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त्रिपथगा (tripathagA)

 
शब्दसागरः
English
त्रिपथगा
f.
(-गा) The Ganges.
E.
त्रिपथ three roads, and गा who goes,
flowing through earth, heaven, and hell.
Yates
English
त्रिपथ-गा (गा) 1.
f.
The
Ganges.
Spoken Sanskrit
English
त्रिपथगा tripathagA
f.
earth
त्रिपथगा tripathagA
f.
flowing through heaven
त्रिपथगा tripathagA
f.
Ganges
त्रिपथगा tripathagA
f.
the lower regions
Wilson
English
त्रिपथगा
f.
(-गा) The Ganges.
E.
त्रिपथ three roads, and गा who goes, flowing through earth,
heaven, and hell.
Monier Williams Cologne
English
त्रि—पथ—गा
f.
‘flowing through heaven, earth, and the lower regions’, the Ganges,
MBh.
&c.
Apte Hindi
Hindi
त्रिपथगाम्
नपुं*
त्रि-पथम्-गाम् -
गंगा का विशेषण
Shabdartha Kaustubha
Kannada
त्रिपथगा
पदविभागः - > स्त्रीलिङ्गः
कन्नडार्थः - > ಗಂಗಾನದಿ
निष्पत्तिः - > गम्लृ (गतौ) - "डः" (वा० ३-२-४८)
व्युत्पत्तिः - > त्रयाणां पथां समाहारः त्रिपथम् त्रिपथेन स्वर्गमर्त्यपातालमार्गेण गच्छति
प्रयोगाः - > "गङ्गा त्रिपथगा नाम दिव्या भागीरथीति त्रीन् पथो भावयन्तीति तस्मात् त्रिपथगा स्मृताः ॥"
L R Vaidya
English
tri-paTa˚gA {% f. %} an epithet of the Ganges, तन्वी शरत्त्रिपथगा पुलिने कपोलौ Am.S.99.
Bopp
Latin
त्रिपथगा f. (e praec. et iens in fem.) nomen Gangis.
UP. 28.
Aufrecht Catalogus Catalogorum
English
त्रिपथगा Paribhāṣenduśekharaṭīkā by Rāghavendrācārya.
Abhyankara Grammar
English
त्रिपथगा name of a commentary on the Paribhasendusekhara written by Raghavendracarya Gajendra- gadkar, a resident of Satara and a pupil of Nilakanthasastri Thatte. He lived in the second half of the eighteenth and first half of the nineteenth century and wrote com- entaries on important grammar works.
Wordnet
Sanskrit
Synonyms:
गङ्गा, मन्दाकिनी, जाह्नवी, पुण्या, अलकनन्दा, विष्णुपदी, जह्नुतनया, सुरनिम्नगा, भागीरथी, त्रिपथगा, तिस्त्रोताः, भीष्मसूः, अर्घ्यतीर्थम्, तीर्थरीजः, त्रिदशदीर्घिका, कुमारसूः, सरिद्वरा, सिद्धापगा, स्वरापगा, स्वर्ग्यापगा, खापगा, ऋषिकुल्या, हैमव्रती, सर्वापी, हरशेखरा, सुरापगा, धर्मद्रवी, सुधा, जह्नुकन्या, गान्दिनी, रुद्रशेखरा, नन्दिनी, सितसिन्धुः, अध्वगा, उग्रशेखरा, सिद्धसिन्धुः, स्वर्गसरीद्वरा, समुद्रसुभगा, स्वर्नदी, सुरदीर्घिका, सुरनदी, स्वर्धुनी, ज्येष्ठा, जह्नुसुता, भीष्मजननी, शुभ्रा, शैलेन्द्रजा, भवायना, महानदी, शैलपुत्री, सिता, भुवनपावनी, शैलपुत्री
noun
भारतदेशस्थाः प्रधाना नदी या हिन्दुधर्मानुसारेण मोक्षदायिनी अस्ति इति मन्यन्ते।
"धर्मग्रन्थाः कथयन्ति राज्ञा भगीरथेन स्वर्गात् गङ्गा आनीता। "
अभिधानचिन्तामणिः
Sanskrit
--source--
गङ्गा त्रिपथगा भागीरथी त्रिदशदीर्घिका
त्रिस्रोता जाह्नवी मन्दाकिनी भीष्मकुमारसूः १०८१
सरिद्वरा विष्णुपदी सिद्धस्वःस्वर्गिखापगा
ऋषिकुल्या हैमवती स्वर्वापी हरशेखरा १०८२
-wordlist-
गङ्गा (स्त्री), त्रिपथगा (स्त्री), भागीरथी (स्त्री), त्रिदशदीर्घिका (स्त्री), त्रिस्रोतस् (स्त्री), जाह्नवी (स्त्री), मन्दाकिनी (स्त्री), भीष्मकुमारसू (स्त्री), सरिद्वरा (स्त्री), विष्णुपदी (स्त्री), सिद्धापगा (स्त्री), स्वरापगा (स्त्री), स्वर्ग्यापगा (स्त्री), खापगा (स्त्री), ऋषिकुल्या (स्त्री), हैमवती (स्त्री), स्वर्वापी (स्त्री), हरशेखरा (स्त्री)
अभिधानरत्नमाला
Sanskrit
भागीरथी
भागीरथी, सुरसरित्, विष्णुपदी, जाह्नवी, गङ्गा, मन्दाकिनी, त्रिपथगा, सरिद्वरा, त्रिदशदीर्घिका
भागीरथी सुरसरिद्विष्णुपदी जाह्नवी तथा गङ्गा
मन्दाकिनी त्रिपथगा सरिद्वरा त्रिदशदीर्घिका प्रोक्ता ६७३
verse 3.1.1.673
page 0077
नाममाला
Sanskrit
भागीरथी, त्रिपथगा, जाह्नवी, हिमवत्सुता, मन्दाकिनी, गङ्गा
भागीरथी त्रिपथगा जाह्नवी हिमवत्सुता
मन्दाकिनी द्युपर्यायधुनी गङ्गानदीश्वरः ७१
verse 0.1.1.71
page 0036
Mahabharata
English
Tripathagā = Gaṅgā: II, 1484 (Gº)
III, 9906, 9965 (Gº)
VI, 242
XII, 1351
XIII, 1835, †1860 (B. has Tripathā)
XIV, 1225 (Gº).
शब्दकल्पद्रुमः
Sanskrit
त्रिपथगा,
स्त्री,
(त्रिपथे स्वर्गमर्त्त्यपातालमार्गेगच्छतीति गम + डः ।) गङ्गा इत्यमरः ।१० ३१
(अस्या निरुक्तिरुक्ता यथा, रामा-यणे ४३ ।“गङ्गा त्रिपथगा नाम दिव्या भागीरथीति ।त्रीन् पथो भावयन्तीति तस्मात् त्रिपथगास्मृता
”)
वाचस्पत्यम्
Sanskrit
त्रिपथगा स्त्री त्रयाणां पथां समाहारः अच् समा० तेनगच्छति गम--ड गङ्गायाम् त्रिमार्गगादयोऽप्यत्र “गङ्गात्रिपथगा नाम दिव्या भागीरथीति त्रीन् पथोभावयन्तीति तस्मात् त्रिपथगा स्मृता” रामा० बा० ४४अ० “तराम सरितां श्रेष्ठां पुण्यां त्रिपथगां नदीम्” ४५अ० “तन्वी शरत्त्रिपथगा पुलिने कपोलौ लोले दृशौरुचिरचञ्चलखञ्जरीटौ” अमरुशत० “त्रिशिखां भ्रुकुटि-ञ्चास्य ददृशुर्दानवा रणे ललाटस्थां त्रिकूटस्थां गङ्गांत्रिपथगामिव” हरिवं० २३५ अ० “त्रीन् पथो हेतुनाकेन प्ताकयेल्लोकपावनी कथं गङ्गा त्रिपथगा विश्रुतासरिदुत्तमा त्रिषु लोकेषु धर्मज्ञ! कर्मभिः कैः सम-न्विता” इत्युपक्रमे रामप्रश्ने विश्वामित्रस्योत्तरम् रामा०आ० ३६ अ० वाक्यं गङ्गाशब्दे दृश्यम् णिनि ङीप् ।त्रिपथ गामिन्यादयोऽप्यत्र