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रेवती (revatI)

 
शब्दसागरः
English
रेवती
f.
(-ती)
1. The wife of BALARĀMA, the half-brother of KRISHṆA.
2.
The last of the Nakshatras or lunar asterisms, containing thirty-
two stars, figured by a tabor
one of the stars is the piscium.
3.
One of the MĀTRIS or energies of the gods.
4. A cow.
E.
रेवत the
name of a king, the father of BALARĀMA'S wife, and ङीष्
aff.
Yates
English
रेवती (ती) 3.
f.
Wife of
Balarāma
Krishna's brother
the last of
the asterisms
energy
a cow.
Spoken Sanskrit
English
रेवती revatI
adj.
f.
wealthy
रेवती revatI
adj.
f.
rich
रेवती revatI
f.
royal jasmine [ Jasminum grandiflorum - Bot. ]
रेवती revatI
f.
Indian heliotrope [ Tiaridium Indicum - Bot. ]
रेवती revatI
f.
particular rAgiNI
रेवती revatI
f.
wealthy ones or the shining one's
रेवती revatI
f.
woman born under the nakSatra revatI
Wilson
English
रेवती
f.
(-ती)
1 The wife of BALARĀMA, the brother of KṚṢṆA.
2 The last of the Nakṣatras or lunar asterisms, containing thirty two
stars, figured by a tabor
one of the stars is ζ piscium.
3 One of the Mātṛs or energies of the gods.
4 A cow.
E.
रेवत the name of a king, the father of BALARĀMA'S wife, and ङीष्
aff.
Apte
English
रेवती [rēvatī], 1
N.
of the 27th constellation which contains thirty-two stars.
N.
of the wife of Balarāma
Śi.*
2. 16.
A cow.
N.
of the Sāman formed from the Rig. verse रेवतीर्नः सधमाद ...
Rv.*
1.3.13
एता रेवत्यः पशुषु प्रोताः Ch.
Up.*
2.18.1.
Comp.
-भवः the planet Saturn. -रमणः
N.
of Balarāma.
Apte 1890
English
रेवती 1 N. of the 27th constellation which contains thirty-two stars.
2 N. of the wife of Balarāma
Śi. 2. 16.
3 A cow.
Comp.
भवः the planet Saturn.
रमणः N. of Balarāma.
Monier Williams Cologne
English
रेव॑ती a (अ॑ती),
f.
See below
रेव॑ती b
f.
of रेव॑त् above
(also
pl.
)
N.
of the fifth Nakṣatra,
RV.
&c.
&c.
a woman born under the Revatī,
Pāṇ.
iv, 3, 34,
Vārtt.
1,
Pat.
(in music) a partic. Rāgiṇī,
Saṃgīt.
N.
of a female demon presiding over a partic. disease or of a Yoginī (sometimes identified with Durgā or with Aditi),
MBh.
Kathās.
Suśr.
&c.
of the wife of Mitra,
BhP.
of a daughter of the personified light (कान्ति) of the Nakṣatra Revatī and mother of Manu Raivata,
MārkP.
of the wife of Bala-rāma (daughter of Kakudmin),
Hariv.
Megh.
Pur.
of a wife of Amṛtodana,
Buddh.
of various other women,
HPariś.
Tiaridium Indicum,
L.
Jasminum Grandiflorum,
L.
pl.
‘the wealthy ones’ or ‘the shining one's’ (applied to cows and the waters),
RV.
VS.
GṛŚrS.
N.
of the verse,
RV.
i, 30, 13 (beginning with रेवती),
VS.
TS.
Br.
&c.
of the Sāman formed from this verse, ĀrṣBr.
ChUp.
ii, 18, 1
2
of the divine mothers,
L.
Apte Hindi
Hindi
रेवती
स्त्री*
- रेवत + ङीष्
सत्ताइंसवां नक्षत्रपुंज जिसमें बत्तीस तारे होते हैं
रेवती
स्त्री*
- -
बलराम की पत्नी का नाम
Shabdartha Kaustubha
Kannada
रेवती
पदविभागः - > स्त्रीलिङ्गः
कन्नडार्थः - > ಬಲರಾಮನ ಪತ್ನಿ /ರೇವತ ರಾಜನ ಮಗಳು
प्रयोगाः - > "रेवतीवदनोच्छिष्टपरिपूतपुटे दृशौ"
उल्लेखाः - > माघ० २-१६
रेवती
पदविभागः - > स्त्रीलिङ्गः
कन्नडार्थः - > ರೇವತೀ ನಕ್ಷತ್ರ /ಇಪ್ಪತೇಳು ನಕ್ಷತ್ರಗಳಲ್ಲಿ ಕೊನೆಯ ನಕ್ಷತ್ರ
रेवती
पदविभागः - > स्त्रीलिङ्गः
कन्नडार्थः - > ಆಕಳು /ಹಸು
विस्तारः - > "रेवती हलिपत्न्यां भे" - त्रिकाण्ड०
रेवती
पदविभागः - > स्त्रीलिङ्गः
कन्नडार्थः - > ದುರ್ಗಾದೇವಿ
रेवती
पदविभागः - > स्त्रीलिङ्गः
कन्नडार्थः - > ಒಂದು ನದಿ
L R Vaidya
English
revatI {% f. %} 1. Name of a constellation, which contains thirty-two stars and is the last in the series beginning with अश्विनी
2. name of the wife of Balarāma, Sis.ii.16.
Edgerton Buddhist Hybrid
English
Revatī, n. of a yakṣiṇī (= Skt. id.? see BR s.v. Revant, 2e): Mmk 〔564.25〕
〔566.1〕. Cf. next (?).
Schmidt Nachtrage zum Sanskrit Worterbuch
German
रेवती die göttlichen Mütter, Hem. Par. VII, 15. [Z.]
Wordnet
Sanskrit
Synonyms:
रेवती
noun
बलरामस्य पत्नी।
"रेवत्याः वर्णनं भागवते वर्तते।"
Synonyms:
रेवती, महारौद्री, आद्या, काली, भेरुण्डा, कालिका
noun
नवदुर्गासु एका या कृष्णवर्णीया अस्ति।
"नवरात्रि-उत्सवे सप्तमे दिने रेवत्याः पूजनं क्रियते।"
Synonyms:
रेवती
noun
सः कालः यस्मिन् चन्द्रः रेवतीनक्षत्रे वर्तते।
"पुरोहितेन एतत् कार्यं रेवत्यां करणीयम् इति कथितम्।"
Synonyms:
रेवती, अन्त्यभम्, पौष्णम्
noun
अश्विन्यादिसप्तविंशतिनक्षत्रान्तर्गतान्तिमनक्षत्रम्।
"रेवती चन्द्रपथे अन्तिमं नक्षत्रम् अस्ति।"
Synonyms:
रेवती
noun
स्त्रीनामविशेषः
"नैकासां स्त्रीणां नाम रेवती अस्ति"
Synonyms:
रेवती
noun
अमृतोदनस्य पत्नी
"रेवत्याः उल्लेखः बौद्धसाहित्ये वर्तते"
Synonyms:
रेवती
noun
कान्तेः कन्या
"रेवत्याः उल्लेखः मार्कण्डेयपुराणे वर्तते"
Synonyms:
रेवती
noun
श्लोकविशेषः
"रेवती ऋग्वेदे वर्तते"
Synonyms:
रेवती
noun
एका राक्षसी
"रेवत्याः उल्लेखः महाभारते वर्तते"
Synonyms:
रेवती
noun
मित्रस्य पत्नी
"रेवत्याः उल्लेखः भागवत्पुराणे वर्तते"
अभिधानचिन्तामणिः
Sanskrit
--source--
रेवती तु पौष्णं दाक्षायण्यः सर्वाः शशिप्रियाः ११५
-wordlist-
रेवती (स्त्री), पौष्ण (क्ली), दाक्षायणी (स्त्री), शशिप्रिया (स्त्री)
अभिधानचिन्तामणिपरिशिष्टम्
Sanskrit
--source--
गौतमी कौशिकी कृष्णा तामसी बाभ्रवी जया ४७
कालरात्रिर्महामाया भ्रामरी यादवी वरा
बर्हिध्वजा शूलधरा परमब्रह्मचारिणी ४८
अमोघा विन्ध्यनिलया षष्ठी कान्तारवासिनी
जाङ्गुली बदरीवासा वरदा कृष्णपिङ्गला ४९
p{0003}
दृषद्वतीन्द्रभगिनी प्रगल्भा रेवती तथा
महाविद्या सिनीवाली रक्तदन्त्येकपाटला ५०
एकपर्णा बहुभुजा नन्दपुत्री महाजया
भद्रकाली महाकाली योगिनी गणनायिका ५१
हासा भीमा प्रकूष्माण्डी गदिनी वारुणी हिमा
अनन्ता विजया क्षेमा मानस्तोका कुहावती ५२
चारणा पितृगणा स्कन्दमाता घनाञ्जनी
गान्धर्वी कर्वरी गार्गी सावित्री ब्रह्मचारिणी ५३
कोटिश्रीर्सन्दरावासा केशी मलयवासिनी
कालायनी विशालाक्षी किराती गोकुलोद्भवा ५४
एकानसी नारायणी शैला शाकंभरीश्वरी
प्रकीर्णकेशी कुण्डा नीलवस्त्रोग्रचारिणी ५५
अष्टादशभुजा पौत्री शिवदूती यमस्वसा
सुनन्दा विकचा लम्बा जयन्ती नकुलाकुला ५६
विलङ्का नन्दिनी नन्दा नन्दयन्ती निरञ्जना
कालंजरी शतमुखी विकराली करालिका ५७
विरजाः पुरला जीरी बहुपुत्री कुलेश्वरी
कैटभी कालदमनी दर्दुरा कुलदेवता ५८
रौद्री कुन्द्रा महारौद्री कालंगमा महानिशा
बलदेवस्वसा पुत्री हीरी क्षेमंकरी प्रभा ५९
मारी हैमवती चापि गोला शिखरवासिनी
-wordlist-
गौतमी (स्त्री), कौशिकी (स्त्री), कृष्णा (स्त्री), तामसी (स्त्री), बाभ्रवी (स्त्री), जया (स्त्री), कालरात्रि (स्त्री), महामाया (स्त्री), भ्रामरी (स्त्री), यादवी (स्त्री), वरा (स्त्री), बर्हिध्वजा (स्त्री), शूलधरा (स्त्री), परमब्रह्मचारिणी (स्त्री), अमोघा (स्त्री), विन्ध्यनिलया (स्त्री), षष्ठी (स्त्री), कान्तारवासिनी (स्त्री), जाङ्गुली (स्त्री), बदरीवासा (स्त्री), वरदा (स्त्री), कृष्णपिङ्गला (स्त्री), दृषद्वती (स्त्री), इन्द्रभगिनी (स्त्री), प्रगल्भा (स्त्री), रेवती (स्त्री), महाविद्या (स्त्री), सिनीवाली (स्त्री), रक्तदन्ती (स्त्री), एकपाटला (स्त्री), एकपर्णा (स्त्री), बजुभुजा (स्त्री), नन्दपुत्री (स्त्री), महाजया (स्त्री), भद्रकाली (स्त्री), महाकाली (स्त्री), योगिनी (स्त्री), गणनायिका (स्त्री), हासा (स्त्री), भीमा (स्त्री), प्रकूष्माण्डी (स्त्री), गदिनी (स्त्री), वारुणी (स्त्री), हिमा (स्त्री), अनन्ता (स्त्री), विजया (स्त्री), क्षेमा (स्त्री), मानस्तोका (स्त्री), कुहावती (स्त्री), चारणा (स्त्री), पितृगणा (स्त्री), स्कन्दमाता (स्त्री), घनाञ्जनी (स्त्री), गान्धर्वी (स्त्री), कर्बुरा (स्त्री), गार्गी (स्त्री), सावित्री (स्त्री), ब्रह्मचारिणी (स्त्री), कोटिश्री (स्त्री), मन्दरावासा (स्त्री), केशी (स्त्री), मलयवासिनी (स्त्री), कालायनी (स्त्री), विशालाक्षी (स्त्री), किराती (स्त्री), गोकुलोद्भवा (स्त्री), एकानसी (स्त्री), नारायणी (स्त्री), शैला (स्त्री), शाकम्भरी (स्त्री), ईश्वरी (स्त्री), प्रकीर्णकेशी (स्त्री), कुण्डा (स्त्री), नीलवस्त्रा (स्त्री), उग्रचारिणी (स्त्री), अष्टादशभुजा (स्त्री), पौत्री (स्त्री), शिवदूती (स्त्री), यमस्वसा (स्त्री), सुनन्दा (स्त्री), विकचा (स्त्री), लम्बा (स्त्री), जयन्ती (स्त्री), नकुला (स्त्री), कुला (स्त्री), विलङ्का (स्त्री), नन्दिनी (स्त्री), नन्दा (स्त्री), नन्दयन्ती (स्त्री), निरञ्जना (स्त्री), कालञ्जरी (स्त्री), शतमुखी (स्त्री), विकराला (स्त्री), करालिका (स्त्री), विरजस् (स्त्री), पुरला (स्त्री), जारी (स्त्री), बहुपुत्री (स्त्री), कुलेश्वरी (स्त्री), कैटभी (स्त्री), कालदमनी (स्त्री), दर्दुरा (स्त्री), कुलदेवता (स्त्री), रौद्री (स्त्री), कुन्द्रा (स्त्री), महारौद्री (स्त्री), कालङ्गमा (स्त्री), महानिशा (स्त्री), बलदेवस्वसृ (स्त्री), पुत्री (स्त्री), हीरी (स्त्री), क्षेमङ्करी (स्त्री), प्रभा (स्त्री), मारी (स्त्री), हैमवती (स्त्री), गोला (स्त्री), शिखरवासिनी (स्त्री)
वैजयन्तीकोषः
Sanskrit
Word: रेवती
Root: रेवती
Gender: स्त्री
Number: all
अर्थः
Meaning(s):
Tiaridium indicum
Tamil Nāgandi
Shloka(s):
3|3|109|2 रेतव्यां रामदूती स्याद्वारुणी नागदन्त्यपि॥ (भूमिकाण्डः/वनाध्यायः)
Synonym(s):
3|3|109|2 रेवती (रेवती) (स्त्री) Tiaridium indicum
Tamil Nāgandi
3|3|109|2 रामदूती (रामदूती) (स्त्री) Tiaridium indicum
Tamil Nāgandi
3|3|109|2 वारुणी (वारुणी) (स्त्री) Tiaridium indicum
Tamil Nāgandi
3|3|109|2 नागदन्ती (नागदन्ती) (स्त्री) Tiaridium indicum
Tamil Nāgandi
Related word(s):
Tamil
Tamil
ரேவதீ : ஒரு நக்ஷத்திரத்தின் பெயர், பலராமனின் மனைவி.
Mahabharata
English
Revatī^1, wife of Balarāma. § 252 (Subhadrāharaṇap.): I, 219, 7912 (Haladharaḥ…Rºsahitaḥ).
Revatī^2, name of a demon of disease. § 502 (Manushyagrahak.): III, 230, 14482 (= Aditi, from R. originates the graha Raivata).
Revatī^3, name of a nakshatra (v. Su. Si.). § 562 (Bhagavadyānap.): V, 83, 2926 (ºyāṃ).--§ 575b (Śākadvīpa): VI, 11, 419 (placed over the mountain Raivataka).--§ 746 (Ānuśāsanik.): XIII, 64, 3284 (result of making gifts under the constellation of R.).--§ 749 (do.): XIII, 89, 4268 (result of performing śrāddhas under the constellation of R.).--§ 759 (do.)
XIII, 110, 5391 (description of the cāndravrata).
पुराणम्
English
रेवती / REVATĪ I. Wife of balabhadrarāma. revata the son of ānartta and the grandson of King śaryāti was ruling over the island kuśasthalī. Hundred sons beginning with Kukudmi, were born to him. As the youngest of all a daughter named revatī was born. At the instruction of brahmā the beautful revatī was given in marriage to balabhadrarāma. (bhāgavata, skandha 10
devī bhāgavata, skandha 7).
रेवती / REVATĪ II. In mahābhārata, Vana Parva, Chapter 230, Stanza 29, the name ‘Revatī’ is used as a synonym of aditi devī.
रेवती / REVATĪ III. One of the twentyseven stars. The following statements occur in the mahābhārata about the importance of this star.(i) śrī kṛṣṇa started on his journey at the auspicious moment of maitra on the star revatī in the month of Kārttika. (M.B. Udyoga Parva. Chapter 83, Stanza 6).(ii) If a cow is given as alms on the day of this star that cow will go to heaven and make preparations for the comforts and convenience of the giver. (M.B. anuśāsana parva, Chapter 64, Stanza 33).(iii) He who gives offerings to the manes on revatī day would become wealthy. (M.B. anuśāsana parva, Chapter 89, Stanza 14).
रेवती / REVATĪ IV. The mother of raivata, the lord of the fifth manvantara (age of a manu). There is a story in the mārkaṇḍeya purāṇa about the birth of revatī.
A son was born to the hermit Ṛtavāk on revatī day.
By and by he became wicked. Having learned from the hermit garga that his son became wicked because he was born under the star revatī, Ṛtavāk cursed the star revatī and kicked it down from its place. The spot on which the star fell became a lake. After a time a beautiful damsel was born from the lake. The hermit pramuca took the girl home and brought her up. She was called revatī. When she came of age, she was given in marriage to durgama, the son of king vikramaśīla. At the request of revatī her marriage was conducted at an auspicious moment on the day of the star revatī. The hermit blessed the couple “Let a son, who would become the Lord of the manvantara, be born to you.” As a result of this blessing the bright and valiant son raivata was born to them. This raivata was the Lord of the fifth manvantara.
Vedic Reference
English
26. Revatī, ‘wealthy, denotes a large number of stars
(later 32), of which ζ Piscium, close upon the ecliptic where
it was crossed by the equator of about 570 A.D., is given as the
southernmost.
Revatī. See Nakṣatra.
शब्दकल्पद्रुमः
Sanskrit
रेवती,
स्त्री,
(रेवतस्यापत्यं स्त्री रेवत + अण् ।न वृद्धिः ङीष् ।) बलदेवपत्नी नक्षत्रभेदः ।मातृकाभेदः इति मेदिनी
स्त्रीगवी इत्य-जयपालः
दुर्गा यथा, “रेवा तु नर्म्मदा देवी नदी वा रवती मता ।अतिखण्डनबन्धा वा लोके देवी प्रकीर्त्तिता
”इति देवीपुराणे ४५ अध्यायः
*
रेवतीनक्षत्रन्तु अश्विन्यादिसप्तविंशतिनक्षत्रान्त-र्गतशेषनक्षत्रम् तस्य रूपं मत्स्याकृति द्वात्रिं-शत्तारात्मकम् तस्याधिष्ठातृदेवता पूषाख्यःसूर्य्यः यथा, --“दन्तसंख्यभवने झसाकृता-वन्तभे लसदनन्तमध्यगे ।कोमलाङ्गि मिथुनोदयात् प्रियेकालखानलकलाः प्रियेऽचलन्
”इति कालिदासकृतरात्रिलग्ननिरूपणम्
*
तत्र जातफलं यथा, --“चारुशीलविभवो जितेन्द्रियःसत्कुलः स्वभवनैकमानसः ।मानवो ननु भवेन्महीपतीरेवती भवति यस्य जन्मभम्
”इति कोष्ठीप्रदीपः
*
बालग्रहविशेषः तज्जुष्टस्य चिकित्सा यथा, --“अश्वगन्धाजशृङ्गी शारिवाथ पुनर्नवा ।सहा विदारी ह्येतासां क्वाथेन परिषेचनम्
”अजशृङ्गी मेढाशृङ्गी सहा सेवतीपुष्प-जातिः ।“तैलमभ्यञ्जने कार्य्यं कुष्ठे सर्जरसे तथा ।पलङ्कषायां नलदे तथा गौरकदम्बके
”सर्जरसः रालः पलङ्कषा गुग्गुलुः नलदंलामज्जकमुशीरवत् पीतच्छवि गौरकदम्बकोहारिद्रकः हरदुया कदम्ब इति लोके ।“धवाश्वकर्णककुभशल्लकीतिन्दुकेषु ।काकोल्यादौ गणे चापि सिद्धं सर्पिः पिबे-च्छिशुः
”अश्वकर्णः सांखु इति लोके ।“कुलत्थाः शङ्खचूर्णञ्च प्रदेहः साखगन्धिकः ।गृध्रोलूकपुरीषाणि यवान् यवफलो घृतम् ।सन्ध्ययोरुभयोः कार्य्यमेतदुद्धूपनं शिशोः
”यवफलो वंशाङ्कुरः ।“युक्ताः सुमनसो लाजाः पयः शाल्योदनं दधि ।वलिर्निवेद्यो गोतीर्थे रेवत्यै प्रयतात्मना
”गोतीर्थे गोष्ठे ।“स्नानं धात्रीकुमाराभ्यां सङ्गमे कारयेद्भिषक्
नानाशस्त्रधरा देवी चित्रमाल्यानुलेपना ।चलत्कुण्डलिनी श्यामा रेवती ते प्रसीदतु
उपासते यां सततं देव्यो विविधभूषणाः ।लम्बा कराला विनता तथैव बहुपुत्त्रिका ।रेवती शुष्कनासा तुभ्यं देवी प्रसीदतु
”इति भावप्रकाशः
*
बलदेवपत्न्या विवरणं यथा, --“रेवस्य रैवतः पुत्त्रः ककुद्मान्नाम धार्म्मिकः ।श्रेष्ठः पुत्त्रशतस्यासीत्तस्यां पुर्य्यां नृपोऽभवत्
कन्यासहितः प्रायाद्रैवतो ब्रह्मणोऽन्तिकम्
जरा क्षुत् पिपासा वा मृत्युस्तत्र कर्हि-चित् ।ऋतुचक्रञ्च भवति ब्रह्मलोके द्बिजोत्तमाः
रैवतस्य गतस्याथ सा पुरी राक्षसैर्हृता ।तस्य पुत्त्रशतं यच्च त्यक्त्वा तामगमद्दिशः
तस्य वंशे तु ये तत्र स्वर्याता इति विश्रुताः ।क्षत्त्रिया ह्यभवन् विप्रा दिक्षु सर्व्वासुधार्म्मिकाः
गते बहुयुगे काले आजगामाथ रैवतः ।मुहूर्त्तमेकं मत्वासौ ददर्श यादवैर्वृताम्
कृतां द्वारवतीं नाम बहुद्वारां मनोरमाम् ।भोजवृष्ण्यन्धकैर्गुप्तां वासुदेवपुरोगमैः
गत्वा तु रैवतः सम्यग्बलभद्राय रेवतीम् ।प्रादाद्गुरुतरां तान्तु बलदेवो हलेन वै ।समानां लघुतां नीत्वा उवाह प्रहर्षतः
दत्त्वा जगाम शिखरं मेरोस्तपसि रैवतः ।रेमे रामोऽपि धर्म्मात्मा रेवत्या सहितः सुखी
”इति वह्निपुराणम्
*
(ब्रह्मणो वाक्येनैव इयं रेवतेन बलदेवायप्रदत्ता एतद्बिवरणन्तु देवीभागवते स्कन्धे८ अध्याये द्रष्टव्यम्
) रैवतमनुमाता तद्-विवरणं यथा, --मार्कण्डेय उवाच ।“पञ्चमोऽपि मनुर्ब्रह्मन् रैवतो नाम विश्रुतः ।तस्योत्पत्तिं विस्तरञ्च शृणुष्व कथयामि ते
ऋषिरासीन्महाभाग ऋतवागिति विश्रुतः ।तस्यापुत्त्रस्य पुत्त्रोऽभूत् रेवत्यन्ते महात्मनः
तस्य विधिवच्चक्रे जातकर्म्मादिकाः क्रियाः ।तथोपनयनादींश्च चाशीलोऽभवन्मुने
यतः प्रभृति जातोऽसौ ततः प्रभृति सोऽप्यृषिः ।दीर्घरोगपरामर्शमवाप मुनिपुङ्गवः
माता चास्य परामार्त्तिं कुष्ठरोगादिपीडिता ।जगाम पिता चास्य चिन्तयामास दुःखितः
किमेतदिति सोऽप्यस्य पुत्त्रोऽत्यन्तसुदुर्म्मतिः ।जग्राह भार्य्यामन्यस्य मुनिपुत्त्रस्य मन्दधीः
ततो विषण्णो मनसा ऋतवागिदमुक्तवान् ।अपुत्त्रता मनुष्याणां श्रेयसे कुपुत्त्रता
कुपुत्त्रो हृदयायासं सर्व्वदा कुरुते पितुः ।मातुश्च स्वर्गसंस्थांश्च स्वपितॄन् पातयत्यधः
सुहृदां नोपकाराय पितॄणां नापि तृप्तये ।पित्रोर्दुःखाय धिक् जन्म तस्य दुष्कृतकर्म्मणः
धन्यास्ते तनया येषां सर्व्वलोकाभिसम्मताः ।परोपकारिणः शान्ताः साधुकर्म्मण्यनुव्रताः
अनिर्वृत्तं तथा मूर्खं परलोकपराङ्मुखम् ।नरकाय सद्गत्यै कुपुत्त्रालम्बि यन्मनः
करोति सुहृदां दैन्यमहितानां तथा मुदम् ।अकाले जरां पित्रोः कुपुत्त्रः कुरुते हि वै
मार्कण्डेय उवाच ।एवं सोऽत्यन्तदुष्टस्य पुत्त्रस्य चरितैर्मुनिः ।दह्यमानमनोवृत्तिर्वृद्धं गर्गमपृच्छत
ऋषिरुवाच ।सुव्रतेन पुरा वेदा गृहीता विधिवन्मया ।समाप्य वेदान् विधिवत् कृतो दारपरिग्रहः
सदारेण यथा कार्य्याः श्रौताः स्मार्त्तास्तथाक्रियाः ।नानुन्यूनाः कृताः काश्चिद्यावदद्य महामुने
गर्भाधानविधानेन काममनुरुध्यता ।पुत्त्रार्थं जनितश्चायं पुन्नाम्नो विभ्यता मुने
सोऽयं किमात्मदोषेण मम दोषेण वा मुने ।अस्मद्दुःखवहो जातो दौःशील्याद्बन्धुशोकदः
गर्ग उवाच ।रेवत्यन्ते मुनिश्रेष्ठ जातोऽयं तनयस्तव ।तेन दुःखाय ते काले दुष्टे यस्मादजायत
तेऽपचारो नैवास्य मातुर्नापि कुलस्य ते ।तस्य दौःशील्यहेतुत्वं रेवत्यन्तमुपागतम्
ऋतवागुवाचयस्मान्ममैकपुत्त्रस्य रेवत्यन्तसमुद्भवम् ।दौःशील्यमेतत् सा तस्मात् पततामाशु रेवती
मार्कण्डेय उवाच ।तेनैव व्याहृते शापे रेवत्यृक्षं पपात ।पश्यतः सर्व्वलोकस्य विस्मयाविष्टचेतसः
रेवत्यृक्षञ्च पतितं कुमुदाद्रौ समन्ततः ।भासयामास सहसा वनकन्दरनिर्झरान्
कुमुदाद्रिश्च तत्पातात् ख्यातो रैवतकोऽभवत् ।अतीवरम्यः सर्व्वस्यां पृथिव्यां पृथिवीधरः
तस्यर्क्षस्य तु या कान्तिर्जाता पङ्कजिनीसरः ।ततो जज्ञे तदा कन्या रूपेणातीव शोभना
रेवतोकान्तिसंभूतां तां दृष्ट्वा प्रमुचो मुनिः ।तस्या नाम चकारेत्थं रेवतीति हि भागुरे
पोषयामास चैवैनां स्वाश्रमाभ्याससम्भवाम् ।प्रमुचः महाभागस्तस्मिन्नेव महाचले
तान्तु यौवनिनीं दृष्ट्वा कन्यकां रूपशालिनीम् ।स मुनिश्चिन्तयामास कोऽस्या भर्त्ता भवेदिति
एवं चिन्तयतः कालो जगाम सुमहात्मनः ।न चाससाद सदृशं वरं तस्या महामुनिः
ततस्तस्या वरं प्रष्टुमग्निं प्रमुचो मुनिः ।विवेश वह्निशालां वै पृष्टस्तं प्राह हव्यभुक्
महाबलो महावीर्य्यः प्रियवाक् धर्म्मवत्सलः ।दुर्द्दमो नाम भविता भर्त्ता ह्यस्या महीपतिः
मार्कण्डेय उवाच ।अनन्तरञ्च मृगयाप्रसङ्गेनागतो मुने ।तस्याश्रमपदं धीमान् दुर्द्दमः नराधिपः
प्रियव्रतान्वयभवो महाबलपराक्रमः ।पुत्त्रो विक्रमशीलस्य कान्दिनीजठरोद्भवः
प्रविश्याश्रमपदं तां तन्वीं जगतीपतिः ।अपश्यमानस्तमृषिं प्रियेत्यामन्त्र्य पृष्टवान्
राजोवाच ।क्व गतो भगवानस्मादाश्रमान्मुनिपुङ्गवः ।तं प्रणन्तुमिहेच्छामि तत्त्वं प्रब्रूहि शोभने
मार्कण्डेय उवाच ।अग्निशालां गतो विप्रस्तच्छ्रुत्वा तस्य भाषि-तम् ।प्रियेत्यामन्त्रणञ्चैव निश्चक्राम त्वरान्वितः
ददर्श महात्मानं राजानं दुर्द्दमं मुनिः ।नरेन्द्रचिह्नसहितं प्रश्रयावनतं पुरः
तस्मिन् दृष्टे ततः शिष्यमुवाच तु गोतमम् ।गोतमानीयतां शीघ्रमर्घोऽस्य जगतां पतेः
एष तावदयं भूपश्चिरकालादुपागतः ।जामाता विशेषेण योग्योऽर्घोऽस्य मतं मम
मार्कण्डेय उवाच ।ततः चिन्तयामास राजा जामातृकारणम् ।विवेद तन्मौनी जगृहेऽर्घञ्च तं नृपः
तमासनगतं विप्र गृहीतार्घं महामुनिः ।प्रसृतं प्राह राजेन्द्रमपि ते कुशलं पुरे
कोषे बलेऽथ मित्रेषु भृत्यामात्येषु चेश्वर ।तथात्मनि महाबाहो यत्र सर्व्वं प्रतिष्ठितम्
पत्नी ते कुशलिनी यत एवात्र तिष्ठति ।पृच्छाम्यस्यास्ततो नाहं कुशलिन्योऽपरास्तव
राजोवाच ।त्वत्प्रसादादकुशलं क्वचिन्मुनिसत्तम ।जातकौतूहलश्चास्मि मम भार्य्यात्र का मुने
ऋषिरुवाच ।रेवती तु महाभागा त्रैलोक्ये सापि सुन्दरी ।तव भार्य्या वरारोहा मानवेन्द्र वेत्सि किम्
राजोवाच ।सुभद्रां शान्ततनयां कावेरीतनयां विभो ।शूरात्मजां सुजाताञ्च कदम्बाञ्च वरूथजाम्
विपाठां नन्दिनीञ्चैव वेद्मि भार्य्या गृहे हि याः ।तिष्ठन्ति मे भगवन् रेवतीं वेद्मि का त्वियम्
ऋषिरुवाच ।प्रियेति साम्पतं येयं त्वयोक्ता वरवर्णिनी ।किं विस्मृतं ते भूपाल श्लाघ्येयं गृहिणी तव
राजोवाच ।सत्यमुक्तं मया किन्तु भावो दुष्टो मे मुने ।नात्र कोपं भवान् कर्त्तुमर्हत्यस्मासु याचितः
ऋषिरुवाच ।सत्यं ब्रवीषि भूपाल भावस्तव दूषितः ।व्याजहार भवानेवं वह्निना नृप नोदितः
मया पृष्टो हुतवहः कोऽस्या भर्त्तेति पार्थिव ।भविता तेन चाप्युक्तो भवानेवाद्य चागतः
तद्गृह्यतां मया दत्ता कन्या तुभ्यं नराधिप ।प्रियेत्यामन्त्रिता चेयं विचारं कुरुषे कथम्
श्रीमार्कण्डेय उवाच ।ततश्च सोऽभवन्मौनी तेनोक्तः पृथिवीपतिः ।ऋषिस्तथोद्यतः कर्त्तुं तस्या वैवाहिकं विधिम्
समुद्यतञ्च पितरं विवाहाय महामुने ।उवाच कन्या सा किञ्चित् प्रश्रयावनतानना
यदि मे प्रीतिमांस्तात प्रसादं कर्त्तुमिच्छसि ।रेवत्यृक्षे विवाहं मे तत् करोतु प्रसादितः
ऋषिरुवाच ।रेवत्यृक्षं वै भद्रे चन्द्रयोगे दिवि स्थितम् ।अन्यानि सन्ति ऋक्षाणि सुभ्रु वैवाहिकानिते
कन्योवाच ।तात तेन विना कालो विकलः प्रतिभाति मे ।विवाहो विकले काले मद्विधायाः कथं भवेत्
ऋषिरुवाच ।ऋतवागिति विख्यातस्तपस्वी रेवतीं प्रति ।चकार कोपं क्रोधेन तेनर्क्षं तन्निपातितम्
मया चास्मै प्रतिज्ञाता भार्य्येति मदिरेक्षणे ।न चेच्छसि विवाहं त्वं संकटं नः समागतम्
कन्योवाच ।ऋतवाक् मुनिस्तात किं मे कस्तप्तवांस्तपः ।न त्वया समता तेन ब्रह्मबन्धोः सुतास्मि किम्
ऋषिरुवाच ।ब्रह्मबन्धोः सुता त्वं बाले नैवातपस्विनः ।सुता त्वं मम यो देवान् कर्त्तुमन्यान् समुत्सहे
कन्योवाच ।तपस्वी यदि मे तातस्तत् किमृक्षमिदं दिवि ।समारोप्य विवाहो मे नात्रर्क्षे क्रियते पितः
ऋषिरुवाच ।एवं भवतु भद्रं ते भद्रे प्रीतिमती भव ।आरोपयामीन्दुमार्गं रेवत्यृक्षं कृते तव
श्रीमार्कण्डेय उवाच ।ततस्तपःप्रभावेन रेवत्यृक्षं महामुनिः ।यथापूर्व्वं तथा चक्रे सोमयोगे द्बिजोत्तमः
विहाहञ्चैव दुहितुर्विधिवन्मन्त्रयोगजम् ।निष्पाद्य प्रीतिमान् भूयो जामातरमथाब्रवीत्
ऋषिरुवाच ।औद्वाहिकं ते भूपाल कथ्यतां किं ददाम्यहम् ।दुर्लभ्यमपि दास्यामि ममाप्रतिहतं तपः
राजोवाचमनोः स्वायम्भुवस्याहमुत्पपन्नः सन्ततौ मुने ।मन्वन्तराधिपं पुत्त्रं त्वत्प्रसादाद्वृणोम्यहम्
मुनिरुवाच ।भविष्यत्येष ते कामो मनुस्तत्तनयो महान् ।सकलां भोक्ष्यते भूमिं धर्म्मविच्च भविष्यति
श्रीमार्कण्डेय उवाच ।तामादाय ततो भूपस्तदैव नगरं ययौ ।तस्याञ्चाजायत सुतो रेवत्यां रैवतो मनुः
समेतः सकलैधर्म्मैर्मानवैरपराजिंतः ।विज्ञाताखिलशास्त्रार्थो वेदविद्यार्थशास्त्रवित्
”इति मार्कण्डेयपुराणे रैवतमन्वन्तरं समाप्तम्
(गौः इति निघण्टुटीकायां देवराजयज्वा ।१ १० १६
)
वाचस्पत्यम्
Sanskrit
रेवती स्त्री रेवतस्यापत्यमण् रेवत्यादीति निर्देशात वृद्धिः ।१ रवतराजकन्यायां बलदेवपत्न्याम् रेव--अतच् गौ०ङीष् आश्वन्यवधितः सप्तविंशतिसंख्याते नक्षत्रे, तत्-संख्यायां, मातृकाभेदे मेदि० स्त्रीगव्याम अजयपा०६ नदीभेदे, दुर्गायाञ्च देवीपु० रेवतीपदघटितायामृचि एतस्यैव रेवतीषु वारवन्तीयम्” श्रुतिः ।९ पञ्चममनुपत्न्याम्
Capeller
German
रेवती
f.
s. folg.