| YouTube Channel

पुथ (putha)

 
शब्दसागरः
English
पुथ r. 4th cl. (पुथ्यति) To hurt or kill. r. 10th cl. (पोथयति-ते)
1. To shine.
2. To speak. (इ) पुथि r. 1st cl. (पुन्थति)
1. To hurt.
2. To suffer pain
or uneasiness. हिंसे दिवा० पर० सक० सेट् वधे० सक० क्लेशे अक० भ्वा० पर० सेट०
इदित् दीप्तौ चु० उभ० सक० सेट्
Wilson
English
पुथ r. 4th cl. (पुथ्यति) To injure, to hurt or kill. r. 10th cl.
(पोथयति)
1 To shine.
2 To speak. (इ) पुथि r. 1st cl. (पुंथति)
1 To hurt.
2 To suffer pain or uneasiness.
धातुपाठः (Krishnacharya)
Sanskrit
धातुः:
पुथ्
मूलधातुः:
पुथ
धात्वर्थः:
भाषायाम्
गणः:
चुरादिः
कर्मकत्वं:
सकर्मकः
इट्त्वं:
सेट्
उपग्रहः:
उभयपदी
रूपम्:
पोथयति-ते
धातुः:
पुथ्
मूलधातुः:
पुथ
धात्वर्थः:
हिंसायाम्
गणः:
दिवादिः
कर्मकत्वं:
सकर्मकः
इट्त्वं:
सेट्
उपग्रहः:
परस्मैपदी
रूपम्:
पुथ्यति
धातुप्रदीपः
Sanskrit
पुथँ पुथ हिंसायाम्
- पुथ्यति पुपोथ 13
शब्दकल्पद्रुमः
Sanskrit
पुथ, कुन्थे इति कविकल्पद्रुमः
(भ्वा०-पर०-सक०-सेट् ।) पञ्चमस्वरी इ, पुन्थ्यते ।अन्तःस्थप्रथमादिरयमित्यन्ये पुन्थति इतिदुर्गादासः
पुथ, त्विषि इति कविकल्पद्रुमः
(चुरा०-पर०-अक०-सेट् ।) क, पोथयति त्विषि दीप्तौ ।इति दुर्गादासः
पुथ, हिंसे इति कविकल्पद्रुमः
(दिवा०-पर०-सक०-सेट् ।) य, पुथ्यति पुपोथ इतिदुर्गादासः
वाचस्पत्यम्
Sanskrit
पुथ हिंसे दि०
पर०
सक०
सेट् पुथ्यति अपोथीत् पुपोथ
पुथ वधे
सक०
क्लेशे अक०
भ्वा०
पर०
सेट् इदित् पुन्थति अपुन्थीत् पुपुन्थ पुन्थ्यते
पुथ दीप्तौ
चु०
उम०
सक०
सेट् पोथयति ते अपूपुथत्--त
क्षीरतरङ्गिणी
Sanskrit
पुथँ पुथ हिंसायाम्
- पुथ्यति, पोथनम् 11
धातुवृत्तिः
Sanskrit
पुथँ पुथ (अर्थः) हिंसायाम्
( पुथ्यति ) इत्यादि कुथ्यतिवत् पुन्थतीति शपि गतम् 12
कृदन्तरूपमाला
Sanskrit
1 {@“पुथ हिंसायाम्”@} 2 ‘पुथ्येत् पुन्थति हिंसार्थे, भाषार्थे पोथयेदिति।।’ 3 इति देवः।
पोथकः-थिका, पोथकः-थिका, पुपुथिषकः-पुपोथिषकः-षिका, पोपुथकः-थिका
इत्यादीनि सर्वाण्यपि रूपाणि दैवादिककुथ्यतिवत् 4 ज्ञेयानि।
पोथ्यम् 5।
प्रासङ्गिक्यः
01
=>
(१०१८)
02
=>
(४-दिवादिः-१११९। सक। सेट्। पर।)
03
=>
(श्लो। १००)
04
=>
(२१८)
05
=>
[[B। ‘तं प्लुष्यद्दृष्टिनृत्यद्रुषमपि गतत्रासमुत्कुथ्यदङ्गम् पोथ्यं प्रोचे स्वरेण स्वजनविगुधितं क्षिप्यता पुष्पमाध्वीम्।।’ धा। का। २। ५६।]]
1 {@“पुथ भाषार्थः”@} 2 आस्वदीयः।
3 ‘पुथ्येत् पुन्थति हिंसार्थे, भाषार्थे पोथयेदिति।।’ 4 इति देवः।
पोथकः-थिका, पुपोथयिषकः-षिका
पोथयिता-त्री, पुपोथयिषिता-त्री
इत्यादीनि सर्वाण्यपि रूपाणि चौरादिकचोदयतिवत् 5 बोध्यानि।
प्रासङ्गिक्यः
01
=>
(१०१९)
02
=>
(१०-चुरादिः-१७७६। सक। सेट्। उभ।)
03
=>
[पृष्ठम्०८७०+ २६]
04
=>
(श्लो। १००)
05
=>
(५४२)