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भ्री (bhrI)

 
शब्दसागरः
English
भ्री r. 9th cl. (भ्रीणाति भ्रिणीते)
1. To fear.
2. To help.
3. To cherish, to
maintain or support.
Capeller Eng
English
भ्री भ्रीणा॑ति hurt.
Yates
English
भ्री (ग, ञ) भ्रीणाति, ते 9.
c. To fear
to hold, to cherish, to support.
Wilson
English
भ्री r. 9th cl. (भ्रीणाति भ्रिणीते)
1 To fear.
2 To hold.
3 To cherish, to maintain or support.
Apte
English
भ्री [bhrī], 9
P.
(भ्रीणाति)
To fear.
To maintain (भरणे).
Apte 1890
English
भ्री {c9c} P. (भ्रीणाति) To fear.
Monier Williams Cologne
English
भ्री
cl.
9.
P.
(Dhātup. xxxi, 34) भ्री णाति or भ्रिणाति (only
pr.
3.
pl.
भ्रीण॑न्ति,
RV.
ii, 28, 7
Gr.
also pf. बिभ्राय
fut. भ्रेता, भ्रेष्यति
aor.
अभ्रैषीत्),
to injure, hurt (Sāy. -√ हिंस्,
Naigh.
‘to be angry’
cf.
भृणीय
Gr.
‘to fear’ or ‘to bear’) :
Caus.
भ्राययति
Gr.
:
Desid.
बिभ्रीषति, ib. :
Intens.
बेभ्रीयते, बेभ्रयीति, बेभ्रेति, ib.
Monier Williams 1872
English
भ्री भ्री, cl. 9. P. भ्रीणाति or भ्रिणाति,
बिभ्राय, भ्रेष्यति, अभ्रसिहित्, भ्रे-
तुम् (?), Ved. to be angry [cf. भृणीय]
to fear
[cf. rt. 1. भी]
to bear, support, nourish [cf. rt.
भृ]
to injure, hurt, (Sāy. = rt. हिंस्, ऋग्-वेद
II. 28, 7.)
Macdonell
English
भ्री BHRĪ, Ⅸ. P. bhriṇā, hurt, injure (RV.¹).
Benfey
English
भ्री भ्री, ii. 9, Par.
1. To
fear.
2. To bear, to nourish
cf.
भृ and भॄ।
Bopp
Latin
भ्री 9. P. (भरणे K. भृत्याम् भीत्याम् V.) sustentare, ti-
mere. (Cf. भृ, भी.)
Kridanta Forms
Sanskrit
भ्री (भ्री॒ भये भरण इत्येके - क्र्यादिः - अनिट्)
ल्युट् = भ्रयणम्
अनीयर् = भ्रयणीयः - भ्रयणीया
ण्वुल् = भ्रायकः - भ्रायिका
तुमुँन् = भ्रेतुम्
तव्य = भ्रेतव्यः - भ्रेतव्या
तृच् = भ्रेता - भ्रेत्री
क्त्वा = भ्रीत्वा
ल्यप् = प्रभ्रीय
क्तवतुँ = भ्रीतवान् - भ्रीतवती
क्त = भ्रीतः - भ्रीता
शतृँ = भ्रीणन् - भ्रीणती
धातुपाठः (Krishnacharya)
Sanskrit
धातुः:
भ्री
मूलधातुः:
धात्वर्थः:
भये (भरण इत्येके)
गणः:
क्र्यादिः
कर्मकत्वं:
अकर्मकः
इट्त्वं:
अनिट्
उपग्रहः:
परस्मैपदी
रूपम्:
भ्रिणाति
अनुबन्धादिविशेषः:
प्वादिः
धातुप्रदीपः
Sanskrit
भ्री भरणे
- भ्रीणाति भ्रीतम् भ्रीतिः 36
Wordnet
Sanskrit
Synonyms:
संविज्, भी, क्लव्, भेष्, भ्री, भ्यस्, भ्रेष्, शङ्क्
verb
मनसि उद्वेगोत्पत्त्यनुकूलः व्यापारः।
"भेषजग्रहणाद् अनन्तरं तस्य प्राणाः संविजन्ते।"
वाचस्पत्यम्
Sanskrit
भ्री भवे अक० भरणे
सक०
क्य्रा० वा प्त्वा०
पर०
अनिट् ।भ्रीणाति भ्रिणाति अभ्रैषीत्
क्षीरतरङ्गिणी
Sanskrit
भ्री भरणे
- भ्रीणाति भ्रीतः 33
धातुवृत्तिः
Sanskrit
भ्री (अर्थः) भये
भरणइत्येके ( भ्रीणाति ) इत्यादि व्रीवत् 34
कृदन्तरूपमाला
Sanskrit
1 {@“भ्री भये”@} 2 प्वादिः, ल्वादिश्च।
‘-- भरणे’ इति मैत्रेयक्षीरस्वामिप्रभृतयः पठन्ति।
भ्रायकः-यिका, भ्रायकः-यिका, बिभ्रीषकः-षिका, बेभ्रीयकः-यिका
भ्रेता-त्री, भ्राययिता-त्री, बिभ्रीषिता-त्री, बेभ्रीयिता-त्री
इत्यादीनि सर्वाण्यपि रूपाणि क्रैयादिकप्लिनातिवत् 3 ज्ञेयानि।
4 भ्रीणम्-णः-णवान्, भ्रीतम्-तः-तवान्, 5 भ्रिणन् 6 -न्ती इति विशेषः।
प्रासङ्गिक्यः
01
=>
(११८९)
02
=>
(९-क्र्यादिः-१५०५। सक। अनि। पर।)
03
=>
(१०८१)
04
=>
[[३। ‘अस्य ल्वादित्वमप्यस्ति इति द्रुमे’ इति धा। का। व्याख्यायाम् (३-९) उपादानात् ‘ल्वादिभ्यः’ (८-२-४४) इति निष्ठानत्वे नकारस्य णत्वे रूपमेवम्। ल्वादित्वाभावे भ्रीतम् इति, अत्र निष्ठानत्वं नेति ज्ञेयम्।]]
05
=>
[[४। शतरि, ‘क्र्यादिभ्यः--’ (३-१-८१) इति श्ना विकरणप्रत्ययः। ‘श्नाऽभ्यस्त- योरातः’ (६-४-११२) इत्याकारलोपे ‘प्वादीनां ह्रस्वः’ (७-३-८०) इति ह्रस्वे णत्वे रूपमेवम्।]]
06
=>
[[B। ‘व्रीताशबृंहितजुषाऽभ्रिणता गजेन प्रक्षेतुमज्ञमनसा समनुद्रुतेन।’ धा। का। ३-९।]]
Capeller
German
भ्री, भ्रीणा॑ति brennen, strafen.
Grassman
German
√bhrī, ursprünglich wol „brennen“ [Sonne in Ku. 〔10, 100〕], daher 1〉 zürnen [Naigh. 〔2, 12〕 krudhyati]
2〉 jemand [A.] strafen.
Stamm bhrīṇā, (bhrīṇ):
-ṇánti {219, 7} énas kṛṇvántam asura 〰.
Burnouf
French
*भ्री भ्री. भ्रीणामि et भ्रिणामि 9
p.
बिभ्राय
etc. Craindre, cf. भी।
Porter
soutenir
cf.
भृ।
S'irriter.