी (स्त्री), मलयवासिनी (स्त्री), कालायनी (स्त्री), विशालाक्षी (स्त्री), किराती (स्त्री), गोकुलोद्भवा (स्त्री), एकानसी (स्त्री), नारायणी (स्त्री), शैला (स्त्री), शाकम्भरी (स्त्री), ईश्वरी (स्त्री), प्रकीर्णकेशी (स्त्री), कुण्डा (स्त्री), नीलवस्त्रा (स्त्री), उग्रचारिणी (स्त्री), अष्टादशभुजा (स्त्री), पौत्री (स्त्री), शिवदूती (स्त्री), यमस्वसा (स्त्री), सुनन्दा (स्त्री), विकचा (स्त्री), लम्बा (स्त्री), जयन्ती (स्त्री), नकुला (स्त्री), कुला (स्त्री), विलङ्का (स्त्री), नन्दिनी (स्त्री), नन्दा (स्त्री), नन्दयन्ती (स्त्री), निरञ्जना (स्त्री), कालञ्जरी (स्त्री), शतमुखी (स्त्री), विकराला (स्त्री), करालिका (स्त्री), विरजस् (स्त्री), पुरला (स्त्री), जारी (स्त्री), बहुपुत्री (स्त्री), कुलेश्वरी (स्त्री), कैटभी (स्त्री), कालदमनी (स्त्री), दर्दुरा (स्त्री), कुलदेवता (स्त्री), रौद्री (स्त्री), कुन्द्रा (स्त्री), महारौद्री (स्त्री), कालङ्गमा (स्त्री), महानिशा (स्त्री), बलदेवस्वसृ (स्त्री), पुत्री (स्त्री), हीरी (स्त्री), क्षेमङ्करी (स्त्री), प्रभा (स्त्री), मारी (स्त्री), हैमवती (स्त्री), गोला (स्त्री), शिखरवासिनी (स्त्री)
अभिधानरत्नमाला
Sanskrit
वारुणी
वारुणी, प्रतीची
स्याद्वारुणी प्रतीची कौवेरी चोत्तरोदीची १०१
verse 1.1.1.101
page 0013
मध्वासव
मध्वासव, शीधु, सुरा, प्रसन्ना, परिस्रुता, मदिरा, मदिष्ठा, कादम्बरी, स्वादुरसा, शुण्डा, गन्धोत्तमा, माधवक, हाला, कल्य, कश्य, मद्य, मैरेय, कापिशायन, माध्वीक, आसव, परिस्रुत्, वारुणी, मधु
मध्वासवः शीधु सुरा प्रसन्ना,
परिस्रुता स्यान्मदिरा मदिष्ठा
कादम्बरी स्वादुरसा शुण्डा,
गन्धोत्तमा माधवकश्च हाला ३२९
कल्यं कश्यं तथा मद्यं मैरेयं कापिशायनम्
माध्वीकमासवः प्रोक्तः परिस्रुद्वारुणी मधु ३३०
verse 2.1.1.329
page 0039
नाममाला
Sanskrit
मदिरा, मद्य, ऐरेय, शीधु, कादम्बरी, इरा, प्रसन्ना, वारुणी, हाला, मधुवारा, सुरा
मदिरां मद्यमैरेयं शीधु कादम्बरीमिराम् १२०
प्रसन्नां वारुणीं हालां मधुवारां सुरां विदुः
verse 0.1.1.120
page 0061
Tamil
Tamil
வாருணீ : மேற்கு, கள், மதுபானம்.
Mahabharata
English
*Vāruṇī (wife or daughter(?) of Varuṇa), a goddess (“wine” personif.). § 268 (Varuṇasabhāv.): II, 9, 358 (Varuṇo Vºyā samanvitaḥ).--§ 549 (Pāṇḍavapraveśap.): IV, 9, 259 (Sudeshṇā asked Draupadī if she was V.).--§ 564 (Mātalīyop.): V, 102, 3613 (arose at the churning of the ocean). Cf. Surā.
पुराणम्
English
सुरादेवी / SURĀDEVĪ (vāruṇī). A daughter of varuṇa born of devī, his brother's wife. She was the apple of the eye to the devas. She is the presiding Devatā over liquor She lives in the court of brahmā worshipping him. (Sabhā Parva, Chapter 11, Verse 42
Ādi Parva, Chapter 18, Verse 35 and Chapter 66, Verse 52).
वारुणी / VĀRUṆĪ II. The daughter of varuṇa. When the devas and the Asuras churned the sea of Milk, four damsels were caused to arise by varuṇa and holy pot of Ambrosia, by soma. The four damsels were sulakṣmī, vāruṇī, kāmodā and Śreṣṭhā, of whom vāruṇī was married by devas. (padma purāṇa, bhūmi Khaṇḍa, Chapter 119).
शब्दकल्पद्रुमः
Sanskrit
वारुणी,
स्त्री,
(वरुणस्येयम् “तस्येदम् ।” ।३ १२० इत्यण् ङीप् ।) सुरा (यथा, मनौ ११ १४७ ।“अज्ञानाद्वारुणीं पीत्वा संस्कारेणैव शुध्यति ।मतिपूर्व्वमनिर्द्देश्यं प्राणान्तिकमिति स्थितिः
”मदिराधिष्ठात्री देवी यथा, विष्णुपुराणे ।९ ९३ ।“किमेतदिति सिद्धानां दिवि चिन्तयतां ततः ।बभूव वारुणी देवी मदाघूर्णितलोचना
”“वारुणी मदिराधिष्ठात्री देवी ।” इति तट्टी-कायां श्रीधरस्वामी
वरुणपत्नी वारुणी-वल्लभशब्ददर्शनात्
यथा, महाभारते ।९ ।“यस्यामास्ते वरुणो वारुण्या समन्वितः ।दिव्यरत्नाम्बरधरो दिव्याभरणभूषितः
”नदीविशेषः यथा, गो० रामायणे ७० १२ ।“पूर्व्वेण वारुणीं तीर्त्वा कुरुक्षेत्रे सरस्वतीम् ।सरांसि प्रफुल्लानि नदीश्च विमलोदकाः
”)पश्चिमदिक् इत्यमरः ५१
(यथा, नैषधचरिते ६० ।“वद विधुन्तुदमालि मदीरितै-स्त्यजसि किं द्विजराजधिया विधुम् ।किमु दिवं पुनरेति यदीदृशःपतित एष निषेव्य हि वारुणीम्
”विद्याविशेषः यथा, तैत्तिरीयोपनिषदि ।३ तृतीयवल्ल्याम् षष्ठानुवाके “आनन्देनजातानि जीवन्ति आनन्दं प्रयत्यभिसंविश-न्तीति सैषा भार्गवी वारुणी विद्या
”अश्वानां छायाविशेषः यथा, अश्ववैद्यके ।३ १७३ ।“शुद्धस्फटिकसङ्काशा सुस्निग्धा चैव वारुणी
”)शतभिषानक्षत्रम् इति हेमचन्द्रः
गण्ड-दूर्व्वा इति मेदिनी णे, ६८
इन्द्रवारुणी ।दूर्व्वा इति राजनिर्घण्टः
शतभिषानक्षत्र-युक्तचैत्रकृष्णत्रयोदशी यथा, स्कन्दपुराणे ।“वारुणेन समायुक्ता मधौ कृष्णा त्रयोदशी ।गङ्गायां यदि लभ्येत सूर्य्यग्रहशतैः समा
”वारुणं शतभिषा ।“शनिवारसमायुक्ता सा महावारुणी स्मृता ।गङ्गायां यदि लभ्येत कोटिसूर्य्यग्रहैः समा
शुभयोगसमायुक्ता शनौ शतभिषा यदि ।महामहेति विख्याता त्रिकोटिकुलमुद्धरेत्
अत्र संज्ञाविधेः सार्थकत्वाय निमित्तत्वेन मास-पक्षतिथ्युल्लेखानन्तरं महावारुणीमहामहा-वारुण्यावुल्लेखनीये तेन चैत्रे मासि कृष्ण-पक्षे त्रयोदश्यां तिथौ महावारुण्यां महा-महावारुण्यां यथायथं प्रयोज्यम् चात्र ।“स्नानं कुर्व्वन्ति या नार्य्यश्चन्द्रे शतभिषां गते ।सप्तजन्म भवेयुस्ता दुर्भगा विधवा ध्रुवम्
”इति
“त्रयोदश्यां तृतीयायां दशम्याञ्च विशेषतः ।शूद्रविट्क्षत्त्रियाः स्नानं नाचरेयुः कथञ्चन
”इति प्रचेतोजावालिवचनाभ्यां स्त्रीणां शूद्रादी-नाञ्च स्नाननिषेध इति वाच्यम् ।“भोगाय क्रियते यत्तु स्नानं यादृच्छिकं नरैः ।तन्निषिद्धं दशम्यादौ नित्यनैमित्तिके तु
”इति हेमाद्रिधृतवचनेन रागप्राप्तस्नान एवनिषेधात् नक्षत्रेऽपि तथा कल्पनात् अत्रत्रयोदश्यां पूर्णायां पूर्व्वाह्णेतरकाले नक्षत्रादि-सत्त्वे परदिने पूर्व्वाह्णे तिथिनक्षत्रलाभेऽपि पूर्व्व-दिन एव स्नानम् रात्रावपि वारुण्यादिषुगङ्गायां स्नानम् ।“दिवा रात्रौ सन्ध्यायां गङ्गायाञ्च प्रसङ्गतः ।स्नात्वाश्वमेधजं पुण्यं गृहेऽप्युद्धृततज्जलैः
”इति ब्रह्माण्डपुराणे सामान्यतः प्रतिप्रसवात् ।इति तिथ्यादितत्त्वम्
*
वरुणप्रेरितवृन्दा-वनस्थकदम्बतरुकोटरनिःसृतबलदेवपीतवारुणी ।यथा, --पराशर उवाच ।“वने विचरतस्तस्य सह गोपैर्महात्मनः ।मानुषच्छद्मरूपस्य शेषस्य धरणीधृतः
निष्पादितोरुकार्य्यस्य कार्य्येणोर्व्वीविचारिणः ।उपभोगार्थमत्यर्थं वरुणः प्राह वारुणीम्
अभीष्टा सर्व्वदा यस्य मदिरे त्वं महौजसः ।अनन्तस्योपभोगाय तस्य गच्छ मुदे शुभे
इत्युक्ता वारुणी तेन सन्निधानमथाकरोत् ।वृन्दावनवनोत्पन्नकदम्बतरुकोटरे
विचरन् बलदेवोऽपि मदिरागन्धमुत्तमम् ।आघ्राय मदिरातर्षमवापाथ पुरातनम्
ततः कदम्बात् सहसा मद्यधारां लाङ्गली ।पतन्तीं वीक्ष्य मैत्रेय प्रययौ परमां मुदम्
पपौ गोपगोपीभिः समवेतो मुदान्वितः ।उपगीयमानो ललितं गीतवाद्यविशारदैः
”इति विष्णुपुराणे अंशे २५ अध्यायः
वाचस्पत्यम्
Sanskrit
वारुणी स्त्री वरुणो देवतास्य वरुणस्येदं वा अच् ङीप् ।१ पश्चिमलिशि मदिरायाम् हेमच० शतभिघातारायां ।४ गण्डदूर्वायाम् दूर्वायां मेदि० इन्द्रवारुण्यां राजनि०७ वरुणस्त्रियां शतभिषानक्षत्रयुक्तचैत्रकृष्णत्रयोदस्यां चस्कन्दपुराणे “वारुणेन समायुक्ता मधौ कृष्णा त्रयो-दशी गङ्गायां यदि लभ्येत सूर्य्यग्रहशतैः समा”वारुणं शतभिषा “शनिवारसमायुक्ता सा महा-वारुणी स्मृता गङ्गायां यदि लभ्येत कोटिसूर्य्यग्रहैः समा शुभयोगसमायुक्ता शनौ शतभिषायदि महामहेति विख्याता त्रिकोटिकुलमुद्धरेत्”“अत्र संज्ञाविधेः सार्थकत्वाय निमित्तत्वेन मासपक्ष-तिथ्युल्लेखानन्तरं महावारुणीमहामहावारुण्यावुल्लेख-नीये श्राद्धे पार्वणादिसंज्ञाल्लेखवत् पौर्णमास्यमावा-स्ययोः पक्षाल्लेखवच्च ति० त० अत्र वारघटितत्वात् सावन-दिनमेव ग्राह्यम् “सृतकानां परिच्छेदो दिनमासाब्दपा-स्तथा मध्यमग्रहभुक्तिश्च सावनेन प्रकीर्त्तितः” सृ० सि०उक्तेः कोर्मपाद्मयोः “द्वौ तिथ्यन्तावेकवारे यत्रस्मात् दिनक्षयः” बशिष्ठः “एकस्मिन् सावनेत्वह्नि तिथीनां त्रितवं यदा तदा दिनलयः प्रोक्तस्तत्रसाहस्रिकं फलम्” इत्येतयोर्वचनयोरेकवाक्यतयापितथावगम्यते रखापूर्वपरयोरित्यादिकन्तु ज्योतिः-शास्त्रोक्तं कालहोरादिज्ञानार्थमिति अत्र “संक्रा-न्तिषु व्यतीपाते ग्रहणं चन्द्रसूर्य्ययोः पुष्ये स्नात्वाच गङ्गायां कुलकोटीः समुद्धरेत्” इति ब्रह्मा-ण्डपुराणात् ग्रहणमात्र त्रिकोटिकुलोद्धरणवि-धानात् ततोऽधिकेषु वारुण्यादिषूत्तरोत्तरगुरुषु महा-महावारुण्यदिषु यत् त्रिकोटिकुलोद्धरणमुक्तं तदुद्ध-रणगततारतम्येनाविरुद्धम् “यं यं क्रतुमधीते चतस्य तस्याप्नुयात् फलम्” याज्ञवल्क्योक्ताध्ययनात्यथा तत्तद्याराकरणेऽधिकफलम् अतएव शिष्टाना-मादरोऽपि तथेति नचात्र “स्नानं कुर्वन्ति याना-र्य्यश्चन्द्रे शतभिषां गते सप्तजन्म भवेयुस्ता दुर्भगा-विधवाध्रुवम् “त्रयोदश्यां तृतीयायां दशम्याञ्चविशेषतः शद्रविट्क्षत्रियाः स्नानं नाचरेयुः कथ-ञ्चन” इति प्रचेतोजावालिवचनाभ्यां स्त्रीणां शूद्रा-दीनाञ्च स्नाननिषेध इति वाच्यम् “भोगाय क्रियते यत्तुस्नानं यादृच्छिकं नरैः तन्निषिद्धं दशम्यादौ नित्यनैमित्तिके तु” इति हेमाद्रिधृतवचनेन रागप्राप्त-स्नान एव निषेधात् नक्षत्रेऽपि तथाकल्पनात् ।अत्र त्रयोदश्यां पूर्णायां पूवाह्णातरकाले नक्षत्रादिसत्त्वेपरदिने पूर्वाह्ण तिथिनक्षत्रलाभेऽपि पूर्वदिन एवस्नानम् तथा कालमाधवीये नारदीयम आदि-त्योदयवलाया आरभ्य षष्टिनाडिकाः तिथिस्तु सा हिशुद्धा स्यात् सार्वतिथ्या ह्ययं विधिः” अत्र पूर्वतिथेःशुद्धत्वाभिधानातु ततपरतिथेरशुद्धत्वाभिधानं प्रतीयते ।रात्रावपि वारुण्यादिषु गङ्गायां स्नानम् “दिवा रात्रौच सन्ध्यायां गङ्गायाञ्च प्रसङ्गतः स्नात्वाऽश्वमेधजंपुण्यं गृहेऽप्युद्धृततज्जलैः” गृहस्थरत्नाकरे देवलः“महानिशा तु विज्ञेया मध्यमं प्रहरद्वयम् तस्यांस्नानं कर्त्तव्यं काम्यनैमित्तिकादृते” अत्र सहा-निशायामपि काम्यनैमित्तिकं स्नानं प्रतीयते” ति० त० रघु०
Burnouf
French
वारुणी वारुणी
f.
l'ouest [région de Varuṇa].
Le
25ᵉ astérisme lunaire.
Esp. de दूर्बा।
Sorte
d'eau-de-vie de palme.
वारुणीवल्लभ
m.
Varuṇa.