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पङ्कज (paGkaja)

 
शब्दसागरः
English
पङ्कज
n.
(-जं) A lotus.
E.
पङ्क mud, born.
Capeller Eng
English
पङ्कज
n.
a kind of lotus (lit. mud-born).
Yates
English
पङ्क-ज (जं) 1.
n.
A lotus.
Wilson
English
पङ्कज
n.
(जं) A lotus.
E.
पङ्क mud, born.
Monier Williams Cologne
English
पङ्क—ज
n.
(ifc. f(आ). ) ‘mud-born’, a species of lotus, Nelumbium Speciosum (whose flower closes in the evening),
MBh.
Kāv.
&c.
(in
Kathās.
once f(आ). )
पङ्क—ज
m.
N.
of Brahmā,
Cat.
(for पङ्कज-ज)
पङ्क—ज
mfn.
lotus-eyed,
Jātakam.
Macdonell
English
पङ्कज paṅka-ja,
n.
flower of the day lotus 🞄(nelumbium speciosum, which closes in the 🞄evening): -nābha,
a.
having a lotus in his 🞄navel (Viṣṇu), -netra,
a.
lotus-eyed, -mālin,
a.
adorned with a wreath of lotuses, 🞄epithet of Viṣṇu
-akṣī,
f.
lotus-eyed 🞄woman
-aṅghri,
a.
whose feet are adorned 🞄with lotuses (viṣṇu).
Benfey
English
पङ्कज पङ्क-ज,
1.
m.
A lotus
flower, Śāk. d. 124.
2.
f.
जी, A name
of Durgā, MBh. 4, 188.
--
Comp.
स-,
adj.
,
f.
जा, abounding in lotus flowers,
Rām. 3, 68, 18.
Apte Hindi
Hindi
पङ्कजम्
नपुं*
पङ्कः-जम् -
कमल
पङ्कजः
पुं*
पङ्कः-जः -
ब्रह्मा का विशेषण
Shabdartha Kaustubha
Kannada
पङ्कज
पदविभागः - > नपुंसकलिङ्गः
कन्नडार्थः - > ಪದ್ಮ/ತಾವರೆ/ಕಮಲ
निष्पत्तिः - > जनी(प्रादुर्भावे) "डः" (३-२-९७)
व्युत्पत्तिः - > पङ्के जायते
प्रयोगाः - > "नवपलाशपलाशवनं पुरः स्फुटपरागपरागतपङ्कजम्"
उल्लेखाः - > माघ० ६-२
विस्तारः - > [ಕಪ್ಪೆ ಮೊದಲಾದುವು ಕೆಸರಿನಲ್ಲಿ ಹುಟ್ಟಿದರೂ "ಕಮಲ" ಎಂಬ ಅರ್ಥದಲ್ಲಿ ಇದು ಯೋಗರೂಢ]
पङ्कज
पदविभागः - > नपुंसकलिङ्गः
कन्नडार्थः - > ಸಾರಸ ಪಕ್ಷಿ
L R Vaidya
English
paMka-ja {% n. %} a lotus.
Bopp
Latin
पङ्कज m. (in luto natus, TATP. e praec. et ज) nymphaea,
lotus.
Schmidt Nachtrage zum Sanskrit Worterbuch
German
पङ्कज Adj. lotusäugig, Jātakam. 2, 10
°aus der Sünde entstanden, Viṣṇubh. II, 45b.
अभिधानचिन्तामणिः
Sanskrit
--source--
कमलं नलिनं पद्ममरविन्दं कुशेशयम् ११६०
परं शतसहस्राभ्यां पत्त्रं राजीवपुष्करे
बिसप्रसूनं नालीकं तामरसं महोत्पलम् ११६१
तज्जलात्सरसः पङ्कात्परे रुड्रुहजन्मजाः
-wordlist-
कमल (क्ली), नलिन (क्ली), पद्म (क्ली), अरविन्द (क्ली), कुशेशय (क्ली), शतपत्त्र (क्ली), सहस्रपत्त्र (क्ली), राजीव (क्ली), पुष्कर (क्ली), बिसप्रसून (क्ली), नालीक (क्ली), तामरस (क्ली), महोत्पल (क्ली), जलरुह् (क्ली), जलरुह (क्ली), जलजन्मन् (क्ली), जलज (क्ली), सरोरुह् (क्ली), सरोरुह (क्ली), सरोजन्मन् (क्ली), सरोज (क्ली), पङ्करुह (क्ली), पङ्करुह (क्ली), पङ्कजन्मन् (क्ली), पङ्कज (क्ली)
अभिधानरत्नमाला
Sanskrit
सहस्रपत्त्र
सहस्रपत्त्र, शतपत्त्र, अम्बुज, कुशेशय, तामरस, सरोरुह, विप्रसून, कमल, महोत्पल, सरोज, अब्ज, नलिन, पुष्कर, राजीव, अरविन्द, पद्म, पङ्कज
सहस्रपत्त्रं शत्रपत्त्रमम्बुजं
कुशेशयं तामरसं सरोरुहम्
विसप्रसूनं कमलं महोत्पलं,
सरोजमब्जं नलिनं पुष्करम् ६७९
राजीवमरविन्दं पद्मं पङ्कजमिष्यते
verse 3.1.1.679
page 0077
नाममाला
Sanskrit
परिषज्ज, कर्दमज, पङ्कज, तामरस, कमल, नलिन, सरोज, सरसीरुह, खरदण्ड, कोकनद, पण्डरीक, पलोत्पल
परिषत्कर्दमः पङ्कः तज्जम् तामरसं विदुः
कमलं नलिनं पदम् सरोजं सरसीरुहम् २०
खरदण्डं कोकनदं पुण्डरीकं महोत्पलम्
verse 0.1.1.20
page 0011
शब्दकल्पद्रुमः
Sanskrit
पङ्कजं,
क्ली,
(पङ्के पङ्कात् वा जायते इति पङ्क+ जन + कर्त्तरि + डः ।) पद्मम् इति राज-निर्घण्टः
(यथा रघुः ।“तिरश्चकार भ्रमराभिलीनयोःसुजातयोः पङ्कजकोषयोः श्रियम्”
अयं हि योगरूढशब्दः यदुक्तम् ।“रूढा गष्मदयः प्रोक्ता यौगिकाः पाचकादयः ।योगरूढाश्च विज्ञेयाः पङ्कजाद्या मनीषिभिः”
)
वाचस्पत्यम्
Sanskrit
पङ्क(ङ्के)ज
न०
पङ्के जायते जन--ड त० वा अलुक्समा० ।१ पद्मे सारमपक्षिणि राजनि० पङ्कजनिकर्तृत्व-विशिष्टे अस्य शब्दस्य योगरूढता कुमुदादीनां पङ्कजात-त्वेऽपि तत्र रूढिः किन्तु लक्षकतेत्याकारे स्थितम्
Capeller
German
पङ्कज
n.
die Blüte der Wasserrose
m.
Bein. Brahman's (auch पङ्कजन्मन्
m.
).