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पद्मगर्भ (padmagarbha)

 
शब्दसागरः
English
पद्मगर्भ
m.
(-र्भः)
1. A name of BRAMHĀ.
2. The sun.
3. An epithet of
Vishṇu.
E.
पद्म a lotus, and गर्भ womb, born from the lotus.
Capeller Eng
English
1 पद्मगर्भ
m.
the interior or calyx of a lotus.
2 पद्मगर्भ
a.
containing lotuses or sprung from a
lotus
m.
N.
of a lake,
E.
of Brahman, Viṣṇu, & Śiva.
Spoken Sanskrit
English
पद्मगर्भ - padmagarbha -
m.
- of the sun
पद्मगर्भ - padmagarbha -
m.
- of a bodhisattva
पद्मगर्भ - padmagarbha -
m.
- name of viSNu
पद्मगर्भ - padmagarbha -
m.
- of a Brahman who was changed into a swan
पद्मगर्भ - padmagarbha -
m.
- of ziva
पद्मगर्भ - padmagarbha -
m.
- name of a buddha
पद्मगर्भ - padmagarbha -
m.
- sprung from a lotus or containing lotuses
पद्मगर्भ - padmagarbha -
m.
- of a lake
पद्मगर्भ - padmagarbha -
m.
- interior or calyx of a lotus
पद्मगर्भ padmagarbha
m.
of the sun
पद्मगर्भ padmagarbha
m.
of a bodhisattva
पद्मगर्भ padmagarbha
m.
name of viSNu
पद्मगर्भ padmagarbha
m.
of a Brahman who was changed into a swan
पद्मगर्भ padmagarbha
m.
of ziva
पद्मगर्भ padmagarbha
m.
name of a buddha
पद्मगर्भ padmagarbha
m.
sprung from a lotus or containing lotuses
पद्मगर्भ padmagarbha
m.
of a lake
पद्मगर्भ padmagarbha
m.
interior or calyx of a lotus
Monier Williams Cologne
English
पद्म—गर्भ
m.
the interior or calyx of a l°, Kāvyād. ii, 41
‘sprung from a or containing lotuses’,
N.
of Brahmā,
RPrāt.
(Introd.)
of Viṣṇu,
Hariv.
of Śiva,
Śivag.
of the sun,
L.
of a lake,
Hit.
of a Buddha,
Lalit.
of a Bodhisattva,
L.
of a Brāhman who was changed into a swan,
Hariv.
Apte Hindi
Hindi
पद्मगर्भः
पुं*
पद्मम्-गर्भः -
ब्रह्मा का विशेषण
पद्मगर्भः
पुं*
पद्मम्-गर्भः -
विष्णु का विशेषण
पद्मगर्भः
पुं*
पद्मम्-गर्भः -
सूर्य का विशेषण
L R Vaidya
English
padma-garBa {% m. %} 1. epithet of Brahman (m.)
2. of Vishṇu
3. the sun.
Edgerton Buddhist Hybrid
English
Padmagarbha,
(1) n. of one (or two ?) former Buddha(s): LV 〔171.21〕
Gv 〔104.18〕
(2) n. of a Bodhisattva: Mvy 〔673〕
Gv 〔2.24〕
Dbh 〔2.5〕.
Lanman
English
padma-garbha, a. containing lotuses
Lotus-filled, name of a lake. [see garbha
2.]
Schmidt Nachtrage zum Sanskrit Worterbuch
German
पद्मगर्भ m. auch: das Innere einer Lotosblüte, 249, 35
Varāh. Bṛh. S. 70, 11.
अभिधानचिन्तामणिपरिशिष्टम्
Sanskrit
--source--
नारायणे तीर्थपादः पुण्यश्लोको वलिंदमः
उरुक्रमोरुगायौ तमोघ्नः श्रवणोऽपि ६३
उदारथिर्लतापर्णः समुद्रः पांसुजालिकः
चतुर्व्यूहो नवव्यूहो नवशक्तिः प्रगण्डजित् ६४
द्वादशमूलः शतको दशावतार एकदृक्
हिरण्यकेशः सोमोऽहिस्त्रिधामा त्रिककुन्त्रिपात् ६५
मानंजरः पराविद्धः पृश्निगर्भोऽपराजितः
हिरण्यनाभः श्रीगर्भो वृषोत्साहः सहस्रजित् ६६
उर्ध्वकर्मा यज्ञधरो धर्मनेमिरसंयुतः
पुरुषो योगनिद्रालुः खण्डास्यः शलकाजितौ ६७
कालकुण्ठो वरारोहः श्रीकरो वायुवाहनः
वर्धमानश्चतुर्दंष्ट्रो नृसिंहवपुरव्ययः ६८
कपिलो भद्रकपिलः सुषेणः समितिंजयः
क्रतुधामा वासुभद्रो बहुरूपो महाक्रमः ६९
विधाताधार एकाङ्गो वृषाक्षः सुवृषोऽक्षजः
रन्तिदेवः सिन्धुवृषो जितमन्युर्वृकोदरः ७०
बहुशृङ्गो रत्नबाहुः पुष्पहासो महातपाः
लोकनाभः सूक्ष्मनाभो धर्मनाभः पराक्रमः ७१
पद्महासो महाहंसः पद्मगर्भः सुरोत्तमः
शतवीरो महामायो ब्रह्मनाभः सरीसृपः ७२
वृन्दाङ्कोऽधोमुखो धन्वी सुधन्वा विश्वभुक्स्थिरः
शतानन्दश्चरुश्चापि यवनारिप्रमर्दनः ७३
यज्ञनेमिर्लोहिताक्ष एकपाद्द्विपदः कपिः
एकशृङ्गो यमकील आसन्दः शिवकीर्तनः ७४
शद्रुर्वंशः श्रीवराहः सदायोगी सुयामुनः
-wordlist-
तीर्थपाद (पुं), पुण्यश्लोक (पुं), बलिन्दम (पुं), उरुक्रम (पुं), उरुगाय (पुं), तमोघ्न (पुं), श्रवण (पुं), उदारथि (पुं), लतापर्ण (पुं), सुभद्र (पुं), पांशुजालिक (पुं), चतुर्व्यूह (पुं), नवव्यूह (पुं), नवशक्ति (पुं), षडङ्गजित् (पुं), द्वादशमूल (पुं), शतक (पुं), दशावतार (पुं), एकदृश् (पुं), हिरण्यकेश (पुं), सोम (पुं), अहि (पुं), त्रिधामन् (पुं), त्रिककुद् (पुं), त्रिपाद् (पुं), मानञ्जर (पुं), पराविद्ध (पुं), पृश्निगर्भ (पुं), अपराजित (पुं), हिरण्यनाभ (पुं), श्रीगर्भ (पुं), वृषोत्साह (पुं), सहस्रजित् (पुं), ऊर्ध्वकर्मन् (पुं), यज्ञधर (पुं), धर्मनेमि (पुं), असंयुत (पुं), पुरुष (पुं), योगनिद्रालु (पुं), खण्डास्य (पुं), शलिक (पुं), अजित (पुं), कालकुण्ठ (पुं), वरारोह (पुं), श्रीकर (पुं), वायुवाहन (पुं), वर्धमान (पुं), चतुर्दंष्ट्र (पुं), नृसिंहवपुस् (पुं), अव्यय (पुं), कपिल (पुं), भद्रकपिल (पुं), सुषेण (पुं), समितिञ्जय (पुं), क्रतुधामन् (पुं), वासुभद्र (पुं), बहुरूप (पुं), महाक्रम (पुं), विधातृ (पुं), धार (पुं), एकाङ्ग (पुं), वृषाक्ष (पुं), सुवृष (पुं), अक्षज (पुं), रन्तिदेव (पुं), सिन्धुवृष (पुं), जितमन्यु (पुं), वृकोदर (पुं), बहुशृङ्ग (पुं), रत्नबाहु (पुं), पुष्पहास (पुं), महातपस् (पुं), लोकनाभ (पुं), सूक्ष्मनाभ (पुं), धर्मनाभ (पुं), पराक्रम (पुं), पद्महास (पुं), महहंस (पुं), पद्मगर्भ (पुं), सुरोत्तम (पुं), शतवीर (पुं), महामाय (पुं), ब्रह्मनाभ (पुं), सरीसृप (पुं), वृन्दाङ्क (पुं), अधोमुख (पुं), धन्विन् (पुं), सुधन्वन् (पुं), विश्वभुज् (पुं), स्थिर (पुं), शतानन्त (पुं), शरु (पुं), यवनारि (पुं), प्रमर्दन (पुं), यज्ञनेमि (पुं), लोहिताक्ष (पुं), एकपाद् (पुं), द्विपद (पुं), कपि (पुं), एकशृङ्ग (पुं), यमकील (पुं), आसन्द (पुं), शिवकीर्तन (पुं), शद्रु (पुं), वंश (पुं), श्रीवराह (पुं), सदायोगिन् (पुं), सुयामुन (पुं)
Mahabharata
English
Padmagarbha^1 = Śiva (1000 names). Do.^2 = Vishṇu (1000 names).
शब्दकल्पद्रुमः
Sanskrit
पद्मगर्भः,
पुं,
(पद्मं गर्भः कुक्षिरिव यस्य विष्णु-नाभिकमलजातत्वात् तथात्वम् ।) ब्रह्मा इतिशब्दरत्नावली
(पद्मस्य हृदयस्थपद्मस्य गर्भआसनत्वेन कल्पितो यस्य उपासकैरितिशेषः ।विष्णुः यथा, महाभारते १३ १४९ ५१ ।“पद्मनाभोऽरविन्दाक्षः पद्मगर्भः शरीरभृत्
”“पद्मस्य हृदयाख्यस्य मध्ये उपास्यत्वात् पद्मगर्भः ।”इति भाष्यम्
शिवः यथा, तत्रैव १३ १७ १३२ ।“पद्मगर्भो महागर्भो ब्रह्मगर्भो जलोद्भवः
”)
वाचस्पत्यम्
Sanskrit
पद्मगर्भ
पु०
पद्मं विष्णुनाभिकमलं गर्म इव उत्पत्तिस्थान-मस्य चतुरानने व्रह्मणि शब्दर० तस्य तथोत्पत्तिर्यथा“परावरेषां भूतानामात्मा यः पुरुषः परः एवासी-दिदं विश्वं कल्पान्तेऽन्यन्न किञ्चन तस्य नाभेः सम-भवत् पद्मकोशो हिरण्मयः तस्मिन्नब्जे महाराज!स्ययम्भूश्चतुराननः” भाग० पद्मस्य हृदयपुण्डरीकस्यगर्भोमध्य उपासनास्थानतयाऽस्य परमेश्वरे “पद्मनाभो-ऽरविन्दाक्षः पद्मगर्भः शरीरभृत्” विष्णुस० त० ।३ कमलमध्ये
Capeller
German
1. पद्मगर्भ
m.
Lotuskelch
N. eines Sees.
2. पद्मगर्भ
m.
der Lotusgeorene (Bein. Brahman's).