नन्दा (nandA)
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Spoken Sanskrit
Englishनन्दा - nandA - - happiness
नन्दा - nandA - - husband's sister
नन्दा - nandA - - prosperity
नन्दा - nandA - - Delight
नन्दा - nandA - - small earthen water-jar
नन्दा - nandA - - Felicity
Apte
Englishनन्दा [nandā], [नन्दयति नन्द्-अच्]
Delight, joy, happiness.
Affluence, wealth, prosperity.
A small earthen water-jar.
A husband's sister.
The first, sixth and eleventh days of a lunar fortnight (considered as auspicious tithis
) नन्दा भद्रा जया रिक्ता पूर्णा च प्रतिपत् क्रमात् Jyotistattvam.
An epithet of Gaurī.
of a cave
नन्दागुहायामिव नागराजः Bu. Ch.1.19.
Monier Williams Cologne
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Apte Hindi
Hindiनन्दा
- नन्द + टाप्
"खुशी, हर्ष, आनन्द"
नन्दा
- नन्द + टाप्
"सम्पन्नता, धनाढयता, समृद्धि"
नन्दा
- नन्द + टाप्
छोटा मिट्टी का जल-पात्र
नन्दा
- नन्द + टाप्
"ननद, पति की बहन"
नन्दा
- नन्द + टाप्
"प्रतिपदा, षष्ठी और एकादशी, चांद्रमास की तीन तिथियाँ "
Shabdartha Kaustubha
Kannadaनन्दा
पदविभागः - > स्त्रीलिङ्गः
कन्नडार्थः - > ದುರ್ಗಾದೇವಿ
प्रयोगाः - > "नन्दते सुरलोकेषु नन्दने वसतेऽथवा । हिमाचले महापुण्ये नन्दा देवी ततः स्मृता ॥"
उल्लेखाः - > देवीपु०
नन्दा
पदविभागः - > स्त्रीलिङ्गः
कन्नडार्थः - > ನಂದಾತಿಥಿ /ಶುಕ್ಲ ಮತ್ತು ಕೃಷ್ಣಪಕ್ಷಗಳ ಪಾಡ್ಯ ಷಷ್ಠಿ ಮತ್ತು ಏಕಾದಶೀ ತಿಥಿಗಳು
प्रयोगाः - > "नन्दा भद्रा जया रिक्ता पूर्णा च प्रतिपत्क्रमात्"
नन्दा
पदविभागः - > स्त्रीलिङ्गः
कन्नडार्थः - > ಧರ್ಮಪುರುಷನ ಪುತ್ರನಾದ ಹರ್ಷನ ಪತ್ನಿ
प्रयोगाः - > "नन्दा तु भार्या हर्षस्य यासु लोकाः प्रतिष्ठिताः"
उल्लेखाः - > भा० आदि० ६७-३३
नन्दा
पदविभागः - > स्त्रीलिङ्गः
कन्नडार्थः - > ಪತಿಯ ಸಹೋದರಿ
नन्दा
पदविभागः - > स्त्रीलिङ्गः
कन्नडार्थः - > ಮಣ್ಣಿನ ಗುಡಾಣ
विस्तारः - > "नन्दा स्यादलिञ्जरे । गौर्यां तिथिविशेषे स्त्री निधिराजभिदोः पुमान्" - मेदि० ।
नन्दा
पदविभागः - > स्त्रीलिङ्गः
कन्नडार्थः - > ಸಂಪತ್ತು /ಐಶ್ವರ್ಯ
विस्तारः - > "नन्दा स्म्पद्यलिञ्जरे । तिथिभेदे च"- हेम० ।
Edgerton Buddhist Hybrid
EnglishNandā,
(1) n. of the daughter of a village chief who gave food to the Bodhisattva when he broke his fast [Page290-a] after his long austerities
otherwise known as Sujātā, q.v.: Divy 〔392.12〕 (vs)
in 〔392.9〕 (prose) associated in this act with Nandabalā (they seem to be regarded as sisters, dual grāmikaduhitryoḥ), q.v.
(2) n. of a lokadhātu: ŚsP 〔52.18〕
(3) n. of a rākṣasī: Māy 〔240.7〕
〔241.13〕.
Wordnet
Sanskrit नन्दा
एका अप्सराः।
"नन्दायाः वर्णनं पुराणेषु प्राप्यते।"
नन्दा
विभीषणस्य कन्या।
"नन्दायाः वर्णनं पुराणेषु प्राप्यते।"
भद्रता, अनुकूलता, ऋतिः, ऋद्धिः, कन्त्वम्, नन्दा, भाग्यवत्ता, भाग्यसम्पद्, सुष्ठुता, सुभगत्वम्, सुस्वधा, सौभाग्यवत्ता, सौभाग्यवत्त्वम्, स्फीतता, श्रिया, श्रीया
सुखदायिका सम्पन्ना च अवस्था।
"गृहे भद्रता अस्ति।"
ननान्दा, नन्दिनी, नन्दा, पतिस्वसा
भर्तुः भगिनी।
"सुभद्रा सत्यभामायाः ननान्दा आसीत्।"
दुर्गा, उमा, कात्यायनी, गौरी, ब्रह्माणी, काली, हैमवती, ईश्वरा, शिवा, भवानी, रुद्राणी, सर्वाणी, सर्वमङ्गला, अपर्णा, पार्वती, मृडानी, लीलावती, चणडिका, अम्बिका, शारदा, चण्डी, चण्डा, चण्डनायिका, गिरिजा, मङ्गला, नारायणी, महामाया, वैष्णवी, महेश्वरी, कोट्टवी, षष्ठी, माधवी, नगनन्दिनी, जयन्ती, भार्गवी, रम्भा, सिंहरथा, सती, भ्रामरी, दक्षकन्या, महिषमर्दिनी, हेरम्बजननी, सावित्री, कृष्णपिङ्गला, वृषाकपायी, लम्बा, हिमशैलजा, कार्त्तिकेयप्रसूः, आद्या, नित्या, विद्या, शुभह्करी, सात्त्विकी, राजसी, तामसी, भीमा, नन्दनन्दिनी, महामायी, शूलधरा, सुनन्दा, शुम्यभघातिनी, ह्री, पर्वतराजतनया, हिमालयसुता, महेश्वरवनिता, सत्या, भगवती, ईशाना, सनातनी, महाकाली, शिवानी, हरवल्लभा, उग्रचण्डा, चामुण्डा, विधात्री, आनन्दा, महामात्रा, महामुद्रा, माकरी, भौमी, कल्याणी, कृष्णा, मानदात्री, मदालसा, मानिनी, चार्वङ्गी, वाणी, ईशा, वलेशी, भ्रमरी, भूष्या, फाल्गुनी, यती, ब्रह्ममयी, भाविनी, देवी, अचिन्ता, त्रिनेत्रा, त्रिशूला, चर्चिका, तीव्रा, नन्दिनी, नन्दा, धरित्रिणी, मातृका, चिदानन्दस्वरूपिणी, मनस्विनी, महादेवी, निद्रारूपा, भवानिका, तारा, नीलसरस्वती, कालिका, उग्रतारा, कामेश्वरी, सुन्दरी, भैरवी, राजराजेश्वरी, भुवनेशी, त्वरिता, महालक्ष्मी, राजीवलोचनी, धनदा, वागीश्वरी, त्रिपुरा, ज्वाल्मुखी, वगलामुखी, सिद्धविद्या, अन्नपूर्णा, विशालाक्षी, सुभगा, सगुणा, निर्गुणा, धवला, गीतिः, गीतवाद्यप्रिया, अट्टालवासिनी, अट्टहासिनी, घोरा, प्रेमा, वटेश्वरी, कीर्तिदा, बुद्धिदा, अवीरा, पण्डितालयवासिनी, मण्डिता, संवत्सरा, कृष्णरूपा, बलिप्रिया, तुमुला, कामिनी, कामरूपा, पुण्यदा, विष्णुचक्रधरा, पञ्चमा, वृन्दावनस्वरूपिणी, अयोध्यारुपिणी, मायावती, जीमूतवसना, जगन्नाथस्वरूपिणी, कृत्तिवसना, त्रियामा, जमलार्जुनी, यामिनी, यशोदा, यादवी, जगती, कृष्णजाया, सत्यभामा, सुभद्रिका, लक्ष्मणा, दिगम्बरी, पृथुका, तीक्ष्णा, आचारा, अक्रूरा, जाह्नवी, गण्डकी, ध्येया, जृम्भणी, मोहिनी, विकारा, अक्षरवासिनी, अंशका, पत्रिका, पवित्रिका, तुलसी, अतुला, जानकी, वन्द्या, कामना, नारसिंही, गिरीशा, साध्वी, कल्याणी, कमला, कान्ता, शान्ता, कुला, वेदमाता, कर्मदा, सन्ध्या, त्रिपुरसुन्दरी, रासेशी, दक्षयज्ञविनाशिनी, अनन्ता, धर्मेश्वरी, चक्रेश्वरी, खञ्जना, विदग्धा, कुञ्जिका, चित्रा, सुलेखा, चतुर्भुजा, राका, प्रज्ञा, ऋद्भिदा, तापिनी, तपा, सुमन्त्रा, दूती, अशनी, कराला, कालकी, कुष्माण्डी, कैटभा, कैटभी, क्षत्रिया, क्षमा, क्षेमा, चण्डालिका, जयन्ती, भेरुण्डा
सा देवी यया नैके दैत्याः हताः तथा च या आदिशक्तिः अस्ति इति मन्यते।
"नवरात्रोत्सवे स्थाने स्थाने दुर्गायाः प्रतिष्ठापना क्रियते।"
पार्वती, अम्बा, उमा, गिरिजा, गौरी, भगवती, भवानी, मङ्गला, महागौरी, महादेवी, रुद्राणी, शिवा, शैलजा, हिमालयजा, अम्बिका, अचलकन्या, अचलजा, शैलसुता, हिमजा, शैलेयी, अपर्णा, शैलकुमारी, शैलकन्या, जगद्जननी, त्रिभुवनसुन्दरी, सुनन्दा, भवभामिनी, भववामा, जगदीश्वरी, भव्या, पञ्चमुखी, पर्वतजा, वृषाकपायी, शम्भुकान्ता, नन्दा, जया, नन्दिनी, शङ्करा, शताक्षी, नित्या, मृड़ानी, हेमसुता, अद्रितनया, हैमवती, आर्या, इला, वारुणी
शिवस्य पत्नी।
"पार्वती गणेशस्य माता अस्ति।"
अभिधानचिन्तामणिः
Sanskritमरुदेवा विजया सेना सिद्धार्था च मङ्गला ।
ततः सुसीमा पृथ्वी लक्ष्मणा रामा ततः परम् ॥ ३९ ॥
नन्दा विष्णुर्जया श्यामा सुयशाः सुव्रताचिरा ।
श्रीर्देवी प्रभावती च पद्मा वप्रा शिवा तथा ॥ ४० ॥
वामा त्रिशला क्रमतः पितरो मातरोऽर्हताम् ।
अर्हन्मातृ (स्त्री), मरुदेवा (स्त्री), विजया (स्त्री), सेना (स्त्री), सिद्धार्था (स्त्री), मङ्गला (स्त्री), सुसीमा (स्त्री), पृथ्वी (स्त्री), लक्ष्मणा (स्त्री), रामा (स्त्री), नन्दा (स्त्री), विष्णु (स्त्री), जया (स्त्री), श्यामा (स्त्री), सुयशा (स्त्री), सुव्रता (स्त्री), अचिरा (स्त्री), श्री (स्त्री), देवी (स्त्री), प्रभावती (स्त्री), पद्मा (स्त्री), वप्रा (स्त्री), शिवा (स्त्री), वामा (स्त्री), त्रिशला (स्त्री)
ननान्दा तु स्वसा पत्युर्ननन्दा नन्दिनीत्यपि ।
ननान्दृ (स्त्री), नन्दा (स्त्री), नन्दिनी (स्त्री)
अभिधानचिन्तामणिपरिशिष्टम्
Sanskritगौतमी कौशिकी कृष्णा तामसी बाभ्रवी जया ॥ ४७ ॥
कालरात्रिर्महामाया भ्रामरी यादवी वरा ।
बर्हिध्वजा शूलधरा परमब्रह्मचारिणी ॥ ४८ ॥
अमोघा विन्ध्यनिलया षष्ठी कान्तारवासिनी ।
जाङ्गुली बदरीवासा वरदा कृष्णपिङ्गला ॥ ४९ ॥
p{0003}
दृषद्वतीन्द्रभगिनी प्रगल्भा रेवती तथा ।
महाविद्या सिनीवाली रक्तदन्त्येकपाटला ॥ ५० ॥
एकपर्णा बहुभुजा नन्दपुत्री महाजया ।
भद्रकाली महाकाली योगिनी गणनायिका ॥ ५१ ॥
हासा भीमा प्रकूष्माण्डी गदिनी वारुणी हिमा ।
अनन्ता विजया क्षेमा मानस्तोका कुहावती ॥ ५२ ॥
चारणा च पितृगणा स्कन्दमाता घनाञ्जनी ।
गान्धर्वी कर्वरी गार्गी सावित्री ब्रह्मचारिणी ॥ ५३ ॥
कोटिश्रीर्सन्दरावासा केशी मलयवासिनी ।
कालायनी विशालाक्षी किराती गोकुलोद्भवा ॥ ५४ ॥
एकानसी नारायणी शैला शाकंभरीश्वरी ।
प्रकीर्णकेशी कुण्डा च नीलवस्त्रोग्रचारिणी ॥ ५५ ॥
अष्टादशभुजा पौत्री शिवदूती यमस्वसा ।
सुनन्दा विकचा लम्बा जयन्ती नकुलाकुला ॥ ५६ ॥
विलङ्का नन्दिनी नन्दा नन्दयन्ती निरञ्जना ।
कालंजरी शतमुखी विकराली करालिका ॥ ५७ ॥
विरजाः पुरला जीरी बहुपुत्री कुलेश्वरी ।
कैटभी कालदमनी दर्दुरा कुलदेवता ॥ ५८ ॥
रौद्री कुन्द्रा महारौद्री कालंगमा महानिशा ।
बलदेवस्वसा पुत्री हीरी क्षेमंकरी प्रभा ॥ ५९ ॥
मारी हैमवती चापि गोला शिखरवासिनी ।
गौतमी (स्त्री), कौशिकी (स्त्री), कृष्णा (स्त्री), तामसी (स्त्री), बाभ्रवी (स्त्री), जया (स्त्री), कालरात्रि (स्त्री), महामाया (स्त्री), भ्रामरी (स्त्री), यादवी (स्त्री), वरा (स्त्री), बर्हिध्वजा (स्त्री), शूलधरा (स्त्री), परमब्रह्मचारिणी (स्त्री), अमोघा (स्त्री), विन्ध्यनिलया (स्त्री), षष्ठी (स्त्री), कान्तारवासिनी (स्त्री), जाङ्गुली (स्त्री), बदरीवासा (स्त्री), वरदा (स्त्री), कृष्णपिङ्गला (स्त्री), दृषद्वती (स्त्री), इन्द्रभगिनी (स्त्री), प्रगल्भा (स्त्री), रेवती (स्त्री), महाविद्या (स्त्री), सिनीवाली (स्त्री), रक्तदन्ती (स्त्री), एकपाटला (स्त्री), एकपर्णा (स्त्री), बजुभुजा (स्त्री), नन्दपुत्री (स्त्री), महाजया (स्त्री), भद्रकाली (स्त्री), महाकाली (स्त्री), योगिनी (स्त्री), गणनायिका (स्त्री), हासा (स्त्री), भीमा (स्त्री), प्रकूष्माण्डी (स्त्री), गदिनी (स्त्री), वारुणी (स्त्री), हिमा (स्त्री), अनन्ता (स्त्री), विजया (स्त्री), क्षेमा (स्त्री), मानस्तोका (स्त्री), कुहावती (स्त्री), चारणा (स्त्री), पितृगणा (स्त्री), स्कन्दमाता (स्त्री), घनाञ्जनी (स्त्री), गान्धर्वी (स्त्री), कर्बुरा (स्त्री), गार्गी (स्त्री), सावित्री (स्त्री), ब्रह्मचारिणी (स्त्री), कोटिश्री (स्त्री), मन्दरावासा (स्त्री), केशी (स्त्री), मलयवासिनी (स्त्री), कालायनी (स्त्री), विशालाक्षी (स्त्री), किराती (स्त्री), गोकुलोद्भवा (स्त्री), एकानसी (स्त्री), नारायणी (स्त्री), शैला (स्त्री), शाकम्भरी (स्त्री), ईश्वरी (स्त्री), प्रकीर्णकेशी (स्त्री), कुण्डा (स्त्री), नीलवस्त्रा (स्त्री), उग्रचारिणी (स्त्री), अष्टादशभुजा (स्त्री), पौत्री (स्त्री), शिवदूती (स्त्री), यमस्वसा (स्त्री), सुनन्दा (स्त्री), विकचा (स्त्री), लम्बा (स्त्री), जयन्ती (स्त्री), नकुला (स्त्री), कुला (स्त्री), विलङ्का (स्त्री), नन्दिनी (स्त्री), नन्दा (स्त्री), नन्दयन्ती (स्त्री), निरञ्जना (स्त्री), कालञ्जरी (स्त्री), शतमुखी (स्त्री), विकराला (स्त्री), करालिका (स्त्री), विरजस् (स्त्री), पुरला (स्त्री), जारी (स्त्री), बहुपुत्री (स्त्री), कुलेश्वरी (स्त्री), कैटभी (स्त्री), कालदमनी (स्त्री), दर्दुरा (स्त्री), कुलदेवता (स्त्री), रौद्री (स्त्री), कुन्द्रा (स्त्री), महारौद्री (स्त्री), कालङ्गमा (स्त्री), महानिशा (स्त्री), बलदेवस्वसृ (स्त्री), पुत्री (स्त्री), हीरी (स्त्री), क्षेमङ्करी (स्त्री), प्रभा (स्त्री), मारी (स्त्री), हैमवती (स्त्री), गोला (स्त्री), शिखरवासिनी (स्त्री)
Tamil
Tamilநந்தா3 : மகிழ்ச்சி, ஆனந்தம், செழுமை, கணவனின் சஹோதரி, பார்வதி.
Mahabharata
EnglishNandā^1 (“joy”), wife of Harsha. § 117 (Aṃśāvat.): I, 66, 2597.
Nandā^2, a river. § 249 (Arjunavanavāsap.): I, 215, 7818 (ºm Aparanandāñ ca, visited by Arjuna).--§ 370 (Tīrthayātrāp.): III, 84, 8137 (only C., B has Prāṅnadīṃ).-§ 377 (Dhaumyatīrthak.): III, 87, 8323 (in the east).-§ 390 (Tīrthayātrāp.): III, 110, 9968 (ºm Aparanandāñ ca, visited by Yudhishṭhira, etc.).--§ 390b (Hemakūṭa): III, 110, 9979.--§ 390 (Tīrthayātrāp.): III, 110, 9987.--§ 594 (Mṛtyu): VII, 54, 2092, 2093 (visited by Mṛtyu).--§ 775 (Ānuśāsanik.): XIII, 166, 7654 (enumeration).
पुराणम्
Englishनन्दा १ / NANDĀ I. Wife of harṣa the third son of Dharmadeva. (M.B. Ādi Parva, Chapter 66, Stanza 33).
नन्दा २ / NANDĀ II. A river. Mention is made in mahābhārata, Ādi Parva, Chapter 214, Stanza 6, that while arjuna had been engaged in a pilgrimage visiting the holy places in the east, he reached the banks of the rivers nandā and aparanandā. Many of the scholars are of opinion that this river flowed through the eastern side of the forest Naimiṣaraṇya. When the hermit dhaumya talks about the holy places of the east to yudhiṣṭhira, he says as follows about the river nandā. “The beautiful mountain ‘Kuṇḍoda’ is a place which abounds in roots, fruits and water. nala the King of niṣadha, who was weary of thirst rested here. There is a holy temple here called Devavana which is thronged by hermits. Near this temple there is a mountain through the top of which, two rivers bāhudā and nandā flow.” (M.B. Vana Parva, Chapter 87).
During the time of the forest life of the pāṇḍavas, yudhiṣṭhira travelled with the hermit lomaśa, through the basin of the rivers nandā, and aparanandā. During the Paurāṇic times some deities had lived in the basin of the river nandā, and men began to come there to visit the deities. The devas (gods) did not like this and so they rendered the place inaccessible to men. From that time onwards the river basin of nandā and the mount hemakūṭa have become prohibited area for human beings. (M.B. Vana Parva, Chapter 110).
शब्दकल्पद्रुमः
Sanskritनन्दा, (नन्दयतीति । नन्दि + अच् + टाप् ।)गौरी । अलिञ्जरः । नादा इति भाषा । तिथि-विशेषः । ताश्च उभयपक्षयोः प्रतिपत्षष्ठ्येका-दश्यः । इति मेदिनी । दे, ६ ॥
(यथा, --“नन्दा भद्रा जया रिक्तापूर्णा प्रतिपदः क्रमात् ॥
”इति ज्योतिषम् ॥
)ननान्दा । इति शब्दरत्नावली ॥
सम्पत् । इतिहेमचन्द्रः ॥
* ॥
दुर्गाया नन्दानामकारणंयथा, --“एवमुक्त्रा भवं ब्रह्मा पुनर्द्देवीं स चाब्रवीत् ।त्वया देवि ! महत् कार्य्यं कर्त्तव्यञ्चान्यदस्ति नः ॥
भविष्यं महिषाख्यस्य असुरस्य विनाशनम् ।एवमुक्त्वा ततो ब्रह्मा सर्व्वे देवाश्च पार्थिव ! ॥
यथागतास्ततो जग्मुर्देवीं स्थाप्य हिमे गिरौ ।संस्थाप्य नन्दिता यस्मात्तस्मान्नन्दा तु सा भवेत् ॥
”इति वराहपुराणम् ॥
* ॥
अपि च ।“नन्दते सुरलोकेषु नन्दने वसतेऽथवा ।हिमाचले महापुण्ये नन्दा देवी ततः स्मृता ॥
”तस्या माहात्म्यादि यथा, --“यथा गङ्गा नदीनान्तु उत्तमत्वे व्यवस्थिता ।तद्बद्भगवती नन्दा उत्तमत्वेन संस्थिता ॥
मासे भाद्रपदे देवि ! शुक्लपक्षे व्रजेत् सदा ।तस्येच्छा श्रावणाषाढे अन्यथा न कदाचन ॥
तेषाञ्च चन्द्रनागस्तु पीडां कुर्य्यात् सुलोचने ।न गच्छन्ति सुराः सिद्धाः किं पुनर्म्मानुषादयः ॥
विषवातहताः केचित् विषवातप्रपीडिताः ।विमुह्यन्ते नरा देवि यान्ति देव्याः प्रसादतः ॥
”इति देवीपुराणम् ॥
(कामधेनुविशेषः । यथा, वह्निपुराणे कामधेनु-प्रदाननामाध्याये ।“नन्दा सुनन्दा सुरभी सुशीला सुमनास्तथा ।निर्गता मथ्यमानेऽब्धौ उषःस्नानं शुभप्रदम् ॥
”अस्या दानविधिस्तु कामधेनुशब्दे द्रष्टव्यः ॥
धर्म्मपुत्त्रस्य हर्षस्य पत्नी । आनन्दस्वरूपतयाएवास्यास्तथात्वम् । यथा, महाभारते । १ ।६६ । ३३ ।“नन्दा तु भार्य्या हर्षस्य यासु लोकाः प्रति-ष्ठिताः ॥
”शाकद्बीपान्तर्गतनदीविशेषः । यथा, मात्स्ये ।१२१ । ३१ ।“नन्दा च पावनी चैव तृतीया परिकीर्त्तिता ॥
”“एताः सप्तमहाभागाः प्रतिवर्षं शिवोदकम् ।भावयन्ति जनं सर्व्वं शाकद्वीपनिवासिनम् ॥
”द्बिशालगृहविशेषः । यथा, विश्वकर्म्मप्रकाशे२ अध्याये ।नन्दाख्यं तद्द्विशालञ्च धनदं शोभनं स्मृतम् ॥
”)
वाचस्पत्यम्
Sanskritनन्दा स्त्री नन्दयति नन्दि--अच् । १ दुर्गामूर्त्तिभेदे “यथाग-तास्तथा जग्मुर्देवीं स्थाप्य हिमे गिरौ । संस्थात्यनन्दिता यस्मात्तस्मान्नन्दा तु या भवेत्” वराहपु० “नन्दतेसुरलोकेषु नन्दने वसतेऽथ वा । हिमाचले महापुण्योनन्दा देवी ततः स्मृता” देवीपु० । २ अलिञ्जरे (नाँदा)ख्याते पदार्थे पक्षयोः प्रतिपदेकादशीषष्ठीरूपे ३ तिथिभेदेच मेदि० । “नन्दा भद्रा जया रिक्ता पुर्णा च प्रतिपत्क्रमात्” ज्यो० त० “नन्दामन्दमहीजकाव्यदिवसे” ज्यो० त०नवान्ने कालवर्जने । “आदित्यभौमयोर्नन्दा” ज्यो० त०पापयोगोक्तौ । ४ ननान्दरि शब्दर० । ५ सम्पदि शब्दार्थचि०६ संक्रान्तिभेदे “स्थिरे जीववारे तु नन्देति संज्ञा तदाविप्रवर्गः सुखी मासमेकम्” मु० चि० । रोहिण्युत्तरात्रयंस्थिरं तस्य गुरुवारयोगे रविसंक्रान्तिः सा विप्राणांसुखाय । अत्र वारनक्षत्रोभययोगे घोरादिसंक्रान्तीनांफलं सम्पूर्णं केवलवारवशेन केवलनक्षत्रवशेनापि घोरादिसंज्ञाः सिद्ध्यन्ति तत्र फलं न सम्पूर्णम् । उक्तञ्चनिर्णयामृते रत्नमालायाञ्च “घोरा रवौ ध्वाङ्क्ष्यमृत-द्युतौ च संक्रान्तिरारे च महोदरी स्यात् । मन्दाकिनीज्ञे च गुरौ च नन्दा मिश्रा कवौ राक्षसिकाऽर्कपुत्रे”“उग्रक्षिप्रचरैर्मैत्र ध्रुवमिश्रर्क्षदारुणैः । ऋक्षैः संक्रा-न्तिरर्कस्य घोराद्याः क्रमशो मता” इति ।७ नन्दाश्रमतीर्थे धर्मपुत्रहर्षस्य च पत्न्याञ्च “नन्दा तुभार्य्या हर्षस्य यासु लोकाः प्रतिष्ठिताः” भा० आ०६६ अ० ।
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