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त्रयीतनु (trayItanu)

 
शब्दसागरः
English
त्रयीतनु
m.
(-नुः) The sun.
E.
त्रयी the three Vedas, and तनु diffusion
celebrated through these sacred books, or because the Sama Veda,
and portions of the other Vedas, are said to have proceeded from
the sun.
Yates
English
त्रयी-तनु (नु) 2.
m.
The sun.
Wilson
English
त्रयीतनु
m.
(-नुः) The sun.
E.
त्रयी the three Vedas, and तनु diffusion
celebrated through
these sacred books, or because the Sāma Veda, and portions of the other
Vedas, are said to have proceeded from the sun.
Monier Williams Cologne
English
त्रयी—तनु
m.
=
-देह,
Hcat.
i, 8, 425
Śiva
=
-मुख,
Gal.
Apte Hindi
Hindi
त्रयीतनुः
पुं*
त्रयी-तनुः -
सूर्य का विशेषण
त्रयीतनुः
पुं*
त्रयी-तनुः -
शिव का एक विशेषण
Shabdartha Kaustubha
Kannada
त्रयीतनु
पदविभागः - > पुल्लिङ्गः
कन्नडार्थः - > ಸೂರ್ಯ
व्युत्पत्तिः - > त्रयी वेदाः तनुर्यस्य
L R Vaidya
English
trayI-tanu {% m. %} 1. an epithet of the Sun
2. an epithet of Śiva.
अभिधानचिन्तामणिः
Sanskrit
--source--
आदित्यः सवितार्यमा खरसहस्रोष्णांशुरंशू रवि-
र्मार्तण्डस्तरणिर्गभस्तिररुणो भानुर्नभोऽहर्मणिः
सूर्योऽर्कः किरणो भगो ग्रहपुषः पूषा पतङ्गः खगो
मार्ताण्डो यमुनाकृतान्तजनकः प्रद्योतनस्तापनः ९५
p{0008}
ब्रध्नो हंसश्चित्रभानुर्विवस्वान्सूरस्त्वष्टा द्वादशात्मा हेलिः
मित्रो ध्वान्तारातिरब्जांशुहस्तश्चक्राब्जाहर्बान्धवः सप्तसप्तिः ९६
दिवादिनाहर्दिवसप्रभाविभाभासः करः स्यान्मिहिरो विरोचनः
ग्रहाब्जिनीगोद्युपतिर्विकर्तनो हरिः शुचीनौ गगनाद्ध्वजाध्वगौ ९७
हरिदश्वो जगत्कर्मसाक्षी भास्वान्विभावसुः
त्रयीतनुर्जगच्चक्षुस्तपनोऽरुणसारथिः ९८
-wordlist-
आदित्य (पुं), सवितृ (पुं), अर्यमन् (पुं), खरांशु (पुं), सहस्रांशु (पुं), उष्णांशु (पुं), अंशु (पुं), रवि (पुं), मार्तण्ड (पुं), तरणि (पुं), गभस्ति (पुं), अरुण (पुं), भानु (पुं), नभोमणि (पुं), अहर्मणि (पुं), सूर्य (पुं), अर्क (पुं), किरण (पुं), भग (पुं), ग्रहपुष (पुं), पूषन् (पुं), पतङ्ग (पुं), खग (पुं), मार्ताण्ड (पुं), यमुनाजनक (पुं), कृतान्तजनक (पुं), प्रद्योतन (पुं), तापन (पुं), ब्रध्न (पुं), हंस (पुं), चित्रभानु (पुं), विवस्वत् (पुं), सूर (पुं), त्वष्टृ (पुं), द्वादशात्मन् (पुं), हेलि (पुं), मित्र (पुं), ध्वान्ताराति (पुं), अब्जहस्त (पुं), अंशुहस्त (पुं), चक्रबान्धव (पुं), अब्जबान्धव (पुं), अहर्बान्धव (पुं), सप्तसप्ति (पुं), दिवाकर (पुं), दिनकर (पुं), अहस्कर (पुं), दिवसकर (पुं), प्रभाकर (पुं), विभाकर (पुं), भास्कर (पुं), मिहिर (पुं), विरोचन (पुं), ग्रहपति (पुं), अब्जिनीपति (पुं), गोपति (पुं), द्युपति (पुं), विकर्तन (पुं), हरि (पुं), शुचि (पुं), इन (पुं), गगनध्वज (पुं), गगनाध्वग (पुं), हरिदश्व (पुं), जगत्साक्षिन् (पुं), कर्मसाक्षिन् (पुं), भास्वत् (पुं), विभावसु (पुं), त्रयीतनु (पुं), जगच्चक्षुस् (पुं), तपन (पुं), अरुणसारथि (पुं)
अभिधानरत्नमाला
Sanskrit
आदित्य
आदित्य, सवितृ, सहस्रकिरण, प्रद्योतन, भास्कर, तिग्मांशु, तरणि, दिनमणि, भास्वत्, विवस्वत्, हरि, मार्तण्ड, तपन, विकर्तन, इन, पूषन्, पतङ्ग, भग, सूर्य, गोपति, यम, दिनकर, सूर, अंशुमालिन्, रवि, मिहिर, विरोचन, अर्क, तिमिररिपु, द्युमणि, अंशुमत्, अंशु, हरिदश्व, सप्ताश्व, प्रभाकर, भानुमत्, भानु, ब्रध्न, हंस, खग, मित्र, चित्रभानु, अहर्पति, कर्मसाक्षिन्, जगच्चक्षुस्, द्वादशात्मन्, त्रयीतनु
आदित्यः सविता सहस्रकिरणः प्रद्योतनो भास्कर-
स्तिग्मांशुस्तरणिस्तथा दिनमणिर्भास्वान्विवस्वान्हरिः
मार्तण्डस्तपनो विकर्तन इनः पूषा पतङ्गो भगः,
सूर्यो गोपतिरर्यमा दिनकरः सूरोंऽशुमाली रविः ३५
मिहिरो विरोचनोऽर्कस्तिमिररिपुर्द्युमणिरंशुमानंशुः
हरिदश्वः सप्ताश्वः प्रभाकरो भानुमान्भानुः ३६
ब्रध्नो हंसः खगो मित्रश्चित्रभानुरहर्पतिः
कर्मसाक्षी जगच्चक्षुर्द्वादशात्मा त्रयीतनुः ३७
verse 1.1.1.35
page 0006
शब्दकल्पद्रुमः
Sanskrit
त्रयीतनुः,
पुं,
(त्रयी वेदा एव तनुः शरीरं यस्य ।“त्रय्या विद्यया भगवन्तं त्रयीमयं सूर्य्यमात्मानंयजन्ते ।” इति भागवतवाक्यात् २० ।अस्य तथात्वम् ।) सूर्य्यः इति हलायुधः
वाचस्पत्यम्
Sanskrit
त्रयीतनु
पु०
त्रयी वेदा एव तनुरस्य सूर्य्ये हला० ।“स्वर्गद्वारं त्रय्या विद्याया भगवन्तं त्रयीमयं सूर्य्यमात्मानंयजन्ते” भाग० २० तस्य त्रयीमयत्वोक्तात्तथात्वम्