| YouTube Channel

कीलक (kIlaka)

 
शब्दसागरः
English
कीलक
m.
(-कः) A piller for cows, &c. to rub themselves against, or
one to which they are tied.
2. A pin, a bolt, a wedge.
E.
कन्
added to the preceding.
Capeller Eng
English
कील°क
m.
कीलिंका
f.
a pointed piece of wood
peg, bolt,
wedge, etc.
Yates
English
कीलक (कः) 1.
m.
A pillar for cows.
Spoken Sanskrit
English
कीलक - kIlaka -
m.
- splint
कीलक - kIlaka -
m.
- bolt
कीलक - kIlaka -
m.
- wedge
कीलक - kIlaka -
m.
- kind of pillar for cows to rub themselves against
कीलक - kIlaka -
m.
- pillar to which cows are tied
कीलक - kIlaka -
m.
- kind of tumour
कीलक - kIlaka -
m.
- pin
कीलक - kIlaka -
m.
- spike [ techn. ]
Wilson
English
कीलक
m.
(-कः) A pillar for cows, &c. to rub themselves against, or
one to which they are tied.
2 A pin, a bolt, a wedge.
E.
कन् added to the preceding.
Apte
English
कीलकः [kīlakḥ], 1 A wedge or pin.
A fence.
A pillar, column
see कील. -कम्
N.
of the inner syllables of a mantra. सो$हमिति कीलकम् Haṁsa
Up.*
2.
Apte 1890
English
कीलकः 1 A wedge or pin.
2 A fence.
3 A pillar, column
see कील.
Monier Williams Cologne
English
कीलक
m.
a pin, bolt, wedge,
Pañcat.
Hit.
a splint (for confining a broken bone),
Suśr.
a kind of tumour (having the form of a pin),
L.
(= शिवक) a kind of pillar for cows
&c.
to rub themselves against, or one to which they are tied,
L.
N.
of the forty-second year of the sixty years' cycle of Jupiter,
VarBṛS.
कीलक
m.
pl.
N.
of certain Ketus, ib.
कीलक
n.
N.
of the inner syllables of a Mantra.
Monier Williams 1872
English
कीलक, अस्, m. a pin, a bolt, a wedge
a splint
for confining a broken bone
a fence
also = शिवक,
a pillar for cows &c. to rub themselves against, or
one to which they are tied.
Benfey
English
कीलक कील + क,
m.
A wedge,
Pañc. 10, 7.
Apte Hindi
Hindi
कीलकः
पुं*
- कील - कन्
फन्नी या खूँटी
कीलकः
पुं*
- कील - कन्
"खम्बा, स्तम्भ"
Shabdartha Kaustubha
Kannada
कीलक
पदविभागः - > पुल्लिङ्गः
कन्नडार्थः - > ಪ್ರಭವ ಮೊದಲಾದ ೬೦ ಸಂವತ್ಸರಗಳಲ್ಲಿ ೪೨ ನೆಯದು
कीलक
पदविभागः - > पुल्लिङ्गः
कन्नडार्थः - > ಆಣಿ /ಮೊಳೆ
कीलक
पदविभागः - > पुल्लिङ्गः
कन्नडार्थः - > ಗೂಟ /ಹಸುಗಳನ್ನು ಕರೆಯುವಾಗ ತಡೆಗಟ್ಟುವ ಗೂಟ
प्रयोगाः - > "जायन्ते सर्वशस्यानि सुभिक्षं निरुपद्रवम् सौम्यवृष्टिर्भवेद्राजन् कीलके शुभं भवेत् ॥"
कीलक
पदविभागः - > पुल्लिङ्गः
कन्नडार्थः - > ಹೊಟ್ಟೆಯಲ್ಲಿ ಊತ /ಗೆಡ್ಡೆ /ಬಾವು
कीलक
पदविभागः - > पुल्लिङ्गः
कन्नडार्थः - > ಶಂಕು /ಕೀಲು /ಅಗುಳಿ
कीलक
पदविभागः - > पुल्लिङ्गः
कन्नडार्थः - > ಕಂಬ
निष्पत्तिः - > कील (बन्धने) - कर० "घञ्" (३-३-११७) स्वार्थे "कः"
व्युत्पत्तिः - > कीलति बध्नात्यनेन
कीलक
पदविभागः - > पुल्लिङ्गः
कन्नडार्थः - > ಕುರು /ಸ್ಫೋಟ
विस्तारः - > "स्फोटकः कीलको गण्डो विस्फोटः पिटका त्रयी" - वैज०
L R Vaidya
English
kIlaka {% m. %} 1. A wedge, a pin
2. a pillar, a column.
Bopp
Latin
कीलक m. (a praec. s. क) lignum transversarium. HIT.
49. 11. 13. 15.
Aufrecht Catalogus Catalogorum
English
कीलक tantr. Rādh 25.
Indian Epigraphical Glossary
English
kīlaka (EI 23), a peg [for marking boundaries].
Kridanta Forms
Sanskrit
कील् (की꣡लँ꣡ बन्धने - भ्वादिः - सेट्)
ल्युट् = कीलनम्
अनीयर् = कीलनीयः - कीलनीया
ण्वुल् = कीलकः - कीलिका
तुमुँन् = कीलितुम्
तव्य = कीलितव्यः - कीलितव्या
तृच् = कीलिता - कीलित्री
क्त्वा = कीलित्वा
ल्यप् = प्रकील्य
क्तवतुँ = कीलितवान् - कीलितवती
क्त = कीलितः - कीलिता
शतृँ = कीलन् - कीलन्ती
अभिधानरत्नमाला
Sanskrit
ध्रुवक
ध्रुवक, शिवक, शङ्कु, पुष्पलक, कीलक
ध्रुवकः शिवकः शङ्कुः पुष्पलकः कीलकः प्रोक्तः ४५१
verse 2.1.1.451
page 0052
शब्दकल्पद्रुमः
Sanskrit
कीलकः,
पुं,
(कीलति बध्नाति अनेन करणे घञ्स्वार्थे कः ।) कीलः खोँटा गोँज खिल इत्यादिभाषा गवां गात्रकण्डूयनार्थं गोष्ठे निखातस्तम्भः ।इति सुभूतिः
कण्डूयणार्थं काष्ठम् इति के-चित् बन्धनखण्टः इति केचित् यत्र बद्धागौर्दुह्यते सः इति केचित् इति भरतः
तत्पर्य्यायः शिवकः इत्यमरः ८३
वाचस्पत्यम्
Sanskrit
कीलक
पु०
कीलति बध्नात्यनेन करणे घञ् स्वार्थे ।१ स्तम्भभेदे (खोँटा) गवादेर्दोहनकाले रोधनार्थे काष्ठ-मयस्तम्भे सुभूतिः तन्त्रोक्ते देवताभेदे मन्त्रविशेषे
न०
।प्रभवादिषष्टिवर्षमध्ये वर्षभेदे तत्फलञ्च “जायन्तेसर्वशस्यानि सुभिक्षं निरुपद्रवम् सौम्यवृष्टि र्भवेद्राजन्!कीचके शुभं भवेत्” ज्यो० त० सप्तशतीजपाङ्गतयापाठ्ये स्त्रवभेदे
न०
“सर्वमेतद्विना यस्तु मन्त्रा-णामपि कीलकम्” इत्यादि तस्य कीलकत्वम्तज्ज्ञानं विना फलाजनकत्वात् तदुक्तं तत्रैव “कृष्णायां चचतुर्दश्यामष्टम्यां वा समाहितः ददाति प्रतिगृह्णातिनान्यथैषा प्रसीदति” इत्थं रूपेण कीलेन महादेवेनकीलितम् यो निष्कीलां विधायैनां नित्यं जपतिसम्पुटाम्” तत्रैव तज्ज्ञानस्या भावे निष्कलत्वोक्तेश्चतच्च गुरुलघुभेदेन द्विविधं गुप्तवत्यां विवृतिः” तेनकृष्णाष्टमीचतुर्दश्योः नूतनार्जितधनस्य देवातिथ्यादिभ्योयथोचितांशदानं तदवशिष्टस्य स्वायत्तीकरणमावश्यकंतद्विना सप्तशतीजपस्य फलजनकत्वमिति गम्यते “अर्गलकीलकं चादौ पठित्वा कचम् पठेत्” तत्रैव