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दु (du)

 
शब्दसागरः
English
दु r. 1st cl. (दवति) To go, to move. (दुनीति) r. 5th cl. (ओ, दू) ओदुटु 1. To
be in pain, to burn morally or figuratively.
2. To cause pain,
anxiety, &c.
3. to burn, to heat. गतौ भ्वा० प० अक० अनिट् उपतापे स्वा०
प० सक० सेट्
Capeller Eng
English
1 दु दुनो॑ति (दुन्वते)
pp.
दून॑
q.v.
(& दुत) burn,
grieve (tr. &
intr.
)
P.
दूयते (°ति) only
intr.
C.
दावयति =
S.
tr. —अभि burn (tr. ).
M.
grieve, be afflicted. परि burn
violently (intr. ), be distressed. प्र burn (intr. ), vex, afflict. वि
burn, destroy
M.
be distressed.
2 दु = 1 दिव्
only दविषाणि.
Yates
English
दु दवति 1.
a. To go. (न, ओ, टु)
दुनोति 5.
a. To pain
to burn.
Wilson
English
दु r. 1st cl. (दवति) To go, to move. (दुनोति) r. 5th cl. (ओ,
टु) ओटुटु
1 To be in pain, to burn morally or figuratively.
2 To cause pain, anxiety, &c.
3 To burn, to heat.
Apte
English
दु [du], I. 5
P.
(दुनोति, दुत or दून)
To burn, consume with fire
भस्मसाच्चकारारीन्दुदाव कृतान्तवत्
Bk.*
14.85.
To torment, afflict, distress
उद्भासीनि जलेजानि दुन्वन्त्य- दयितं जनम्
Bk.*
6.74
5.98
17.99
(मुखम्) तव विश्रान्तकथं दुनोति माम्
R.*
8.55.
To pain, produce sorrow
वर्ण- प्रकर्षे सति कर्णिकारं दुनोति निर्गन्धतया स्म चेतः
Ku.*
3.28.
(Intrans.) To be afflicted or pained
देहि सुन्दरि दर्शनं मम मन्मथेन दुनोमि
Gīt.*
3.7. -Pass. (or 4 Ā. according to some) To be afflicted or pained
&c.
नायातः सखि निर्दयो यदि शठस्त्वं दूति किं दूयसे
Gīt.*
7
Ku.*
5.12, 48
R.*
1.7
16.21. -II. 1
P.
(दवति) To go, move.
Apte 1890
English
दु {vI.v} {c5c} P. (दुनोति, दुत or दून) 1 To burn, consume with fire
Bk. 14. 85.
2 To torment, afflict, distress
उद्भासीनि जलेजानि दुन्वंत्यदयितं जनं Bk. 6. 74, 5. 98, 17. 99
(मुखं) तव विश्रांतकथं दुनोति मां R. 8. 55.
3 To pain, produce sorrow
वर्णप्रकर्षे सति कर्णिकारं दुनोति निर्गंधतया स्म चेतः Ku. 3. 28.
4 (Intrans.) To be afflicted or pained
देहि सुंदरि दर्शनं मम मन्मथेन दुतोमि Gīt. 3.
Pass. (or {c4c} A. according to some) To be afflicted or pained &c.
नायातः सखि निर्दयो यदि शठस्त्वं दूति किं दूयसे Gīt. 7
Ku. 5. 12, 48
R. 1. 70, 16. 21. {vII.v} {c1c} P. (दवति) To go, move.
Monier Williams Cologne
English
1. दु (or दू)
cl.
1.
P.
(Dhātup. xxii, 46) दवति (pf. दुदाव
fut. दोष्यति, दोता
aor.
अदावीत् or अदौषीत्,
Vop.
),
to go:
Caus.
दावयति or दवयति (See
s.v.
) Actually occurring only in Subj.
aor.
दविषाणि,
RV.
x, 34, 5, ‘न द्° एभिह्’, (?) I will not go i.e. have intercourse with them (the dice). [cf. δύω, δύνω, δεύομαι.]
2. दु (also written दू),
cl.
5.
P.
cl.
4. Ā. (Dhātup. xxvii, 10
xxvi, 24) दुनोति, दूयते (ep. also °ति
pf. दुदाव
fut. दोष्यति
aor.
अदौषीत्
inf.
दोतुम्),
to be burnt, to be consumed with internal heat or sorrow (Pres. दुनोति,
MBh.
iii, 10069
BhP.
iii, 2, 17
Gīt.
iii, 9
but oftener दूयते, which is at once
Pass.
),
MBh.
Suśr.
Kāv.
&c.
(only दुनो॑ति) to burn, consume with fire, cause internal heat, pain, or sorrow, afflict, distress,
AV.
ix, 4, 18
MBh.
VarBṛS.
Kāv.
:
Caus.
दावयति
aor.
अदूदुवत्:
Desid.
दुदूषति:
Intens.
दोदूयते, दोदोति.
दु [cf. δαίω. for δαϝιω
δύη, pain
Lit. davyti, to torment
Sl. daviti, to worry.]
दुः in comp. for दुस् (p. 488
for दुः-क्°, दुः-प्° See दुष्-क्°, दुष्-प्°).
Monier Williams 1872
English
दु 1. दु (the original form of this rt.
was probably दू), cl. 1. P. दवति, दुदाव
(2nd sing. दुदविथ, 1st du. दुदुविव), दोता,
दोष्यति, अदावीत्, अदौषीत्, दोतुम्, to go, move:
Caus. दावयति, &c., to cause to go
[cf. rt. 1. द्रु।]
दु 2. दु (also written दू, see 1. दू), cl.
5. P. 4. A. दुनोति, दूयते (ep. also दूयति),
दुदाव, दोष्यति, अदौषीत्, दोतुम्, to be burnt,
be consumed with internal heat, be consumed by
pain or sorrow, to be agitated or disturbed, to be
distressed
(cl. 5. P.) to burn, consume with fire
to cause pain by internal heat or fever
to cause
anxiety or sorrow or distress
to afflict: Caus. P.
दावयति, -यितुम्, Aor. अदूदवत्, to burn, cause
pain: Desid. दुदूषति: Intens. दोदूयते, दोदोति
[cf. Lith. dowyu, ‘I vex, = Caus. दावयामि
Gr. ὀ-δύνη, ὀ-δυνάω, δαύω, δεδανμένος, δαυλός,
probably δυή
Lat. doleo fr. doveo
Angl. Sax.
tynan
Hib. leirim, ‘I pain, probably = Caus.
दावयामि।]
दुः दुः, euphonically substituted for दुस्
in दुःख (see the next) and in comps. like दुः-
प्रज्ञ, दुः-शंस, &c. See under दुस् at p. 424.
Macdonell
English
दु DU, Ⅴ. P. duno, Ⅳ. (P.) Ā. dūya, burn
🞄be pained, be consumed with sorrow or remorse
🞄tr. duno, burn, cause pain to, torment, 🞄afflict: pp. dūná, duta, suffering pain, tormented. 🞄abhi, burn. ā (dunu), Ā. grieve. 🞄pari, burn violently
grieve. pra, be consumed 🞄by fire
torment. vi (dunu), Ā. grieve.
Benfey
English
1. दु दु, ii. 5, Par. (also Ātm. ,
MBh. 1, 3289), i. 4, दूय, Ātm. (in
epic poetry also Par., MBh. 4, 591).
1. To burn morally or figuratively, to
be in pain, MBh. 3, 10069
Gīt. 3, 9
MBh. 3, 1371.
2. To burn, to afflict,
Bhāg. P. 3, 14, 9. Ptcple. of the pf.
pass.
1. दून, Suffering pain, Gīt. 8,
7.
2. दुत, Tormented, Śiś. 6, 59. --
With the prep. आ, To grieve,
MBh. 1, 3289 (ii. 5, Atm. ). -- With
परि परि,
1. To burn violently, MBh.
6, 5779.
2. To suffer pain, Rām. 2, 35,
34. -- With प्र प्र,
1. To be consumed
by fire, MBh. 13, 1800 (i. 4).
2. To
torment, Suśr. 1, 18, 5 (ii. 5). -- With
वि वि, To suffer pain, MBh. 1, 3289
(ii. 5, Ātm. )
2171 (i. 4, Par.). -- Cf.
दा̆व, δαύω, δεδαυμένος, δαυλός, δαίω, δαΐς, δᾳδίον, δᾳδόω, δαλός, δανόσ,
etc., probably
also δυή.
2. दु दु, i. 1, Par. To go, to move.
Apte Hindi
Hindi
दु
"स्वा* पर* , , " - -
"जलाना, आग में भस्म करना"
दु
"स्वा* पर* , , " - -
"सताना, कष्ट देना, दुःख देना"
दु
"स्वा* पर* , , " - -
"पीड़ा देना, शोक पैदा करना"
दु
"स्वा* पर* , , " - -
"कष्टग्रस्त होना, पीड़ित होना"
दु
स्वा* कर्मवा* या दिवा* आ* - -
"कष्टग्रस्त होना, पीड़ित होना"
Shabdartha Kaustubha
Kannada
दु - गतौ (भ्वा० पर० अक० अनि०) दवति
पदविभागः - > धातुः
कन्नडार्थः - > ಹೋಗು /ಚಲಿಸು
L R Vaidya
English
du {% vt. or vi. 5P (pp. दुत or दुन
pres. दुनोति) %} 1. To burn, to consume with fire
2. to distress, to afflict, मुखं तव विश्रांतकथं दुनोति माम् R.viii.55
3. to excite sorrow, to give pain, वर्णप्रकर्षे सति कर्णिकारं दुनोति निर्गंधतया स्म चेतः K.S.iii.28
4. to be afflicted, मन्मथेन दुनोमि Git.G.iii.
Bopp
Latin
1. दु 5. P.
1) vexare, dolore afficere, contristare. RAGH.
8. 54.: मुखन् तव विश्रान्तकथन् दुनोति माम्
19. 21.: प्रणयिनीः सो ऽदुनोत्
MAH. 3. 16192.: अङ्गा-
नि मे दुनोतु मकरध्वजः.
2) intrans. vexari, dolore af-
fici, dolere. MAH. 3. 10069.: दुनोति चित्तं यदि तन्
पश्ये
GITA-GOV. 3.: मन्मथेन दुनोमि. (Lith. dowiu
vexo pertinet ad formam caus. दावयामि
gr. ὀ-δύνη, ὀ-δυνάω
de δύω v. 2. दु
fortasse lat. doleo e doveo, v.
gr. comp. 20.
hib. leirim «I pain, torment» aut huc, i.e.
ad Caus. दावयामि, aut ad दरामि - v. दॄ - pertinere
videtur.)
c. A. vexari, angi, dolore affici. MAH. 1. 3289.: आधुन्व-
स्व, विदुन्वस्व pro आदुनुष्व, विदुनुष्व, adjecto cha-
ractere 1^mae classis, sicut saepe in linguâ zend. (gr. comp.
519.)
c. वि A. id. v. praec.
2. दु 1. P. (गतौ) ire. (Cf. दन्व्, द्रु
gr. δύω, δονέω
v.
दन्व्.)
Edgerton Buddhist Hybrid
English
du- (= Pali id.) for Skt. dvi-, stem for numeral two, 〔§ 3.117〕, esp. in cpds.: see duguṇa, dupadendra, durūpa, ekadukāye.
Kridanta Forms
Sanskrit
दु (दु॒ गतौ - भ्वादिः - अनिट्)
ल्युट् = दवनम्
अनीयर् = दवनीयः - दवनीया
ण्वुल् = दावकः - दाविका
तुमुँन् = दोतुम्
तव्य = दोतव्यः - दोतव्या
तृच् = दोता - दोत्री
क्त्वा = दुत्वा
ल्यप् = प्रदुत्य
क्तवतुँ = दूनवान् - दूनवती
क्त = दूनः - दूना
शतृँ = दवन् - दवन्ती
दु (टु꣡दु॒ उपतापे - स्वादिः - अनिट्)
ल्युट् = दवनम्
अनीयर् = दवनीयः - दवनीया
ण्वुल् = दावकः - दाविका
तुमुँन् = दोतुम्
तव्य = दोतव्यः - दोतव्या
तृच् = दोता - दोत्री
क्त्वा = दुत्वा
ल्यप् = प्रदुत्य
क्तवतुँ = दुतवान् - दुतवती
क्त = दुतः - दुता
शतृँ = दुन्वन् - दुन्वती
धातुपाठः (Krishnacharya)
Sanskrit
धातुः:
दु
मूलधातुः:
दु
धात्वर्थः:
गतौ
गणः:
भ्वादिः
कर्मकत्वं:
सकर्मकः
इट्त्वं:
अनिट्
उपग्रहः:
परस्मैपदी
रूपम्:
दवति
अनुबन्धादिविशेषः:
उकारान्तः
धातुः:
दु
मूलधातुः:
टुदु
धात्वर्थः:
उपतापे
गणः:
स्वादिः
कर्मकत्वं:
सकर्मकः
इट्त्वं:
सेट्
उपग्रहः:
परस्मैपदी
रूपम्:
दुनोति
Abhyankara Grammar
English
दु a technical term in the Jainendra Vyakarana for the term वृद्ध which is used in Panini's grammar and which is defined by Panini in the rule वृद्धिर्यस्याचामादिस्तद् वृद्धम् P. I. 1.73.
धातुप्रदीपः
Sanskrit
दु
मानकरूपान्तरम् - द्रु
द्रु गतौ
- दवति द्रवति अदुद्रुवत् ।949, 950 ।।
Schmidt Nachtrage zum Sanskrit Worterbuch
German
1. दु , आदुन्वस्व und विदुन्वस्व MBh. 1, 78, 11. Mit °उप quälen, Schmerz bereiten, S II, 184, 5. Mit °निस्, Padyac. IX, 83d in निर्दुत =
उपतप्त Mit संपरि, °दूयमान sich verzehrend, abhärmend, R. ed. Bomb. 4, 24, 2. 3. *दु [गतौ] H 5, 139 दून=उपद्रुत.
Wordnet
Sanskrit
Synonyms:
दु, शुच्, खिद्, पीडय, बाध्, क्लिश्, व्यथय, उपतप्, संतप्, सन्तप्, परितप्, आयस्, उद्विज्, दुःखय
verb
दुःखानुभूत्यनुकूलः व्यापारः।
"मृतः पुरुषः कदापि प्रत्यागच्छति भवान् मा दौषीः।"
Synonyms:
बाध्, व्यथ्, द्रुह्, पीडय, दु
verb
अभिघातेन पीडनानुकूलः व्यापारः।
"शीलाम् अभिहत्य उद्भूता शिरोवेदना माम् अबाधत।"
शब्दकल्पद्रुमः
Sanskrit
दु, गतौ इति कविकल्पद्रुमः
(भ्वां-परं-सकं-अनिट् ।) दवति इति दुर्गादासः
दु, टु उपतापे इति कविकल्पद्रुमः
(स्वां-परं-सकं-अकं च-अनिट् ।) टु, दवथुः ।ओ, दूनः न, दुनोति उपताप इहोपतप्ती-भावः उपतप्तीकरणञ्च मन्मथेन दुनोमीतिजयदेवः वर्णप्रकर्षे सति कर्णिकारं दुनोतिनिर्गन्धतया स्म चेतः इति कालिदासः ।इति दुर्गादासः
दुः, [र्]
व्य,
निषेधः दुःखम् निन्दा अव-क्षेपणम् इति दुर्गादासधृतपुरुषोत्तमदेवः
दुः, [स्]
व्य,
दुःखभावनम् कोपः इति दुर्गा-दासधृतमेदिनी
वाचस्पत्यम्
Sanskrit
दु गतौ
भ्वा०
पर०
अक० अनिट् दवति अदौषीत् केचित्तुवेडयमित्याहुस्तेन अदावीदित्यपि दुदाव वेट् कत्वेऽपिलिटि नित्येट् दुदुविव दूनः “पित्तेन दूने रसनेसितापि” नैष०
दु उपतापे स्वा० प०
सक०
सेट् उपतापःपीडनम् दुनोति-अदावीत् अदौषीत् लिटि नित्येट् दुदुविव दुतः “मृ-दुतया दुतया” माघः “दुनोति निर्गन्धतया स्म चेतः”कुमा० “स भस्मसाच्चकारारीन् दुदाव कृतान्तवत्” भट्टिः“मृदु दूयेत यदङ्गमर्पितम्” रघुः कर्मकर्तरि रूपं दू--स्येदेदैवादिकस्य वा रूपम्
क्षीरतरङ्गिणी
Sanskrit
दु
मानकरूपान्तरम् - द्रु
द्रु गतौ
- दवति दुन्योरनुपसर्गे (31142) णः दावो वनाग्निः ॠदोरप् (3357) दवः समि युद्रुदुवः (3323) घञ्- संदावः दुतनिभ्यां दीर्घश्च (उ0 390) दूतः द्रवति द्रवः द्रुतः बुधयुधनशजनेङ्प्रुद्रुस्रुभ्यो णेः (1386) इति णेः परस्मैपदम्-द्रावयति कृसृभृवृ (7213) इति नेट्-दुद्रोथ णिश्रिद्रुस्रुभ्यः कर्तरि चङ् (3148) अदुद्रुवत् स्रवतिश्रृणोति (7481) इत्यभ्यासस्य ओरित्त्वम् दिद्रावयिषति, दुद्रावयिषति, अदिद्रवत्, अदुद्रवत् प्रे द्रुस्तु (3327) इति प्रद्रावः समि युद्रु (3323) इति सन्द्रावः उदि श्रयति (3349) इत्युद्द्रावः प्रे लपसृद्रुमथ (32145) इति प्रद्रावी डुप्रकरणे (22180 वा0) मितद्रुः द्रुस्तरुः द्रुमः हरिमितयोर्द्रुवः (उ0 135) हरिद्रुः द्रुदक्षिभ्यामिनन् (उ0 250) द्रविणम् कॄवॄजॄसि (दश0 उ0 542) इति नः- द्रोणः वहिश्रि (उ0 451) इति निः द्रोणिः कृदिकारात् (गण 4145 सूत्रम्) इति ङीषि द्रोणी 914, 915
धातुवृत्तिः
Sanskrit
दु
मानकरूपान्तरम् - द्रु
द्रु (अर्थः) गतौ
( दवति दुदाव दुदुवतुः दुदोथ दुदविथ दुदुविव दोता ) इत्यादि पूर्ववत्, लिटि क्र्यादिनियमादिट्, थलि भारद्वाजनियमादिड्विकल्पः ( दवः ) पचाद्यच्"दुन्योरनुपसर्गे'' इति णविधौ दुनोतिरेव वृत्तौ गृहीतः पदमञ्जर्यां नयतिना साहचर्यात् सानुबन्धकस्य दुनोतेरिह ग्रहणमिति ( संदावः ) "समि युद्रुदुवः'' इति घञ् ( दूनः ) "ल्वादिभ्यः'' इत्यत्र "दुग्वोर्दीर्घश्च'इति वचनान्निष्ठानत्वं दीर्घत्वं ( दूतः ) "दुतनिभ्यां दार्घश्च'' इति तन् दीर्घश्च दूतस्य भावकर्मणी ( दूत्यम् ) "दूतपवणिग्भ्यां चेष्यत'' इति यः द्रुञ् उपताप इति स्वादौ ( द्रवति दुद्राव दुद्रुवतुः दुद्रोथ दुद्रुव) क्रादिपाठादनिट्त्वम् ननु "स्रुद्रुस्तुश्रुवां'' निषेधस्य थलोऽन्यत्र चरितार्थत्वात् थलि भारद्वाजनियमाद्विकल्पः स्यात् चैवं शक्यते वक्तुं स्वादिव्यतिरिक्तानां ग्रहणं नियमार्थमिति, स्वादीनां तु भारद्वाजनियमप्राप्तस्यैवेटो निषेधार्थमिति एवं हि क्रादिनियमात् थलोऽन्यत्र नित्यमिट् स्यात् एवं तर्हि स्वादीनां ग्रहणं यः क्रादिनियमात् इट् प्राप्तो यश्चापि भारद्वाजनियमात् तयोर्द्वयोर्निषेधार्थं भविष्यति मन्तव्यं येन नाप्राप्तिन्यायेन क्रादिनियमप्राप्तस्यैवेटोनिषेधो युक्त इति पुरस्तात् प्रतिषेधकाण्डारम्भादुभयोर्निषेध इति वृत्तावुक्तत्वात् अथ वा सर्वेषां नियमार्थत्वेऽपि दोषः अनेन नियमेन यः क्रादिव्यतिरिक्तानां नित्यमिट् प्राप्तः सः "अचस्तास्वत्'' इति निषिध्यते यत्र चायं निषेधस्तत्रैव भारद्वाजनियम इत्यर्थादस्य नियमस्य क्राद्यष्टकव्यतिरिक्तविषयत्वलाभात्( द्रोता द्रोष्यति ) इत्यादि पूर्ववत् लुङि "णिश्रिद्रुस्रुभ्यः'' इति चङि ( अदुद्रुवत् ) लघूपधगुणादन्तरङ्गत्वादुत्वादुवङित्युक्तं, ( दुद्रूषति दोद्रूयते दोद्रोति द्रावयति अदुद्रवत् अदिद्रवत् ) "श्रवतिशृणोतिद्रवति''इत्यभ्यासस्येत्वम् "बुधयुध'' इत्यादिना नित्यं परस्मैपदम् ( सन्द्रावः ) "समि युद्रुदुवः" इति घञ् (उद्द्रावः)"उदि श्रयति'' इत्यादिना घञ् ( प्रद्रावः ) "प्रे द्रुस्तु स्रुवः'' इति घञ् (हरिद्रुः मितद्रुः शतद्रुः) [ द्रुप्रकरणे मितद्रवादिभ्य उपसंख्यानम् ] इति द्रुः हरिद्रुणा प्रोक्तं छन्दोऽधीते ( हारिद्रविणः ) "कलापिवैशम्पायनान्तेवासिभ्यश्च'' इति प्रोक्तार्थे णिनिः तदन्तात् "छन्दोब्राह्मणानि'' इति नियमादध्येतृवेदितृप्रत्ययान्तमेवेत्युक्तं, तस्याणः "प्रोक्ताल्लुक्'' इति लुक् कालाप्यन्तेवासिनश्च
हरिद्ररेषां प्रथमस्ततश्छगलितुम्बुरू उलपेन चतुर्थेन कालापक्रमिहोच्यते
वइत्युक्ताः ( द्रविणम् ) "द्रुदक्षिभ्यामिनन्'' इति इनन् ( द्रोणः ) परिमाणादिः "द्रुजुसिपण्यनि'' इति नप्रत्ययः स्त्रियां गौरादिपाठात् ( द्रोणी द्रोणस्य गोत्रापत्यं द्रौणायनः द्रौणिः ) "द्रौणपर्वतजीवन्तादन्यतरस्याम्'' इति फक् तदभावे "अत इञ्'' ( द्रोणं पचतीति द्रौणः, द्रौणिकः ) "तत् पचतीति द्रीणादण् च'' इति अण्ठकौ ( द्विद्रोणेन धान्यं क्रीणाति ) तृतीयाविधाने [ प्रकृत्यादिभ्य उपसंख्यानम् ] इति तृतीया 926
कृदन्तरूपमाला
Sanskrit
1 {@“दु गतौ”@} 2 ‘दुनोति दूयते तापे, दवतीति गतौ पदम्।।’ 3 इति देवः।
दावकः-विका, दावकः-विका, 4 दुदूषकः-षिका, 5 दोदूयकः-यिका
दोता-त्री, दावयिता-त्री, दुदूषिता-त्री, दोदूयिता-त्री
दवन्-न्ती, दावयन्-न्ती, दुदूषन्-न्ती
-- दोष्यन्-न्ती-ती, दावयिष्यन्-न्ती-ती, दुदूषिष्यन्-न्ती-ती
-- -- दावयमानः, दावयिष्यमाणः, -- दोदूयमानः, दोदूयिष्यमाणः
6 प्रदुत्-प्रदुतौ-प्रदुतः
-- -- 7 दूनम्- 8 दूनः-दूनवान्, दावितः, दुदूषितः, दोदूयितः-तवान्
9 दवः, 10 दूतः, 11 दवनः, दावः, दुदूषुः, 12 दोदुवः
दोतव्यम्, दावयितव्यम्, दुदूषितव्यम्, दोदूयितव्यम्
दवनीयम्, दावनीयम्, दुदूषणीयम्, दोदूयनीयम्
13 दव्यम्, 14 अवश्यदाव्यम्, दाव्यम्, दुदूष्यम्, दोदूय्यम्
ईषद्दवः-दुर्दवः-सुदवः
-- -- 15 16 दूयमानः, दाव्यमानः, दुदूष्यमाणः, दोदूय्यमानः
17 दवः, 18 सन्दावः, दावः, दुदूषः, दोदूयः
19 प्रणिदोतुम्-प्रनिदोतुम्, दावयितुम्, दुदूषितुम्, दोदूयितुम्
दुतिः, दावना, दुदूषा, दोदूया
दवनम्, दावनम्, दुदूषणम्, दोदूयनम्
दुत्वा, दावयित्वा, दुदूषित्वा, दोदूयित्वा
प्रदुत्य, प्रदाव्य, प्रदुदूष्य, प्रदोदूय्य
दावम् २, दुत्वा २, दावम् २, दावयित्वा २, दुदूषम् २, दुदूषित्वा २, दोदूयम्
दोदूयित्वा २।
प्रासङ्गिक्यः
01
=>
(८४७)
02
=>
(१-भ्वादिः-९४४। सक। अनि। पर।)
03
=>
(श्लो। २२)
04
=>
[[१। सन्नन्तात् ण्वुलि, द्वित्वे, ‘इको झल्’ (१-२-९) इति सनः कित्त्वे, गुणनिषेधे, ‘अज्झनगमां सनि’ (६-४-१६) इति दीर्घे रूपम्। एवं सन्नन्ते सर्वत्र बोध्यम्।]]
05
=>
[[२। यङन्तान्ण्वुलि, द्वित्वादिके कृते, अतो लोपे, अभ्यासे गुणे, ‘अकृत्सार्व- धातुकयोः--’ (७-४-२५) इति दीर्घः। एवं यङन्ते सर्वत्र प्रक्रिया ज्ञेया।]]
06
=>
[[३। क्विपि, ‘ह्रस्वस्य पिति कृति--’ (६-१-७१) इति तुकि रूपम्। एवं ल्यपि च।]]
07
=>
[[४। ‘दुग्वोर्दीर्घश्च’ (वा। ८-२-४४) इति वचनात् निष्ठानत्वम्, अङ्गस्य दीर्घश्चभवति।]]
08
=>
[[आ। ‘श्रुत्यन्तवाचा ध्रुवया प्रदूनं घोरद्रवच्चक्रजिताज्ञितारिम्।’ धा। का। २। ३५।]]
09
=>
[[५। पचाद्यचि रूपमेवम्। ‘दुन्योरनुपसर्गे’ (३-१-१४२) इत्यत्र नास्य धातोः ग्रहणम्
\n\n तत्र नयतिसाह चर्यात् सानुबन्धकस्य सौवादिकस्य दुनोतेरेव ग्रहणम् इति व्याख्यातृभिः प्रतिपादितत्वात्।]]
10
=>
[[६। ‘क्तिच्क्तौ संज्ञायाम्’ (३-३-१७४) इति संज्ञायां क्तप्रत्यये, ‘अन्येषामपि--’ (६-३-१३७) इति दीर्घे, दूतः इति भवति।]]
11
=>
[[७। ‘चलनशब्दार्थादकर्मकात्--’ (३-२-१४८) इति तच्छीलादिषु कर्तृषु युचि रूपम्। विवक्षाभेदादकर्मकत्वं सम्भवति। दवनः = गन्धविशिष्टपुष्पविशेषः।]]
12
=>
[[८। यङन्तात् पचाद्यचि, यङो लुकि, ‘अचि श्नुधातु-’ (६-४-७७) इत्युवङि रूपमेवम्।]]
13
=>
[[९। ‘अचो यत्’ (३-१-९७) इति यति, गुणे, अवादेशे रूपम्।]]
14
=>
[[१०। ‘ओरावश्यके’ (३-१-१२५) इति ण्यति, वृद्धौ, आवादेशे, ‘लुम्पेदवश्यमः कृत्ये--’ (वा। ६-३-१०९) इति अवश्यमो मकारस्य लोपे रूपम्।]]
15
=>
[पृष्ठम्०७५५+ २७]
16
=>
[[१। यकि, ‘अकृत्सार्वधातुकयोः--’ (७-४-२५) इति दीर्घे रूपम्।]]
17
=>
[[२। ‘ॠदोरप्’ (३-३-५७) इति भावेऽप्प्रत्ययः। घञपवादः।]]
18
=>
[[३। ‘समियुद्रुदुवः’ (३-३-२३) इति कर्तृभिन्ने कारके घञ्। सन्दावः = पलायनम्।]]
19
=>
[[४। ‘शेषे विभाषा--’ (८-४-१८) इति नेः णत्वविकल्पः।]]
Capeller
German
1. दु दुनो॑ति brennen, (sich) quälen o.
verzehren
beunruhigen, palgen. Das
Pass. दूयते (°ति) hat die intrans. Bed.
p.p. दून (तुत) gebrannt, beunruhigt,
geplagt. Caus. दावयति Simpl. trans.
2. दु = 1. दिव् spielen, nur दविषाणि.
Grassman
German
(1. √du) [Cu. 〔258〕], brennen (transitiv), sowol als einfaches Verb, wie auch in Zusammensetzung mit abhí und ví, häufig im AV., wo namentlich ausser dem Particip II. dūná (pl. dūnā́s) die Stammform duno, dunu (dunv) in den Formen dunoti, dunvanti, abhidunván (Part. I.) vorkommt [s. BR.].
(2. √du* oder √dū*), in die Ferne gehen, liegt in dávīyas, daviṣṭhá, sowie in dem zugehörigen Positiv dūrá (fern) und in dūtá (Bote), in duvanya, duvasaná zu Grunde
zu vergleichen ist gr. δύω.
Burnouf
French
*दु दु। दवामि 1
p. दुदाव
f2.
दोष्यामि
a1. अदाविषम् et अदौषम्। Aller.
Gr.
δύω, δύσις.
*दु दु। दुनोमि 5
p. दुदाव
f2.
दोष्यामि
a1. अदौषम्
ppr. दुन्वत्
et
दूयामि, दूउए 4
p. दुदुवे
pp. दून।
Tourmenter, vexer, affliger.
Etre tourmenté: मन्मथेन par
l'amour
s'affliger, souffrir.
Gr.
ὀδύνη.
Stchoupak
French
दु-
(दू-) {%dunoti
dūyate -ti dāvayati
dūna- duta- %} --
brûler, consumer (fig. aussi)
affliger, peiner, tourmenter
caus. id.
pass. (et qqf. aussi दुनोति) être affligé, se désoler, se consumer.
दुः°
devant sifflantes pour दुस्° (et cf. दुःख- s. v.).